गर्मी और लू में बढ़ता अस्थमा का खतरा: ओजोन, शुष्क हवा और प्रदूषण बन रहे बड़े ट्रिगर, PSRI डॉक्टर ने बताए बचाव के उपाय
गर्मी में ओजोन और शुष्क हवा अस्थमा मरीजों के लिए खतरनाक, डॉक्टर ने दिए बचाव के जरूरी टिप्स
Asthma Risk Summer: बढ़ती गर्मी और लू के थपेड़े केवल डिहाइड्रेशन या हीट स्ट्रोक का कारण नहीं बनते, बल्कि यह अस्थमा (Asthma) के मरीजों के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण समय होता है। अक्सर यह माना जाता है कि अस्थमा केवल सर्दियों की बीमारी है, लेकिन 5 मई 2026 को पीएसआरआई (PSRI) अस्पताल की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. नीतू जय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, गर्मियों में ओजोन का बढ़ता स्तर और शुष्क हवा अस्थमा अटैक के बड़े ट्रिगर बन सकते हैं। वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में, अस्थमा रोगियों को अपनी जीवनशैली और चिकित्सा प्रबंधन में कुछ विशेष बदलाव करने की आवश्यकता है।
गर्मी और अस्थमा का संबंध: क्यों बढ़ता है खतरा?
गर्मियों में अस्थमा के लक्षण बिगड़ने के पीछे कई वैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारण होते हैं। सबसे प्रमुख कारण शुष्क हवा है। जब हम अत्यधिक गर्म और शुष्क हवा में सांस लेते हैं, तो यह हमारी श्वसन नलियों (Airways) को सिकोड़ देती है, जिससे सूजन बढ़ सकती है। इसके अलावा, गर्मी के मौसम में हवा में पराग कण (Pollens) और धूल-मिट्टी के कण अधिक सक्रिय हो जाते हैं, जो फेफड़ों में पहुंचकर एलर्जी को ट्रिगर करते हैं।
शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी एक बड़ा जोखिम है। जब शरीर हाइड्रेटेड नहीं होता, तो फेफड़ों के मार्ग में मौजूद बलगम (Mucus) गाढ़ा हो जाता है, जिससे सांस लेने में घरघराहट और तकलीफ बढ़ जाती है। अचानक तापमान में बदलाव—जैसे चिलचिलाती धूप से निकलकर सीधे एसी (AC) के ठंडे कमरे में जाना—फेफड़ों की नलियों में ऐंठन (Bronchospasm) पैदा कर सकता है।
Asthma Risk Summer: ओजोन (Ozone) स्तर का घातक प्रभाव
शहरी क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान ‘ग्राउंड-लेवल ओजोन’ का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह गैस तब बनती है जब सूरज की तेज रोशनी नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (जो कारों और फैक्ट्रियों से निकलते हैं) के साथ प्रतिक्रिया करती है। ओजोन एक शक्तिशाली उत्तेजक है जो फेफड़ों के ऊतकों में जलन पैदा करता है।
अस्थमा के मरीजों के लिए ओजोन का बढ़ना किसी साइलेंट किलर से कम नहीं है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम कर देता है और इनहेलर या दवाओं के प्रभाव को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब दोपहर में धूप सबसे तेज हो, तब ओजोन का स्तर उच्चतम होता है, इसलिए मरीजों को इस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए।
Asthma Risk Summer: एयर कंडीशनर (AC) और धूल का प्रबंधन
एसी का उपयोग गर्मी से राहत तो देता है, लेकिन अस्थमा के मरीजों के लिए यह ‘दोधारी तलवार’ जैसा है। यदि एसी के फिल्टर नियमित रूप से साफ नहीं किए जाते, तो वे धूल, फंगस और मोल्ड (Mold) का घर बन जाते हैं। जब एसी चलता है, तो ये सूक्ष्म कण हवा में फैल जाते हैं और सीधे फेफड़ों में पहुँचते हैं।
इसके अलावा, घर के अंदर की हवा की गुणवत्ता (Indoor Air Quality) बनाए रखना भी जरूरी है। घर में ह्यूमिडिफायर का उपयोग करके हवा में नमी का सही स्तर बनाए रखा जा सकता है, जिससे श्वसन नलियां शुष्क नहीं होंगी। खिड़कियां तभी खोलें जब बाहर प्रदूषण और पराग कणों का स्तर कम हो।
विशेषज्ञ सलाह: बचाव के प्रभावी उपाय और सावधानियां
डॉ. नीतू जय के अनुसार, सावधानी और सही प्रबंधन ही अस्थमा अटैक से बचने का एकमात्र रास्ता है। मरीजों को निम्नलिखित सुझावों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:
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हाइड्रेशन: दिन भर पर्याप्त पानी पिएं। नारियल पानी और ताजे फलों का रस भी अच्छा विकल्प है, लेकिन बर्फ वाले अत्यधिक ठंडे पेय पदार्थों से बचें।
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मास्क का प्रयोग: यदि बाहर निकलना अनिवार्य हो, तो उच्च गुणवत्ता वाले मास्क का उपयोग करें जो धूल और सूक्ष्म प्रदूषकों को रोक सके।
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दवाओं का नियमित सेवन: अपना इनहेलर हमेशा साथ रखें और डॉक्टर द्वारा बताई गई प्रीवेंटर दवाओं को कभी न छोड़ें।
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एसी की सफाई: हर 15 दिन में एसी के फिल्टर साफ करें और तापमान को बहुत कम (जैसे 18°C) रखने के बजाय संतुलित (24-25°C) रखें।
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आहार: ताजा, सुपाच्य और विटामिन-सी युक्त भोजन का सेवन करें जो फेफड़ों की इम्यूनिटी बढ़ाए। मसालेदार और तले-भुने भोजन से परहेज करें।
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