Somvar Puja Vidhi: सोमवार को ऐसे करें भगवान शिव की पूजा, जानें जलाभिषेक का सही तरीका, मंत्र और भोग

सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है।

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Somvar Puja Vidhi: सनातन धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी प्रमुख देव शक्ति को समर्पित है, जिसमें सोमवार का दिन देवों के देव महादेव भगवान शिव की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना गया है। शास्त्रों में भगवान शिव को ‘आशुतोष’ कहा गया है, जिसका अर्थ है जो अत्यंत अल्प प्रयास और निष्कपट भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं। सोमवार के दिन श्रद्धापूर्वक शिव उपासना करने, शिवलिंग का विधिवत जलाभिषेक करने और पंचाक्षरी मंत्र का जप करने से साधक के जीवन के समस्त संताप, मानसिक अशांति और ग्रह जनित बाधाएं शांत हो जाती हैं। अविवाहित जातक सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए और गृहस्थ परिवार की सुख-शांति व दीर्घायु के लिए सोमवार का व्रत रखते हैं।

Somvar Puja Vidhi: सोमवार की शिव पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

ज्योतिष और पौराणिक दृष्टिकोण से सोमवार का संबंध नवग्रहों में मन और भावनाओं के कारक चंद्रमा से माना जाता है। भगवान शिव के अनेक दिव्य स्वरूपों में से एक ‘चंद्रशेखर’ स्वरूप है, जिसमें उन्होंने समुद्र मंथन से उपजे विष की उष्णता को शीतल करने तथा चंद्रमा को क्षय रोग के शाप से मुक्ति दिलाने के लिए उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया था।

यही कारण है कि सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से कुंडली में चंद्रमा की स्थिति सुदृढ़ होती है, जिससे मानसिक अवसाद, अनिद्रा, भय और चंचलता दूर होकर चित्त में अद्भुत स्थिरता आती है। शास्त्रों के अनुसार, सोमवार का व्रत और पूजन केवल मनोकामना पूर्ति का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर वैराग्य, करुणा और आत्मिक शांति का संचार करता है।

प्रातःकालीन तैयारी और पूजा का संकल्प

सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होना चाहिए। इस दिन हल्के सफेद, आसमानी या पीले रंग के स्वच्छ व सात्विक वस्त्र धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जबकि काले रंग के वस्त्रों से परहेज रखना चाहिए। घर के पूजा स्थल को गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग को वेदी पर स्थापित करें।

हाथ में थोड़ा जल, अक्षत और पुष्प लेकर भगवान शिव के समक्ष अपनी मनोकामना और निष्ठा के साथ पूजा अथवा व्रत का मौन संकल्प लें। यदि घर के निकट कोई शिवालय हो, तो वहां जाकर जल चढ़ाना और दर्शन करना विशेष फलदायी माना जाता है। पूजा के दौरान मन में किसी भी प्रकार का दुर्भाव या क्रोध न आने दें और पूर्ण सात्विकता बनाए रखें।

शिवलिंग पर जलाभिषेक और पंचामृत अर्पण का सही क्रम

सोमवार की पूजा का सबसे प्रमुख और अनिवार्य अंग जलाभिषेक है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भगवान शिव को जलधारा अत्यंत प्रिय है। अभिषेक करते समय कभी भी लोहे या स्टील के पात्र का प्रयोग न करें; इसके लिए तांबे, पीतल, कांसे या चांदी के लोटे का उपयोग सर्वोत्तम माना गया है, हालांकि तांबे के पात्र में दूध डालकर कभी भी अर्पित नहीं करना चाहिए।

अभिषेक की शुरुआत शिवलिंग की उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठते हुए शुद्ध गंगाजल अथवा स्वच्छ शीतल जल की पतली और निरंतर धार अर्पित करते हुए करें। इसके बाद क्रम से कच्चा गाय का दूध, दही, शुद्ध देसी घी, शहद और गंगाजल या गन्ने का रस अर्पित कर पंचामृत स्नान कराएं। पंचामृत अर्पण के पश्चात पुनः स्वच्छ जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।

