Udhampur Encounter: उधमपुर में रातभर चला ऑपरेशन, दो आतंकी ढेर; सर्च ऑपरेशन अभी जारी
मजलता के जंगलों में सेना, पुलिस और CRPF की संयुक्त कार्रवाई, सर्च ऑपरेशन जारी
Udhampur Encounter: जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल करते हुए दो दुर्दांत आतंकियों को मार गिराया है। जिले के माजलता और ब्रत्तल क्षेत्र के घने वन क्षेत्र में 16 और 17 सितंबर की दरमियानी रात से शुरू हुआ यह संयुक्त आतंकवाद विरोधी अभियान सुबह तक चला। इस सघन कार्रवाई को भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने खुफिया इनपुट के आधार पर अंजाम दिया। सेना ने इस सफल आतंकवाद निरोधी कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सोहन’ नाम दिया है।
मुठभेड़ स्थल से मारे गए दोनों आतंकियों के शवों के साथ भारी मात्रा में आधुनिक हथियार, गोला-बारूद और युद्ध सामग्री बरामद की गई है। यद्यपि दो आतंकियों का खात्मा किया जा चुका है, किंतु सुरक्षाबलों ने ऑपरेशन को समाप्त घोषित नहीं किया है। घने जंगलों और दुर्गम प्राकृतिक गुफाओं वाले इस पहाड़ी इलाके में अन्य संदिग्धों या उनके छिपे हुए साथियों की मौजूदगी की आशंका को देखते हुए व्यापक घेराबंदी और सघन तलाशी अभियान लगातार जारी है।
Udhampur Encounter: खुफिया सूचना पर शुरू हुआ ‘ऑपरेशन सोहन’
उधमपुर के ब्रत्तल इलाके में भारी हथियारों से लैस विदेशी आतंकियों के एक दल की आवाजाही से संबंधित पुख्ता और विशिष्ट खुफिया सूचनाएं सुरक्षा एजेंसियों को प्राप्त हुई थीं। इसके तुरंत बाद सेना के विशेष कमांडो दस्ते, जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और सीआरपीएफ की टुकड़ियों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेर लिया। 16 सितंबर की देर रात जैसे ही सुरक्षा घेरा आतंकियों के संभावित ठिकाने की ओर बढ़ा, घने पेड़ों के पीछे छिपे आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई के साथ ही भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। यह पूरा इलाका अत्यंत ऊबड़-खाबड़, पथरीला और घने चीड़ के जंगलों से घिरा हुआ है। रात के समय तेज हवाओं और कम दृश्यता के कारण अभियान बेहद जोखिम भरा था। इसके बावजूद सुरक्षाबलों ने रणनीतिक रूप से आगे बढ़ते हुए आतंकियों के भागने के सभी संभावित रास्तों को सील कर दिया और रातभर चली इस गोलीबारी में दोनों आतंकियों को ढेर करने में सफलता प्राप्त की।
मारे गए आतंकियों की पहचान और आतंकी नेटवर्क की जांच
मुठभेड़ में निष्प्रभावी किए गए दोनों आतंकियों के पास से असाल्ट राइफल्स, भरी हुई मैगजीन, ग्रेनेड्स और दैनिक उपयोग की सामग्री बरामद हुई है। प्रारंभिक खुफिया रिपोर्टों में मारे गए आतंकियों के पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के ‘कथित कश्मीर जांबाज फोर्स’ या उससे जुड़े मॉड्यूल से संबंधित होने और उनके विदेशी नागरिक होने की प्रबल आशंका जताई जा रही है। हालांकि, सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां आधिकारिक तौर पर बायोमेट्रिक और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए उनकी सटीक पहचान स्थापित करने में जुटी हैं।
जांच अधिकारी मुठभेड़ स्थल से मिले संचार उपकरणों, जीपीएस डेटा और पैकेजिंग सामग्री का गहन तकनीकी विश्लेषण कर रहे हैं। इससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि यह आतंकी समूह अंतरराष्ट्रीय सीमा या नियंत्रण रेखा के किस हिस्से से घुसपैठ कर भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था और क्षेत्र में किन स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) ने उन्हें शरण अथवा रसद उपलब्ध कराई थी।
उधमपुर की सामरिक संवेदनशीलता और उत्तरी कमान की सुरक्षा
रणनीतिक और सामरिक दृष्टि से उधमपुर जिला जम्मू-कश्मीर में अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यहीं पर भारतीय सेना की सबसे महत्वपूर्ण ‘उत्तरी कमान’ का रणनीतिक मुख्यालय स्थित है, जो लद्दाख से लेकर जम्मू-कश्मीर की सभी सीमाओं की रक्षा का समन्वय करता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजमार्ग-44 इसी जिले से होकर गुजरता है, जो कश्मीर घाटी को शेष भारत से जोड़ने वाली मुख्य धमनी है।
पिछले कुछ महीनों से आतंकी संगठन जम्मू संभाग के शांत पहाड़ी इलाकों—जैसे डोडा, किश्तवाड़, कठुआ और उधमपुर के ऊपरी जंगलों—में अपनी गतिविधियां बढ़ाकर सुरक्षाबलों का ध्यान भटकाने की साजिश रच रहे हैं। घने जंगलों का फायदा उठाकर ये आतंकी प्राकृतिक गुफाओं में छिपने का प्रयास करते हैं। ऐसे संवेदनशील क्षेत्र में आतंकियों की मौजूदगी को समय रहते भांपकर उन्हें मार गिराना सुरक्षाबलों की एक बड़ी सामरिक कामयाबी माना जा रहा है।
माजलता के बीहड़ों में ड्रोन और डॉग स्क्वायड से तलाशी अभियान जारी
दो आतंकियों के मारे जाने के उपरांत भी सेना और पुलिस ने सतर्कता में कोई ढिलाई नहीं बरती है। माजलता और आसपास की धारों में आधुनिक निगरानी उपकरणों, थर्मल इमेजिंग कैमरों और मानव रहित निगरानी ड्रोन (UAV) की सहायता से चप्पे-चप्पे को खंगाला जा रहा है। सेना के विशेष खोजी श्वान दस्ते (Dog Squads) भी इस तलाशी अभियान में मोर्चे पर तैनात हैं ताकि मलबे या झाड़ियों में छिपाए गए किसी आईईडी (IED) या विस्फोटक का समय रहते पता लगाया जा सके।
क्षेत्र के निवासियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंगल से सटे रास्तों पर अस्थायी बैरिकेड्स लगाए गए हैं और लोगों को तलाशी अभियान संपन्न होने तक जंगल के भीतरी हिस्सों में न जाने की सलाह दी गई है। सुरक्षाबलों का मुख्य उद्देश्य पूरे इलाके को पूरी तरह सुरक्षित और सैनिटाइज घोषित करना है ताकि किसी भी तरह का अप्रत्याशित जोखिम न रहे।
Udhampur Encounter: निष्कर्ष
उधमपुर के माजलता में ‘ऑपरेशन सोहन’ के तहत दो आतंकियों का खात्मा भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ के उत्कृष्ट तालमेल और त्वरित खुफिया नेटवर्क का सशक्त प्रमाण है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद जवानों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए देश विरोधी तत्वों के मंसूबों को समय रहते धूल चटा दी। जम्मू संभाग में शांति और स्थिरता को भंग करने के सीमा पार के प्रयासों के बीच सुरक्षाबलों का यह आक्रामक और निर्णायक रुख यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा को चुनौती देने वाले किसी भी षड्यंत्र को पूरी ताकत से कुचल दिया जाएगा।
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