Stock Market Today: निफ्टी 24,500 के नीचे फिसला, सेंसेक्स 250 अंक टूटा; कच्चे तेल और वैश्विक तनाव ने बढ़ाई चिंता

कच्चे तेल की तेजी और मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार दबाव में, निफ्टी 24,500 के नीचे

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Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार का दिन निवेशकों के लिए भारी अनिश्चितता और मानसिक दबाव लेकर आया। वैश्विक बाजारों से मिल रहे मिले-जुले संकेतों, मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अचानक बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेजी के कारण घरेलू बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल देखा गया। दिन की शुरुआत से ही बिकवाली के दबाव में रहे भारतीय सूचकांक कारोबार समाप्त होने तक संभल नहीं पाए। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 लगभग 0.2 प्रतिशत गिरकर 24,526.85 के स्तर पर आ गया। वहीं, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदनशील सूचकांक सेंसेक्स करीब 252 अंक यानी 0.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,290.56 के स्तर पर बंद हुआ।

बाजार में आई इस अचानक गिरावट ने निवेशकों को सतर्क मोड पर ला दिया है। पिछले कुछ हफ्तों से जो बाजार मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था, उसमें इस तरह की गिरावट ने बड़े निवेशकों को भी मुनाफावसूली करने पर मजबूर कर दिया है।

Stock Market Today: बाजार खुलते ही दिखा बिकवाली का भारी दबाव

मंगलवार सुबह जब शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत हुई, तभी से बाजार के तेवर ढीले दिखाई दे रहे थे। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक अस्थिरता और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका तथा ईरान के बीच किसी नतीजे पर न पहुंच पाने की खबरों ने निवेशकों की धारणा को गहराई से प्रभावित किया। निवेशकों ने जोखिम लेने के बजाय अपने पैसे को सुरक्षित निकालने या मुनाफावसूली करने का रास्ता चुना, जिसके चलते सूचकांकों में लगातार गिरावट दर्ज की गई।

कारोबारी सत्र के दौरान निफ्टी 50 ने 24,500 के उस अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़ दिया, जिसे बाजार विश्लेषक पिछले कई कारोबारी सत्रों से एक मजबूत सपोर्ट ज़ोन मान रहे थे। सेंसेक्स में भी 250 अंकों से अधिक की सेंध लग गई। व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो लेजर पावर और त्रिवेणी टरबाइन जैसी कंपनियों के शेयरों में लगभग 7 प्रतिशत तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इन शेयरों में हुई बिकवाली ने पूरे बाजार के सेंटीमेंट को कमजोर करने का काम किया।

कच्चे तेल की जलती आग ने बाजार का स्वाद बिगाड़ा

भारतीय शेयर बाजार पर दबाव का सबसे बड़ा और प्रत्यक्ष कारण कच्चे तेल यानी क्रूड ऑयल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई अचानक तेजी को माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को फिर से सुगम बनाने और समझौते पर पहुंचने की उम्मीदें बेहद कमजोर हो गई हैं। इसके चलते सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में करीब 5 प्रतिशत तक का उछाल आया था।

वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव उछलकर लगभग 82.13 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड का भाव 87.72 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था। हालांकि मंगलवार के शुरुआती एशियाई कारोबार में कच्चे तेल में 0.19 डॉलर यानी 0.23 प्रतिशत की हल्की नरमी देखी गई और यह 81.94 डॉलर पर ट्रेड कर रहा था, लेकिन ऊंचे स्तर पर बने रहने के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां बढ़ गई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में क्रूड महंगा होने से देश में महंगाई दर बढ़ने और भारतीय कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा विपरीत असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है।

बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर्स में मची अफरातफरी

मंगलवार को आई गिरावट का सबसे बड़ा नुकसान बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को झेलना पड़ा। निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 0.64 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू (सार्वजनिक क्षेत्र के) बैंक इंडेक्स में 0.62 प्रतिशत की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग शेयरों में आई इस कमजोरी ने निफ्टी और सेंसेक्स दोनों को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।

निफ्टी 50 की टॉप लूजर्स सूची में मैक्स हेल्थकेयर, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, अपोलो हॉस्पिटल्स, एक्सिस बैंक, इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) और एसबीआई लाइफ जैसी नामचीन कंपनियां शामिल रहीं। इन दिग्गज शेयरों में दिन भर बिकवाली का बोलबाला रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ब्याज दरों के रुझान को लेकर बनी अनिश्चितता और बैंकों के आगामी तिमाही नतीजों को लेकर जताई जा रही आशंकाओं के कारण निवेशक फिलहाल बैंकिंग सेक्टर से दूरी बना रहे हैं।

