Darling song 7 Khoon Maaf: 166 साल पुराने रूसी लोकगीत से इंस्पायर्ड वो गाना, फिल्म में एक्टिंग करने वाले थे करण जोहर-इम्तियाज अली, ऊषा उत्थुप की आवाज ने बनाया सुपरहिट
166 साल पुराना रूसी लोकगीत कालिंका, करण जोहर-इम्तियाज अली का मिस हुआ ऑफर
Darling song 7 Khoon Maaf: भारतीय हिंदी फिल्म उद्योग (बॉलीवुड) का संगीत के साथ एक बेहद गहरा, अटूट और ऐतिहासिक नाता रहा है। समय-समय पर हमारे दिग्गज संगीतकारों ने न केवल लोक धुनों, बल्कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय धुनों से प्रभावित होकर कई कालजयी गानों का निर्माण किया है। लेकिन बॉलीवुड के इतिहास के पन्नों में एक गाना ऐसा भी दर्ज है, जिसकी धुन किसी आधुनिक पश्चिमी पॉप से नहीं, बल्कि पूरे 166 साल पुराने एक पारंपरिक रूसी लोकगीत (Russian Folk Song) से पूरी तरह प्रेरित है। इस गाने के पीछे केवल संगीत का ही नहीं, बल्कि कूटनीतिक और सिनेमाई इतिहास का भी एक बहुत ही दिलचस्प और कड़क सस्पेंस छिपा हुआ है, क्योंकि इस गाने के वीडियो में बॉलीवुड के दो सबसे बड़े और मशहूर फिल्म निर्देशकों करण जोहर और इम्तियाज अली को बतौर अभिनेता काम करने का एक बहुत ही शानदार ऑफर दिया गया था, जिसे उन्होंने बाद में ठुकरा दिया था। अंततः पॉप और जैज़ संगीत की मल्लिका कही जाने वालीं दिग्गज गायिका ऊषा उत्थुप की बेहद दमदार और अनोखी भारी आवाज के जादू ने इस गाने को रिलीज होते ही रातों-रात पूरे देश में एक कड़क सुपरहिट ब्लॉकबस्टर बना दिया था।
यह गाना आज भी दशकों बाद भी पार्टियों, शादियों और पुराने संगीत के शौकीन फैंस के बीच अपनी उसी पुरानी ताजगी, थिरकाने वाली मेलोडी और हाई-एनर्जी के लिए बेहद लोकप्रिय बना हुआ है। किसी विदेशी धुन को भारतीय रंग-रूप में इस कदर ढाल देना कि वह पूरी तरह से देसी लगने लगे, यह हमारी संगीत विरासत की एक बहुत बड़ी और बेजोड़ खूबी रही है। आइए आज के इस विशेष मनोरंजन और संगीत इतिहास बुलेटिन के माध्यम से गहराई से जानने का प्रयास करते हैं कि आखिर वह कौन सा ऐतिहासिक गाना और फिल्म थी, इस धुन का 166 साल पुराने रूसी इतिहास से क्या अनोखा कनेक्शन है, और क्यों करण जोहर व इम्तियाज अली इस गाने के वीडियो में एक्टिंग करने से पूरी तरह चूक गए थे।
डार्लिंग गाने का पूरा इतिहास और 166 साल पुराने रूसी लोकगीत ‘कालिंका’ से कनेक्शन
हम यहाँ जिस सुपरहिट और कड़क गाने की बात कर रहे हैं, वह साल 2011 में आई प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक विशाल भारद्वाज की डार्क-कॉमेडी फिल्म ‘7 खून माफ’ (7 Khoon Maaf) का बेहद चर्चित और ब्लॉकबस्टर गाना ‘डार्लिंग’ (Darling) है। इस गाने को जब आप ध्यान से सुनेंगे, तो इसकी मुख्य मेलोडी और कोरस की बीट्स आपको पूरी तरह से थिरकने पर मजबूर कर देती हैं। संगीत के जानकारों के अनुसार, विशाल भारद्वाज ने इस गाने की पूरी कंपोजिशन साल 1860 में रूसी संगीतकार और लोकगीतकार इवान लारियोनोव द्वारा रचे गए विश्व प्रसिद्ध रूसी लोकगीत ‘कालिंका’ (Kalinka) के मूल सिद्धांतों और कंपोजिशन पर आधारित की थी। कालिंका रूस की लोक संस्कृति का एक ऐसा अमर हिस्सा है, जिसे वहां उत्सवों और खुशियों के मौकों पर बड़े पैमाने पर गाया जाता है।