अभिषेक संपन्न होने के बाद शिवलिंग पर श्वेत अथवा पीला चंदन लगाएं, भस्म अर्पित करें और साबुत, बिना कटे-फटे तीन पत्तियों वाले बेलपत्र (जिनके चिकने भाग पर चंदन लगा हो) उलटे रखकर अर्पित करें। इसके साथ ही शमी पत्र, धतूरा, भांग और मंदार या कनेर के श्वेत पुष्प अर्पित करें। यह ध्यान रखें कि भगवान शिव की पूजा में कभी भी रोली, सिंदूर, तुलसी पत्र या केतकी के फूल नहीं चढ़ाए जाते।

भगवान शिव के कल्याणकारी मंत्र और उनका प्रभाव

शिवलिंग के पूजन और जलाभिषेक के दौरान मंत्रों का शांत मन से उच्चारण करने से वातावरण में सकारात्मक तरंगें उत्पन्न होती हैं। साधक अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार इन प्रमुख मंत्रों का 11, 21 या 108 बार जप कर सकते हैं:

शिव पंचाक्षरी महामंत्र:

ॐ नमः शिवाय।

महामृत्युंजय मंत्र:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।

उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

शिव गायत्री मंत्र:

ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

इन पावन मंत्रों का जप करते समय रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें और श्वास की गति को सामान्य रखते हुए प्रत्येक शब्द का शुद्ध उच्चारण करें।

सोमवार को भगवान शिव का प्रिय सात्विक भोग

भगवान शिव को आडंबरहीन और सात्विक नैवेद्य अर्पित किया जाता है। पूजा के समय महादेव को ताजे गाय के दूध, मखाने, मिश्री, ऋतु फल विशेष रूप से सेब, केला व अनार, और सफेद मिठाइयों का भोग लगाया जा सकता है। इसके अलावा सूखे मेवों और खीर का भोग लगाना भी अत्यंत उत्तम माना गया है।

भोग अर्पित करने के बाद शुद्ध घी का दीपक और धूपबत्ती प्रज्वलित कर भगवान शिव की आरती करें। आरती के पश्चात आरती की लौ को अपने दोनों हाथों से स्पर्श कर मस्तक पर लगाएं और ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ श्लोक का उच्चारण करते हुए भगवान से जाने-अनजाने हुई भूलों के लिए क्षमा याचना करें।

सोमवार व्रत के सामान्य नियम और खानपान की सावधानियां

जो श्रद्धालु सोमवार का उपवास रखते हैं, उन्हें दिनभर फलाहार या एक समय बिना नमक का सात्विक आहार ग्रहण करने का नियम अपनाना चाहिए। दिनभर भरपूर मात्रा में जल, दूध, मखाना और फलों का सेवन किया जा सकता है। शाम को आरती और पूजा संपन्न होने के उपरांत केवल एक बार मीठा भोजन ग्रहण करने की परंपरा कई परिवारों में है।

व्रत के दौरान दिन में सोने, दूसरों की चुगली करने, असत्य बोलने और मानसिक तनाव से बचना चाहिए। यदि स्वास्थ्य संबंधी कारणों से उपवास रखना संभव न हो, तो केवल दोनों समय की पूजा और सात्विक दिनचर्या का पालन करके भी मानसिक पुण्य प्राप्त किया जा सकता है।

Somvar Puja Vidhi: पूजा के समापन पर दान और लोककल्याण की भावना

पूजा और आरती की समाप्ति के बाद तैयार किया गया प्रसाद सर्वप्रथम परिवार के सभी सदस्यों में वितरित करें। इसके उपरांत अपनी आर्थिक सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद, निर्धन व्यक्ति या ब्राह्मण को अन्न, सफेद वस्त्र, दूध, चीनी या दक्षिणा का दान अवश्य करें।

गौमाता को हरा चारा या आटे की लोई खिलाना भी पुण्य फल प्रदान करता है। सोमवार की यह साधना व्यक्ति को आंतरिक संतुलन, विनम्रता और धैर्य का पाठ पढ़ाती है, जिससे साधक सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी आध्यात्मिक शांति का अनुभव करता है।

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