Stock Market Today: 13 अक्टूबर को Sensex-Nifty पर महंगाई और कच्चे तेल का दबाव, GIFT Nifty से मिल रहे बढ़त के संकेत
सितंबर की महंगाई, महंगा कच्चा तेल, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और HCLTech के नतीजे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 13 अक्टूबर को निवेशकों की पैनी नजर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर टिकी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज बिकवाली देखी गई थी और वे लाल निशान में बंद हुए थे। हालांकि, मंगलवार की सुबह गिफ्ट निफ्टी से मिले शुरुआती संकेत एक हल्की सकारात्मक शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, सितंबर महीने के महंगाई आंकड़े और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार निकासी घरेलू बाजार पर भारी दबाव बना सकती है।
Stock Market Today: सोमवार को बिकवाली के दबाव में फिसला था बाजार
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी 12 अक्टूबर को भारतीय बाजारों ने अच्छी शुरुआत की थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली हावी होने के चलते दोनों प्रमुख सूचकांक लुढ़क कर बंद हुए। बीएसई का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 547.65 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71,924.68 के स्तर पर आ गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 157.10 अंक फिसलकर 22,363.35 के स्तर पर बंद हुआ।
बाजार में इस बिकवाली का मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी और विदेशी निवेशकों का सतर्क रुख रहा। सोमवार के सत्र में बढ़त के साथ खुले सूचकांकों का तेजी न बनाए रख पाना यह दर्शाता है कि मौजूदा स्तरों पर ट्रेडर्स और बड़े फंड हाउस आक्रामक खरीदारी से बच रहे हैं।
गिफ्ट निफ्टी से मिले शुरुआती बढ़त के संकेत
मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 22,423 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद स्तर से लगभग 40 से 50 अंक की बढ़त का संकेत दे रहा था। इस शुरुआती रुझान से उम्मीद जताई जा रही थी कि घरेलू शेयर बाजार हरे निशान में शुरुआत करने की कोशिश कर सकते हैं।
हालांकि, एशियाई बाजारों का मिला-जुला और कमजोर रुख घरेलू निवेशकों के उत्साह को सीमित कर सकता है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि गिफ्ट निफ्टी की शुरुआती बढ़त केवल दिन की शुरुआत तय करती है, लेकिन वास्तविक दिशा घरेलू व्यापक आर्थिक संकेतकों और वैश्विक स्तर पर कमोडिटी की कीमतों से ही तय होगी।
महंगाई का झटका और कच्चे तेल की उछाल बने सिरदर्द
दलाल स्ट्रीट के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता का विषय खुदरा मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़े बन गए हैं। सितंबर 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर उछलकर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक की 6 प्रतिशत की ऊपरी सहनीय सीमा के काफी करीब है। महंगाई में इस तीव्र उछाल के बाद निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावनाओं को बड़ा झटका लगा है, जिससे बैंकिंग, ऑटो और रियल एस्टेट जैसे ब्याज दर-संवेदनशील क्षेत्रों में निवेशकों की धारणा कमजोर हो सकती है।
इसके साथ ही, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊंचे स्तरों पर टिकी हुई हैं। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है, जिससे महंगे कच्चे तेल का सीधा असर देश के व्यापार घाटे, चालू खाता घाटे और रुपये की मजबूती पर पड़ता है। ऊंची तेल कीमतों से एविएशन, पेंट्स, टायर और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
आईटी सेक्टर और दूसरी तिमाही के नतीजों पर टिकी निगाहें
चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे अब औपचारिक रूप से सामने आने लगे हैं, जिससे संबंधित शेयरों में सेक्टर-विशिष्ट हलचल देखने को मिल रही है। सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र में एचसीएलटेक ने अपने तिमाही शुद्ध लाभ में 21.2 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी दर्ज की है, लेकिन कंपनी द्वारा भविष्य के राजस्व वृद्धि को लेकर जाहिर किए गए सतर्क दृष्टिकोण और वैश्विक स्तर पर आईटी खर्च में सुस्ती के संकेतों ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव और पश्चिमी देशों में मंदी की आशंकाओं के बीच पूरे टेक पैक पर बाजार का विशेष फोकस बना रहेगा।
दूसरी ओर, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का सिलसिला घरेलू बाजार की रफ्तार को धीमा कर रहा है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) और खुदरा निवेशकों द्वारा एसआईपी के जरिए लगातार की जा रही खरीदारी बाजार को बहुत बड़े गोते से बचा रही है, जिससे बाजार एक सीमित दायरे में कंसोलिडेट करता नजर आ सकता है।
Stock Market Today: बाजार में मौजूदा स्तरों पर क्या होनी चाहिए रणनीति?
आज के कारोबारी सत्र में घरेलू और वैश्विक दोनों तरह के संकेतकों के बीच खींचतान देखने को मिल सकती है। निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए यह समय जल्दबाजी में कोई भी बड़ा आक्रामक दांव लगाने का नहीं है, बल्कि चुनिंदा शेयरों पर आधारित दृष्टिकोण अपनाना अधिक सुरक्षित रहेगा।
तकनीकी स्तरों की बात करें तो निफ्टी के लिए 22,300 से 22,250 का दायरा मजबूत सपोर्ट के रूप में काम करेगा, जबकि ऊपरी स्तरों पर 22,500 के आसपास कड़ा प्रतिरोध देखने को मिल सकता है। जब तक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती, तब तक मजबूत बैलेंस शीट, कम कर्ज और स्थिर तिमाही नतीजों वाली कंपनियों में ही दीर्घकालिक नजरिए से पूंजी लगाना सबसे उपयुक्त रणनीति मानी जा रही है।
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