चूंकि फिल्म की कहानी रस्किन बॉन्ड के प्रसिद्ध उपन्यास ‘सुसन्नाज़ सेवन हसबैंड्स’ पर आधारित थी और फिल्म के भीतर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा के सात पतियों में से एक पति एक रूसी सैन्य अधिकारी (निकिता बख्शिन) का किरदार निभा रहा था, इसलिए विशाल भारद्वाज ने कहानी की मांग को देखते हुए इस रूसी मेलोडी को चुना था। उन्होंने इस 166 साल पुरानी विदेशी धुन को भारतीय ढोलक, कांगो और गिटार के कड़क फ्यूजन के साथ इस तरह से मिक्स किया कि ‘कालिंका-कालिंका’ की वह तेज रफ्तार धुन हिंदी सिनेमा के श्रोताओं के लिए ‘डार्लिंग-डार्लिंग’ के रूप में एक बेहद कैची और सदाबहार पार्टी एंथम बन गई, जो संगीत निर्देशक के बेजोड़ विजन को पूरी तरह साबित करता है।
करण जोहर और इम्तियाज अली को मिला था एक्टिंग का ऑफर, जानिए क्यों छूटा मौका
इस गाने के वीडियो और मेकिंग से जुड़ी सबसे ज्यादा हैरान करने वाली और दिलचस्प इनसाइड स्टोरी इसके कास्टिंग डिसीजन को लेकर है। जब निर्देशक विशाल भारद्वाज इस गाने के वीडियो की प्लानिंग कर रहे थे, तो वे चाहते थे कि गाने के भीतर प्रियंका चोपड़ा के साथ कुछ ऐसे दिलचस्प चेहरे स्क्रीन पर नजर आएं जो दर्शकों के लिए पूरी तरह से अनपेक्षित (सरप्राइजिंग) हों। इसके लिए उन्होंने उस समय के दो सबसे बड़े और दिग्गज फिल्म डायरेक्टर्स करण जोहर और इम्तियाज अली से व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था, और उन्हें इस गाने के एक विशेष सीक्वेंस में बतौर कैमियो एक्टर परफॉर्म करने और प्रियंका के साथ स्क्रीन शेयर करने का एक बहुत ही कड़क और मजेदार ऑफर दिया था।
खबरों के अनुसार, करण जोहर और इम्तियाज अली दोनों ही विशाल भारद्वाज के इस अनूठे आइडिया और गाने की कड़क धुन को सुनकर बेहद उत्साहित थे और वे इसके लिए लगभग तैयार भी हो गए थे। लेकिन ऐन वक्त पर दोनों ही निर्देशकों की अपनी-अपनी अपकमिंग बड़ी फिल्मों के प्री-प्रोडक्शन शेड्यूल्स, तारीखों का क्लैश (डेट्स की कमी) और अत्यधिक व्यस्त दिनचर्या के कारण वे इस गाने की शूटिंग के लिए समय नहीं निकाल पाए, और उन्होंने बेहद शालीनता से इस ऑफर को ठुकरा दिया था। यदि उस समय यह कास्टिंग पूरी हो जाती, तो हिंदी सिनेमा के इतिहास में यह पहली बार होता जब दो इतने बड़े डायरेक्टर्स किसी दूसरे डायरेक्टर के गाने में एक साथ नाचते हुए दिखाई देते; बाद में उनकी जगह अन्य पेशेवर अभिनेताओं को शामिल करके इस गाने की शूटिंग को बेहद भव्य तरीके से पूरा किया गया था।
ऊषा उत्थुप की जादुई आवाज का ब्लास्ट और बॉलीवुड पर विदेशी प्रभाव
