Stock Market 25 September 2026: Sensex-Nifty में रिकवरी के संकेत, क्रूड और बॉन्ड यील्ड पर नजर
गुरुवार की तेज गिरावट के बाद GIFT Nifty के संकेतों से बाजार में सीमित रिकवरी की उम्मीद
Stock Market 25 September 2026: घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 का कारोबारी सत्र निवेशकों और रणनीतिकारों के लिए अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। गुरुवार को दलाल स्ट्रीट पर भयंकर बिकवाली का दौर देखने को मिला था, जहां सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लगभग डेढ़ फीसदी से अधिक लुढ़क गए थे। इस भारी गिरावट के बाद शुक्रवार की सुबह भारतीय बाजारों के लिए राहत भरे संकेत लेकर आई है। वायदा बाजार में गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) के शुरुआती रुझानों ने बाजार के सीमित दायरे में या मामूली बढ़त के साथ खुलने के संकेत दिए हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में अप्रत्याशित उछाल और पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव अब भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शुक्रवार के सत्र में बाजार का ध्यान इस बात पर केंद्रित रहेगा कि क्या बेंचमार्क इंडेक्स निचले स्तरों पर अपनी पकड़ बनाए रख पाते हैं या ऊपरी स्तरों पर दोबारा बिकवाली हावी होती है। गणेश विसर्जन और अनंत चतुर्दशी का पावन पर्व होने के बावजूद एनएसई और बीएसई के ट्रेडिंग कैलेंडर के अनुसार आज इक्विटी बाजारों में सामान्य दिनों की भांति पूरा कारोबार संचालित हो रहा है।
Stock Market 25 September 2026: गुरुवार के सत्र में क्यों कांपा था बाजार
24 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में चौतरफा बिकवाली का तांडव देखने को मिला था। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,247.71 अंक यानी 1.67 फीसदी का गोता लगाकर 73,580.54 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 383.70 अंक फिसलकर 23,063.10 के स्तर पर आ गया था। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल का 105 डॉलर के पार जाना और अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका थी।
इस गिरावट का असर केवल फ्रंटलाइन ब्लूचिप शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी भारी अफरातफरी रही। निफ्टी मिडकैप 50 में 2.57 फीसदी और निफ्टी मिडकैप 100 में 2.25 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स भी 1.53 फीसदी नीचे आ गया। सेंसेक्स के 30 में से 29 दिग्गज शेयर लाल निशान में बंद हुए थे, जिनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल जैसे हैवीवेट्स शामिल थे।
25 सितंबर को बाजार खुलने से पहले गिफ्ट निफ्टी और वैश्विक संकेत
शुक्रवार सुबह बाजार खुलने से पूर्व अंतरराष्ट्रीय स्तर से मिले-जुले संकेत सामने आए। एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज पर गिफ्ट निफ्टी 23,090 से 23,140 के दायरे में कारोबार करता दिखा, जो पिछले सत्र के मुकाबले 30 से 45 अंकों के प्रीमियम को दर्शा रहा था। इससे यह स्पष्ट हुआ कि भारी गिरावट के बाद बाजार में तकनीकी पुलबैक की संभावना बन रही है और निचले स्तरों पर शार्ट कवरिंग देखने को मिल सकती है।
अमेरिकी शेयर बाजारों में गुरुवार का सत्र अपेक्षाकृत शांत रहा था। डाउ जोंस में 0.32 फीसदी की मामूली नरमी रही, जबकि नैस्डैक कंपोजिट हल्की बढ़त के साथ लगभग सपाट बंद हुआ। वहीं एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला; जहां जापान का निक्केई इंडेक्स शुरुआती सत्र में मजबूती दिखा रहा था, वहीं ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजार में नरमी देखी गई। चीन और दक्षिण कोरिया के बाजार अवकाश के कारण बंद रहने से एशियाई संकेत एकतरफा नहीं रहे।
कच्चा तेल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: घरेलू बाजार के लिए दो बड़े सिरदर्द
भारतीय अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी चुनौती अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार से आ रही है। ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में 105 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बना हुआ है। भारत अपनी पेट्रोलियम आवश्यकताओं का 85 फीसदी से अधिक आयात करता है, ऐसे में कच्चे तेल में लगातार तेजी से चालू खाता घाटा (CAD) बढ़ने, रुपये पर दबाव आने और घरेलू कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन सिकुड़ने का खतरा बढ़ जाता है।