गिरावट के बीच आईटी और ऑटो सेक्टर्स ने थामा बाजार का हाथ

चौतरफा बिकवाली और निराशाजनक माहौल के बावजूद कुछ ऐसे क्षेत्र भी रहे जिन्होंने बाजार को बहुत ज्यादा नीचे गिरने से बचा लिया। सूचना प्रौद्योगिकी यानी आईटी क्षेत्र के शेयरों ने मंगलवार को शानदार प्रदर्शन किया और निवेशकों को बड़ी राहत दी। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी और टेलीकॉम इंडेक्स में 0.73 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 0.66 प्रतिशत और निफ्टी आईटी इंडेक्स 0.63 प्रतिशत की तेजी के साथ हरे निशान पर कारोबार करते नजर आए।

आईटी सेक्टर के अलावा रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल सेक्टर्स में भी खरीदारी का रुख देखा गया। इन क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी इसलिए बनी रही क्योंकि हाल ही में आए कुछ कंपनियों के तिमाही नतीजे काफी अच्छे रहे हैं और दीर्घकालिक आधार पर इन कंपनियों की विकास संभावनाएं बेहद मजबूत दिख रही हैं। खास तौर पर आईटी कंपनियों को वैश्विक मांग में सुधार और डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति का सीधा फायदा मिलता दिख रहा है।

एशियाई बाजारों में देखा गया मिला-जुला और असमंजस भरा रुख

भारतीय शेयर बाजार जिस समय गिरावट का सामना कर रहा था, उसी दौरान एशिया के अन्य प्रमुख शेयर बाजारों में भी मिला-जुला और अनिश्चितता से भरा कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 2.08 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ मजबूती से कारोबार कर रहा था, जिसे वहां के स्थानीय आर्थिक आंकड़ों से समर्थन मिला। इसके ठीक विपरीत दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.96 प्रतिशत की गिरावट दर्ज कर रहा था।

ऑस्ट्रेलिया का एएसएक्स 200 इंडेक्स 0.20 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.01 प्रतिशत की नगण्य गिरावट के साथ लगभग सपाट बना रहा। दुनिया के प्रमुख एशियाई बाजारों से एक समान दिशा न मिल पाने के कारण भारतीय निवेशकों का मनोबल कमजोर पड़ा और उन्होंने आक्रामक खरीदारी करने के बजाय बाजार से दूरी बनाना ही मुनासिब समझा।

Stock Market Today: निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए आने वाले दिनों की रणनीति

बाजार के दिग्गज विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि आने वाले कुछ कारोबारी सत्रों में घरेलू शेयर बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक घटनाक्रमों और कच्चे तेल के भाव पर निर्भर करेगी। यदि मध्य पूर्व में जारी तनाव में थोड़ी कमी आती है या राजनयिक वार्ता के जरिए कोई सकारात्मक समाधान निकलता है, तो बाजार में तेजी से रिकवरी देखी जा सकती है। इसके अलावा, अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़े और अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की आगामी मौद्रिक नीति भी भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

घरेलू स्तर पर बात करें तो आईटी, ऑटो और फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स में निवेश के बेहतरीन अवसर बने रह सकते हैं, जबकि बैंकिंग और उच्च मूल्यांकन वाले शेयरों में कुछ समय सतर्क रहने की जरूरत है। तकनीकी विश्लेषण के लिहाज से निफ्टी के लिए 24,500 के ठीक नीचे का स्तर एक नए सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है। यदि यह सपोर्ट स्तर टूटता है तो निफ्टी में और निचला स्तर देखने को मिल सकता है। दूसरी तरफ, सेंसेक्स के लिए 78,000 का स्तर एक मजबूत आधार माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, मंगलवार का यह कारोबारी दिन निवेशकों को बेहद सतर्क रहने का संदेश दे गया है। आने वाले समय में बाजार में उतार-चढ़ाव का यह सिलसिला जारी रह सकता है। ऐसे अनिश्चित माहौल में खुदरा निवेशकों को किसी भी शेयर में जल्दबाजी में बड़ा दांव लगाने से बचना चाहिए। विशेषज्ञों का परामर्श है कि निवेशक केवल उन्हीं कंपनियों और सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करें जिनके बुनियादी आधार (फंडामेंटल्स) मजबूत हैं और जो लंबी अवधि में टिकाऊ मुनाफा देने की क्षमता रखते हैं।

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