करण जोहर और इम्तियाज अली के एक्टिंग न करने के बाद भी इस गाने की लोकप्रियता में रत्ती भर भी कमी नहीं आई, और इसका पूरा श्रेय जाता है देश की सबसे शानदार और कड़क आवाज की मल्लिका ऊषा उत्थुप (Usha Uthup) को। विशाल भारद्वाज को एक ऐसी आवाज की तलाश थी जो इस रशियन-भोजपुरी मिक्स गाने को एक अत्यधिक बोल्ड, एनर्जेटिक और थोड़ा विंटेज टेक्सचर दे सके, और इसके लिए ऊषा उत्थुप से बेहतर कोई विकल्प हो ही नहीं सकता था। अपनी पारंपरिक कांजीवरम साड़ी और बड़ी बिंदी के सिग्नेचर स्टाइल के लिए मशहूर ऊषा उत्थुप ने जब माइक संभाला, तो उन्होंने अपनी भारी और कड़क आवाज से इस गाने के भीतर एक ऐसा जबरदस्त प्राण फूंक दिया कि यह गाना सीधे दर्शकों के दिलों में उतर गया। इस गाने के लिए उन्हें बाद में सर्वश्रेष्ठ पार्श्व गायिका का प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था।
यदि व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो बॉलीवुड संगीत में विदेशी धुनों और लोकगीतों का प्रभाव कोई नई बात नहीं है; राज कपूर के जमाने के ‘आवारा हूं’ से लेकर आज के आधुनिक दौर तक, हमारे संगीतकारों ने हमेशा से ही वैश्विक संगीत के बेहतरीन हिस्सों को भारतीय मिजाज में बहुत ही खूबसूरती से ढाला है। लेकिन ‘डार्लिंग’ गाने की सफलता इसलिए सबसे अनूठी और कड़क मानी जाती है क्योंकि इसमें संगीतकार ने रूसी संस्कृति के क्लासिक गौरव को बिना ठेस पहुंचाए, उसे भारतीय सिनेमा के व्यावसायिक और मनोरंजक ढांचे के भीतर पूरी तरह से फिट कर दिया, जो हमारी फिल्म इंडस्ट्री की सांस्कृतिक उदारता और वैश्विक दृष्टिकोण को पूरी दुनिया के सामने बेहद मजबूती के साथ प्रदर्शित करता है।
निष्कर्ष: संगीत की अमर विरासत और सदाबहार गानों का भविष्य
‘7 खून माफ’ फिल्म के इस कड़क और सदाबहार गाने ‘डार्लिंग’ की यह पूरी कहानी यह पूरी तरह साबित करती है कि एक बेहतरीन और सच्चा संगीत कभी भी समय, भूगोल या भाषाओं की सीमाओं में बंधकर नहीं रहता है; जो धुन 166 साल पहले रूस के सुदूर गांवों में लोकगीत के रूप में गाई जाती थी, वह आज भी भारत के बड़े-बड़े शहरों के डिस्को और पब्स में युवाओं को झूमने पर मजबूर कर रही है। आज के इस डिजिटल और हाई-टेक युग में जब संगीत बहुत तेजी से रीमेक और रीमिक्स के दौर से गुजर रहा है, विशाल भारद्वाज और ऊषा उत्थुप का यह रचनात्मक प्रयोग आने वाले नए और युवा संगीतकारों के लिए एक बहुत बड़ी खुली पाठशाला और प्रेरणा का स्रोत है कि किस प्रकार बिना मौलिकता खोए अंतरराष्ट्रीय धुनों से एक कालजयी रचना तैयार की जा सकती है।
करण जोहर और इम्तियाज अली भले ही इस गाने का हिस्सा न बन पाए हों, लेकिन इस गाने के विजुअल्स, इसकी कोरियोग्राफी और इसकी कड़क मेलोडी ने इसे भारतीय सिनेमा की अमर विरासत का एक सबसे चमकीला सितारा हमेशा के लिए बना दिया है; इसलिए जब भी आप अगली बार इस गाने को सुनें, तो इसके पीछे छिपे इस महान रूसी इतिहास और कूटनीतिक कड़कपन को याद करना बिल्कुल न भूलें, जो आपके संगीत सुनने के आनंद और खुशियों को कई गुना अधिक बढ़ा देगा।
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