Sugar Price: घटने की बजाय फिर बढ़े चीनी के दाम, यूपी की मिलों ने कीमत घटाने से किया साफ इनकार
Sugar Price: घटने की बजाय फिर बढ़े चीनी के दाम, यूपी की मिलों ने कीमत घटाने से किया साफ इनकार
Sugar Price: घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को लेकर आम उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। केंद्र सरकार ने स्टॉक सीमा घटाने, कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति देने और बिक्री कोटा प्रणाली में बदलाव जैसे कई कदम उठाए, लेकिन इसके बावजूद चीनी की कीमतों में तेजी थमने का नाम नहीं ले रही। बुधवार को मिल स्तर यानी एक्स-मिल और थोक बाजार में चीनी के दाम मजबूत बने रहे, जबकि कई मिलों ने कीमतों में और बढ़ोतरी कर दी। सबसे बड़ी वजह उत्तर प्रदेश की निजी चीनी मिलों का दाम घटाने से इनकार करना बताया जा रहा है, जिसके चलते महाराष्ट्र और गुजरात की मिलों ने भी अपने रेट बढ़ा दिए। इस हफ्ते चीनी के दाम दो सप्ताह बाद पहली बार पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गए हैं, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर सीधा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
Sugar Price: यूपी की मिलों के रुख से बढ़ी मुश्किल
उद्योग सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश की अधिकांश निजी चीनी मिलें फिलहाल अपनी कीमतें कम करने को तैयार नहीं हैं, जिसका सीधा असर पूरे देश के चीनी बाजार पर पड़ रहा है। इसी रुख को देखते हुए महाराष्ट्र और गुजरात की कुछ मिलों ने भी अपने दाम बढ़ा दिए हैं। सप्ताह की शुरुआत से अब तक चीनी के दाम दो प्रतिशत से अधिक बढ़ चुके हैं, और बुधवार को एक्स-मिल चीनी की कीमतें 4,900 से 5,100 रुपये प्रति क्विंटल के बीच दर्ज की गईं। हालांकि महाराष्ट्र की सहकारी मिलों ने सरकार के हस्तक्षेप के बाद शुरुआती दौर में दाम घटाए थे, लेकिन अब वहां भी कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हो गया है।
त्योहारी मांग और कम स्टॉक ने बिगाड़ा गणित
बाजार जानकारों का कहना है कि व्यापारियों को उम्मीद थी कि सरकारी हस्तक्षेप के बाद चीनी की कीमतें और नीचे आएंगी, इसी सोच के चलते उन्होंने बड़े पैमाने पर खरीदारी करने से परहेज किया। इस रणनीति का नतीजा यह हुआ कि बाजार में हैंड-टू-माउथ जैसी स्थिति बन गई, यानी जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी होती रही। इसी बीच कृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी जैसे लगातार दो बड़े त्योहारों के चलते चीनी की मांग अचानक बढ़ गई। व्यापारियों के पास सीमित स्टॉक और त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग का सीधा फायदा उठाते हुए मिलों ने इस सप्ताह दाम बढ़ा दिए, जबकि ट्रकों की कमी ने आपूर्ति व्यवस्था को भी प्रभावित किया।
महाराष्ट्र की मिलों ने भी बढ़ाए रेट
सामान्य तौर पर महाराष्ट्र की चीनी उत्तर प्रदेश की तुलना में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती बिकती है, लेकिन पिछले सप्ताह दोनों राज्यों के बीच यह अंतर बढ़कर 600 रुपये से भी अधिक हो गया था। उत्तर प्रदेश की मिलों द्वारा ऊंची कीमतें बनाए रखने के बाद महाराष्ट्र की मिलों ने भी अपने ऑफर रेट में इजाफा कर दिया। उद्योग सूत्रों के मुताबिक 8 सितंबर को महाराष्ट्र की मिलों ने पहले सप्ताह का बिक्री कोटा पूरा करने के बाद अपनी कीमतों में 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी कर दी, जिससे दोनों राज्यों के बीच कीमतों का अंतर और चौड़ा हो गया।
Sugar Price: सरकार के हस्तक्षेप के बावजूद कीमतों पर काबू नहीं
खुदरा बाजार में चीनी की कीमत 70 रुपये प्रति किलो के पार जाने के बाद खाद्य मंत्रालय ने मासिक बिक्री कोटा प्रणाली को बदलकर पखवाड़ा आधारित कर दिया था। नए नियमों के तहत मिलों को अपने आवंटित कोटे का 40 प्रतिशत हिस्सा पहले सप्ताह में और बाकी बचा हिस्सा दूसरे सप्ताह में बेचना अनिवार्य किया गया। इसके अलावा केंद्र सरकार ने 20 अगस्त को 31 अक्टूबर तक कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी थी, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके। इसके साथ ही निर्यात के लिए तय की गई चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की छूट भी दी गई, लेकिन इन तमाम कदमों के बावजूद कीमतों पर अपेक्षित नियंत्रण नहीं हो पाया है।
चीनी की कीमतों में जारी यह तेजी आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ सरकार के लिए भी चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि तमाम नीतिगत हस्तक्षेप के बावजूद बाजार में स्थिरता नहीं आ पाई है। त्योहारी मांग, सीमित स्टॉक और परिवहन की दिक्कतों ने मिलकर इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में अगर सरकार की ओर से कोई और सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो चीनी की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की रसोई के बजट पर पड़ेगा। ऐसे में बाजार पर करीबी नजर बनाए रखना जरूरी हो गया है।
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