UPSC Tough Questions: GS पेपर पिछले साल से ज्यादा मुश्किल, इतिहास, पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रश्नों ने उड़ाए उम्मीदवारों के होश
GS पेपर में एनालिटिकल सवालों ने उम्मीदवारों को किया सबसे ज्यादा परेशान
UPSC Tough Questions: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 ने इस बार लाखों उम्मीदवारों को काफी चुनौती दी है। 24 मई 2026 को आयोजित हुई प्रीलिम्स परीक्षा में जनरल स्टडीज पेपर को उम्मीदवारों ने पिछले वर्षों की तुलना में काफी कठिन बताया है। परीक्षा में पूछे गए कुछ सवाल इतने विश्लेषणात्मक और गहन थे कि अनुभवी एस्पिरेंट्स भी हैरान रह गए।
करीब 8 लाख 19 हजार उम्मीदवारों ने इस साल IAS, IPS और IFS जैसी सेवाओं के लिए आवेदन किया था। परीक्षा के तुरंत बाद सोशल मीडिया और कोचिंग संस्थानों में इन कठिन सवालों पर चर्चा छिड़ गई है। UPSC ने इस बार फैक्ट्स आधारित सवालों की बजाय मल्टी-डिसिप्लिनरी और एनालिटिकल प्रश्नों पर जोर दिया, जिससे पेपर का स्तर काफी ऊंचा हो गया।
UPSC Tough Questions: GS पेपर 1 का बढ़ा कठिनाई स्तर
उम्मीदवारों के मुताबिक, इस साल GS पेपर 1 पिछले साल की तुलना में लंबा और ज्यादा जटिल रहा। इतिहास, कला एवं संस्कृति से सबसे ज्यादा 20 सवाल पूछे गए। अर्थव्यवस्था से 19, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से 18, भूगोल से 13, पर्यावरण से 11 और शासन व राजनीति से 8 सवाल आए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार सवालों में गहरी समझ की जरूरत थी। सिर्फ किताबी ज्ञान काफी नहीं था, बल्कि वर्तमान घटनाओं के साथ ऐतिहासिक संदर्भ जोड़कर सोचने की क्षमता चाहिए थी। कई उम्मीदवारों ने परीक्षा हॉल से बाहर निकलते ही माना कि पेपर ने उनके पसीने छुड़ा दिए।
इन पांच सवालों ने मचाया सबसे ज्यादा हंगामा
परीक्षा में कुछ सवाल ऐसे थे जो पूरे पेपर में सबसे ज्यादा चर्चित रहे। ये सवाल न सिर्फ ज्ञान की परीक्षा लेते थे बल्कि उम्मीदवार की विश्लेषण क्षमता को भी परखते थे। पहला सवाल अंतरराष्ट्रीय संधियों से संबंधित था। इसमें पूछा गया कि भारत ने इनमें से कौन सी संधि अभी तक अनुमोदित नहीं की है। विकल्पों में रोजगार नीति संधि, जबरन श्रम उन्मूलन संधि, प्रवासी श्रमिकों के अधिकार संधि और जेनेवा संधि जैसे विकल्प थे। इस सवाल ने कई उम्मीदवारों को कन्फ्यूज किया क्योंकि इसमें विस्तृत अंतरराष्ट्रीय कानून की जानकारी जरूरी थी।
दूसरा सवाल भारत में स्थान-मूल्य प्रणाली के उपयोग पर था। इसमें मंकानी प्लेट्स (गुजरात, 595-596 ई.), नौवीं शताब्दी में शिलालेखों में इसका सामान्य होना और दक्षिण-पूर्व एशिया में सातवीं शताब्दी के संस्कृत शिलालेखों का जिक्र था। यह सवाल प्राचीन भारतीय गणित और इतिहास के गहरे ज्ञान की मांग करता था। तीसरा सवाल भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा हाल ही में पेश किए गए बम निष्क्रियीकरण प्रणाली के राष्ट्रीय मानक पर आधारित था। इसमें IS 19445:2025, उपकरणों की अंतर-संगतता और TBRL, DRDO तथा रूस के संस्थान के सहयोग का जिक्र था। रक्षा प्रौद्योगिकी और मानकीकरण के क्षेत्र में रुचि रखने वाले उम्मीदवार ही इसे आसानी से हल कर पाए।
