अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को किया खारिज, भारतीय निर्यातकों को मिलेगी बड़ी राहत, व्यापार में स्थिरता की उम्मीद, जानें पूरा मामला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी बताया, IEEPA के दुरुपयोग पर रोक; भारतीय निर्यातकों को राहत, व्यापार में स्थिरता की उम्मीद, ट्रंप ने 10% ग्लोबल टैरिफ ऐलान किया

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Trump Tariffs: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने 20 फरवरी को एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रंप द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल कानून IEEPA यानी International Emergency Economic Powers Act के तहत लगाए गए बड़े पैमाने के टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रपति के पास इस कानून का उपयोग करके इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है और ऐसा करने के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य है। इस फैसले से भारत सहित दुनिया के कई देशों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की खबर

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को सबसे ज्यादा फायदा होने की संभावना है। इंजीनियरिंग सामान, ऑटो पार्ट्स, रसायन, कपड़े और जेवर जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय निर्यातकों को पहले अचानक लगने वाले टैरिफ से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। इस फैसले के बाद व्यापार में अस्थिरता का खतरा काफी कम हो जाएगा और कारोबार करना पहले से कहीं अधिक आसान होगा। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उन निर्यातकों को रिफंड मिल सकता है जिन्होंने अमेरिकी बाजार में सामान बेचने के दौरान टैरिफ के रूप में अतिरिक्त भुगतान किया था।

Trump Tariffs: बातचीत के लिए बेहतर माहौल

इस फैसले से अमेरिका की टैरिफ नीति अब कांग्रेस की देखरेख वाले कानूनी ढांचे में वापस आ गई है। अब कोई भी टैरिफ लगाने से पहले जांच, नियमों का पालन और समय पर चर्चा अनिवार्य होगी। भारत के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब व्यापार वार्ता अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से हो सकेगी। विशिष्ट उत्पादों पर छूट मांगना आसान होगा और अचानक नीति बदलाव का डर कम होगा। उल्लेखनीय है कि फरवरी की शुरुआत में ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था और एक अंतरिम व्यापार समझौते का ऐलान भी किया था जिस पर मार्च में हस्ताक्षर की उम्मीद थी।

स्टील और एल्युमीनियम पर टैरिफ जारी रहेंगे

हालांकि यह फैसला हर तरह के टैरिफ पर लागू नहीं होता। ट्रेड एक्सपैंशन एक्ट 1962 के सेक्शन 232 के तहत लगाए गए स्टील, एल्युमीनियम और कुछ ऑटोमोबाइल सामानों पर टैरिफ पहले की तरह ही बने रहेंगे। भारतीय इस्पात और एल्युमीनियम उद्योग के लिए यह राहत अधूरी रहेगी। लेकिन समग्र रूप से देखा जाए तो यह फैसला भारत के हित में है क्योंकि अमेरिका हमारे सबसे बड़े व्यापार साझेदारों में से एक है।

Trump Tariffs: चीन, कनाडा और मैक्सिको को भी मिलेगी राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से चीन, कनाडा और मैक्सिको जैसे देश भी लाभान्वित होंगे जिन पर ट्रंप ने भारी-भरकम टैरिफ थोपे थे। इसके अलावा जब अन्य देशों पर लगे टैरिफ नियमों के कमजोर होंगे तो भारतीय निर्माताओं को नए अवसर मिलेंगे। कंपनियां जोखिम वाले स्रोतों से दूरी बनाकर भारत की ओर रुख कर सकती हैं जिससे सप्लाई चेन में नए द्वार खुलेंगे और भारत का कुल निर्यात और बढ़ सकता है।

यह फैसला अमेरिकी कांग्रेस की शक्तियों को पुनर्स्थापित करता है और एक राष्ट्रपति की मनमानी पर लगाम लगाता है। इसे कैसे लागू किया जाएगा इस पर अब पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।

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