दूसरी ओर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी वैश्विक इक्विटी के लिए बड़ा झटका बनी हुई है। अमेरिका की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.2 फीसदी और 30-वर्षीय यील्ड 5.5 फीसदी के ऐतिहासिक स्तरों के करीब पहुंच चुकी है। जब अमेरिकी बॉन्ड पर जोखिम-मुक्त रिटर्न इतना ऊंचा मिलने लगता है, तो वैश्विक फंड मैनेजर भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर डॉलर परिसंपत्तियों और अमेरिकी बॉन्ड में लगाना शुरू कर देते हैं, जिससे विदेशी पूंजी की निकासी तेज हो जाती है।
FII की आक्रामक बिकवाली बनाम DII का घरेलू सहारा
संस्थागत निवेशकों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से भारतीय बाजार में बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। 24 सितंबर को विदेशी फंडों ने कैश मार्केट में 5,027 करोड़ रुपये के भारतीय शेयरों की शुद्ध बिकवाली की थी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी निवेशक अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को सीमित कर रहे हैं।
इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने एक बार फिर भारतीय बाजार के लिए सुरक्षा कवच का काम किया। म्यूचुअल फंड्स और घरेलू बीमा कंपनियों ने उसी सत्र में 4,301 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की। खुदरा निवेशकों द्वारा म्यूचुअल फंड्स में लगातार की जा रही एसआईपी (SIP) के दम पर घरेलू फंड्स के पास नकदी का मजबूत प्रवाह बना हुआ है, जिसके चलते भारी विदेशी बिकवाली के बावजूद बाजार को एक मजबूत मनोवैज्ञानिक आधार मिल रहा है।
NSE की ऐतिहासिक लिस्टिंग के बाद कैसा रहेगा एक्शन
24 सितंबर का दिन भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा क्योंकि देश के सबसे बड़े एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने बीएसई पर अपनी आधिकारिक लिस्टिंग पूरी की। एनएसई के शेयर अपने 1,785 रुपये के आईपीओ निर्गम मूल्य के मुकाबले 1,800 रुपये पर सूचीबद्ध हुए और दिन के दौरान 1,878 रुपये का उच्चतम स्तर छूने के बाद 1,818 रुपये पर बंद हुए।
यद्यपि बाजार में आई व्यापक गिरावट के कारण लिस्टिंग के दिन जश्न का माहौल थोड़ा फीका रहा, किंतु शुक्रवार को भी एनएसई के शेयरों और संबंधित ब्रोकरेज व कैपिटल मार्केट से जुड़े स्टॉक्स पर ट्रेडर्स की कड़ी नजर रहेगी। निवेशक यह देखना चाहेंगे कि क्या द्वितीयक बाजार में एनएसई का शेयर अपने मूल्यांकन को मजबूती से बनाए रख पाता है या नहीं।
निफ्टी और सेंसेक्स के प्रमुख तकनीकी स्तर और सपोर्ट जोन
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी 50 के लिए 23,000 का स्तर एक अत्यंत महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और तकनीकी सपोर्ट का काम कर रहा है। यदि सूचकांक इस स्तर को बनाए रखने में विफल रहता है, तो बिकवाली का दायरा बढ़कर 22,850 तक जा सकता है। वहीं ऊपरी मोर्चे पर जब तक निफ्टी 23,200 और 23,300 के स्तरों को निर्णायक रूप से पार नहीं कर लेता, तब तक बाजार में हर उछाल पर मुनाफावसूली का खतरा मंडराता रहेगा।
सेंसेक्स के लिए 73,200 से 73,000 का दायरा एक मजबूत आधार के रूप में देखा जा रहा है, जबकि 74,200 के ऊपर ही नई तेजी की संभावना बनेगी। शुक्रवार को बैंकिंग और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) की चाल सबसे ज्यादा निर्णायक होगी क्योंकि पिछले सत्र में यही सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहे थे।
Stock Market 25 September 2026: निवेशकों के लिए आज की व्यावहारिक रणनीति
25 सितंबर 2026 का कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए स्थिरता की परीक्षा साबित होने वाला है। एक दिन पूर्व 1,200 से अधिक अंकों की गिरावट के बाद बाजार स्वाभाविक रूप से तकनीकी उछाल दिखाने का प्रयास कर रहा है, किंतु वैश्विक जोखिम जस के तस बने हुए हैं।
ऐसे अनिश्चित माहौल में खुदरा निवेशकों को अत्यधिक आक्रामक होकर लीवरेज्ड ट्रेडिंग या वायदा सौदे करने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह समय उच्च गुणवत्ता वाले, मजबूत बैलेंस शीट वाले और नकदी प्रवाह से संपन्न लार्जकैप शेयरों में किस्तों में खरीदारी करने का अच्छा अवसर हो सकता है। दिन के कारोबार में कच्चे तेल के भाव और संस्थागत प्रवाह के ताजा रुझान पर नजर बनाए रखना ही सबसे सुरक्षित कदम होगा।
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