चौथा सवाल 2025 में नोबेल पुरस्कार पाने वाले एक व्यक्ति ‘X’ से संबंधित था, जो ब्रिटेन में जन्मे थे और पुरस्कार मिलने के समय अमेरिकी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। विकल्पों में मिशेल एच. डेवोरेट, रिचर्ड रॉबसन, जॉन क्लार्क और जोएल मोकिर जैसे नाम थे। यह सवाल विज्ञान और अर्थशास्त्र के हालिया विकास पर आधारित था। पांचवां सवाल पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत NIRANTAR प्लेटफॉर्म से जुड़ा था। इसमें इकोसिस्टम सर्वे, इकोसिस्टम सर्विसेज और क्षमता विकास जैसे वर्टिकल्स तथा संबंधित लीड संस्थानों के बारे में पूछा गया। यह सवाल पर्यावरण संरक्षण और संस्थागत ढांचे की समझ की परीक्षा लेता था Lights Max।
CSAT पेपर में भी नए पैटर्न के सवाल
CSAT पेपर को लेकर भी चर्चा रही। शिक्षकों का कहना है कि इस बार कुछ सवाल नए पैटर्न के थे, जो उम्मीदवारों को चौंका गए। हालांकि कुल मिलाकर CSAT ज्यादा कठिन नहीं था। अच्छी तैयारी वाले उम्मीदवार इसे अच्छे अंकों से हल कर पाए, लेकिन कुछ रीजनिंग और गणितीय प्रश्न काफी ट्रिकी थे।
विशेषज्ञों की राय और विश्लेषण
विभिन्न कोचिंग संस्थानों के विशेषज्ञों ने कहा कि UPSC ने इस साल परीक्षा का स्तर जानबूझकर ऊंचा रखा। पिछले साल की तुलना में एनालिटिकल प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गई। इतिहास और संस्कृति पर ज्यादा फोकस किया गया, जो बताता है कि आयोग उम्मीदवारों में समग्र समझ विकसित करना चाहता है। एक वरिष्ठ कोच ने कहा, “इस बार पेपर उन उम्मीदवारों के लिए फायदेमंद रहा जो करंट अफेयर्स को गहराई से पढ़ते हैं और अंतर-विषयक जुड़ाव कूटनीतिक रूप से समझते हैं।”
Cut-off पर क्या है अनुमान?
कठिन पेपर को देखते हुए कट-ऑफ पिछले साल से थोड़ा कम रहने की संभावना है। पिछले तीन वर्षों के ट्रेंड को देखें तो सामान्य वर्ग के लिए कट-ऑफ 90-98 अंकों के बीच रहा है। इस साल 85-95 अंकों में सेफ जोन माना जा रहा है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े बाद में ही स्पष्ट होंगे।
UPSC की तैयारी में क्या सीख?
इस पेपर से एस्पिरेंट्स के लिए कई सीख निकलती हैं। सबसे जरूरी है कि तैयारी को व्यापक बनाएं। सिर्फ नोट्स रटने की बजाय समझ पर फोकस करें। करंट अफेयर्स को स्टेटिक ज्ञान के साथ जोड़कर पढ़ें। नियमित मॉक टेस्ट दें और गलतियों से सीखें। मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी पहले से शुरू कर दें क्योंकि प्रीलिम्स सिर्फ एक पड़ाव है।
UPSC का लगातार बदलता पैटर्न
UPSC लगातार अपना पैटर्न बदल रही है ताकि सच्चे प्रतिभाशाली उम्मीदवार चुने जा सकें। इस साल का पेपर इसी दिशा में एक कदम है। आयोग का फोकस अब उन उम्मीदवारों पर है जो विश्लेषणात्मक सोच रखते हैं और वर्तमान मुद्दों को ऐतिहासिक संदर्भ में देख सकते हैं।
UPSC Tough Questions: उम्मीदवारों की प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर कई एस्पिरेंट्स ने अपनी निराशा जताई। एक उम्मीदवार ने लिखा, “इतिहास और पर्यावरण के सवाल देखकर लगा जैसे PhD लेवल का पेपर हो।” वहीं कुछ ने कहा कि अच्छी तैयारी से पेपर मैनेज हो गया।
आगे का क्या है रोडमैप?
अब सभी की नजर आंसर की और कट-ऑफ पर है। UPSC जल्द ही आधिकारिक आंसर की जारी कर सकती है। मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुटे उम्मीदवारों को इस अनुभव से कूटनीतिक सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। UPSC Prelims 2026 ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह परीक्षा सिर्फ मेहनत नहीं बल्कि स्मार्ट रणनीति और गहरी समझ की परीक्षा है। जो उम्मीदवार इस चुनौती से गुजरकर मुख्य परीक्षा तक पहुंचेंगे, वे निश्चित रूप से बेहतर प्रशासक साबित होंगे।
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