व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप का पर्ल हार्बर बयान बना कूटनीतिक विवाद, जापानी पीएम सानाए ताकाइची हुईं असहज, ईरान हमले पर सहयोगियों को सूचना न देने का किया बचाव

प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप के बयान से जापानी पीएम असहज दिखीं

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Donald Trump: राजनीतिक मंचों पर कभी-कभी एक वाक्य इतिहास के उन घावों को खोल देता है जिन्हें दशकों की दोस्ती ने मुश्किल से भरा होता है। ट्रंप के पर्ल हार्बर वाले बयान के साथ ठीक यही हुआ।

Donald Trump: व्हाइट हाउस प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या हुआ

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची इन दिनों अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं। व्हाइट हाउस में दोनों नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई जिसमें पत्रकारों ने कई महत्वपूर्ण सवाल पूछे। इसी दौरान एक जापानी पत्रकार ने ट्रंप से सीधा सवाल किया कि अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले से पहले जापान सहित यूरोप और एशिया के अपने सहयोगियों को इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं दी। इस सवाल का ट्रंप का जवाब सुनकर पीएम ताकाइची का चेहरा बदल गया।

Donald Trump: ट्रंप ने पर्ल हार्बर का जिक्र करते हुए क्या कहा

ट्रंप ने पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि “देखिए, एक बात तो यह है कि आप बहुत ज्यादा संकेत नहीं देना चाहते। जब हम गए, तो हम बहुत जोरदार तरीके से गए। हमने किसी को इसके बारे में नहीं बताया क्योंकि हम उन्हें चौंकाना चाहते थे।”

इसके तुरंत बाद ट्रंप ने कहा, “सरप्राइज के बारे में जापान से बेहतर कौन जानता है, ठीक है? आपने मुझे पर्ल हार्बर के बारे में क्यों नहीं बताया? आप सरप्राइज में हमसे कहीं ज्यादा विश्वास रखते हैं। हमें भी उन्हें चौंकाना था और हमने ठीक वैसा ही किया।” यह जवाब पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन गया।

Donald Trump: पर्ल हार्बर क्या है और यह इतना संवेदनशील क्यों है

पर्ल हार्बर हवाई द्वीप में स्थित अमेरिकी नौसेना का एक प्रमुख अड्डा है। 7 दिसंबर 1941 को जापान ने बिना किसी पूर्व घोषणा के इस नौसैनिक अड्डे पर अचानक हवाई हमला बोल दिया था। इस अप्रत्याशित हमले में 2000 से अधिक अमेरिकी सैनिक और नागरिक मारे गए थे। दर्जनों युद्धपोत और सैकड़ों विमान क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए थे। अगले ही दिन अमेरिका ने जापान के खिलाफ औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा कर दी और द्वितीय विश्व युद्ध में सक्रिय रूप से शामिल हो गया।

Donald Trump: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और जापान के संबंध कैसे बने

द्वितीय विश्व युद्ध अगस्त 1945 में तब समाप्त हुआ जब अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए। इस विनाशकारी घटना के बाद जापान ने आत्मसमर्पण कर दिया। सितंबर 1951 में अमेरिका और जापान के बीच शांति संधि पर हस्ताक्षर हुए जिसने दोनों देशों के बीच एक नए युग की शुरुआत की। आज दोनों देश एशिया प्रशांत क्षेत्र में सबसे मजबूत रणनीतिक सहयोगियों में से एक हैं। यही कारण है कि ट्रंप का पर्ल हार्बर वाला संदर्भ कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील था।

Donald Trump: जापानी पीएम ताकाइची की असहजता क्यों समझ में आती है

सानाए ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री हैं और रूढ़िवादी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की वरिष्ठ नेता हैं। वे जापान की राष्ट्रीय संप्रभुता और गौरव को लेकर सदैव संवेदनशील रही हैं। पर्ल हार्बर का संदर्भ जापान के लिए एक ऐसा ऐतिहासिक अध्याय है जो आज भी राष्ट्रीय शर्मिंदगी और गहरे दर्द का स्मरण कराता है। किसी भी जापानी नेता के सामने इस हमले का मजाकिया या तुलनात्मक संदर्भ में जिक्र करना स्वाभाविक रूप से असहजता पैदा करता है।

Donald Trump: अमेरिकी सहयोगियों को ईरान हमले की जानकारी न देना कितना बड़ा मुद्दा है

अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े सैन्य अभियान से पहले नजदीकी सहयोगियों को सूचित करना केवल शिष्टाचार नहीं बल्कि रणनीतिक आवश्यकता होती है। जब अमेरिका ने ईरान पर हमला किया और जापान, यूरोपीय सहयोगियों को पहले से कुछ नहीं बताया तो इसने NATO और इंडो-पैसिफिक साझेदारी पर सवाल खड़े कर दिए। जापान इस क्षेत्र में अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण सैन्य सहयोगी है और उसके यहां बड़ी संख्या में अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।

निष्कर्ष

ट्रंप का पर्ल हार्बर वाला बयान भले ही उनके अपने नजरिए से एक तार्किक तुलना था लेकिन कूटनीतिक मंच पर यह एक ऐसी चूक बन गई जो अमेरिका और जापान के संबंधों में एक अनावश्यक असहजता पैदा कर गई। इतिहास के घाव लंबे समय तक याद रहते हैं और राजनयिक वार्ताओं में उनका जिक्र सोच-समझकर करना होता है। अब देखना यह होगा कि यह बयान दोनों देशों के मजबूत रणनीतिक गठजोड़ पर कोई दीर्घकालिक प्रभाव डालता है या नहीं।

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