AI के डर से IT शेयरों में भारी तबाही, फरवरी में निफ्टी IT 21% टूटा, LIC को ₹37,000 करोड़ और म्यूचुअल फंड्स को ₹64,000 करोड़ का नुकसान, Infosys बना सबसे बड़ा वेल्थ डिस्ट्रॉयर
निफ्टी IT फरवरी में 21% गिरा, LIC को ₹37,000 करोड़ और म्यूचुअल फंड्स को ₹64,000 करोड़ का नुकसान
Share Market Today: भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में फरवरी 2026 का महीना आईटी सेक्टर के लिए एक काला अध्याय बनकर सामने आया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती ताकत और ऑटोमेशन की लहर से घबराए निवेशकों ने टेक शेयरों में इतनी बड़े पैमाने पर बिकवाली की कि देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों की हजारों करोड़ रुपये की दौलत एक झटके में स्वाहा हो गई। निफ्टी IT इंडेक्स फरवरी में अब तक करीब 21 प्रतिशत गिर चुका है जिसे पिछले लगभग 23 वर्षों में किसी एक महीने में सबसे बुरा प्रदर्शन माना जा रहा है। इस गिरावट की सबसे बड़ी मार म्यूचुअल फंड्स पर पड़ी जिन्हें करीब 64,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा जबकि भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC की संपत्ति में भी लगभग 37,000 करोड़ रुपये की सेंध लग गई। कुल मिलाकर इन दोनों बड़े संस्थागत निवेशकों को 1 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक का नुकसान हो चुका है। आइए समझते हैं इस तबाही की पूरी कहानी।
Share Market Today: 23 साल में सबसे बुरा महीना
निफ्टी IT इंडेक्स का फरवरी 2026 में 21 प्रतिशत तक गिरना सामान्य बाजार सुधार नहीं बल्कि एक असाधारण और गहरी पीड़ा की कहानी है। यह पिछले करीब 23 सालों में किसी एक महीने में आईटी इंडेक्स की सबसे भारी गिरावट मानी जा रही है। यह इंडेक्स बेंचमार्क सूचकांकों में 10 प्रतिशत से अधिक वेटेज रखता है इसलिए इसकी इस बड़ी गिरावट का असर सेंसेक्स और निफ्टी 50 पर भी स्पष्ट दिखा। इस दौरान निफ्टी IT में शामिल सभी 10 प्रमुख आईटी कंपनियों के शेयर 17 से 27 प्रतिशत तक टूट गए। इस पूरी गिरावट में सबसे अधिक नुकसान कोफोर्ज को हुआ जिसके शेयर करीब 26.8 प्रतिशत लुढ़ककर इस अवधि का सबसे बड़ा घाटा उठाने वाला शेयर बन गया। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनियां टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज और इंफोसिस भी इस तूफान से अछूती नहीं रहीं।
Share Market Today: LIC और म्यूचुअल फंड्स का ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान
आईटी शेयरों में आई इस बड़ी गिरावट का सबसे भारी बोझ देश के दो सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों को उठाना पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार म्यूचुअल फंड उद्योग को फरवरी में आईटी शेयरों की वजह से करीब 64,000 करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ। इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC जो देश के शेयर बाजार का सबसे बड़ा घरेलू संस्थागत निवेशक है उसे भी लगभग 37,000 करोड़ रुपये का झटका लगा। इस तरह दोनों मिलाकर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की वैल्यू खो चुके हैं। यह नुकसान उन करोड़ों आम निवेशकों की बचत पर भी असर डालता है जिन्होंने इन माध्यमों से बाजार में पैसा लगाया हुआ है।
Infosys बना सबसे बड़ा वेल्थ डिस्ट्रॉयर
इस गिरावट की कहानी में इंफोसिस का नाम सबसे दर्दनाक तरीके से सामने आता है। देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी इंफोसिस इस दौर में सबसे बड़ा वेल्थ डिस्ट्रॉयर साबित हुई। अकेले इंफोसिस के शेयर में आई गिरावट ने म्यूचुअल फंड्स के पोर्टफोलियो से करीब 26,000 करोड़ रुपये साफ कर दिए। यानी म्यूचुअल फंड्स के कुल आईटी नुकसान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले इंफोसिस की वजह से है। इसके अलावा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS की गिरावट ने भी 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का झटका दिया। विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज और टेक महिंद्रा ने भी बड़े पैमाने पर निवेशकों की दौलत को नुकसान पहुंचाया।
Share Market Today: आखिर क्यों टूट रहा है आईटी सेक्टर?
इस व्यापक गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता दबदबा। भारत का आईटी सेवा उद्योग करीब 300 अरब डॉलर का विशाल कारोबार है और निवेशकों का डर यह है कि AI इस पूरे मॉडल की नींव हिला सकता है। खासकर तीन बड़े डर सामने आए हैं। पहला डर यह है कि AI प्रोजेक्ट की समय सीमा को छोटा कर सकता है जिससे आईटी कंपनियों को मिलने वाले बड़े और लंबी अवधि के ठेके कम हो सकते हैं। दूसरा डर है कि AI नई डील्स के प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। तीसरा और सबसे गहरा डर यह है कि भारतीय आईटी कंपनियों का जो श्रम-आधारित यानी लेबर-इंटेंसिव मॉडल है उस पर सीधी चोट पड़ सकती है। अमेरिकी कंपनियों के नए AI टूल्स ऑटोमेशन की रफ्तार बढ़ा रहे हैं जिसका मतलब है कि जो काम पहले सैकड़ों इंजीनियर करते थे वह अब कुछ AI टूल कर सकते हैं।
वैश्विक कारण भी जिम्मेदार
केवल AI का डर ही नहीं बल्कि कई वैश्विक आर्थिक कारण भी इस गिरावट के लिए जिम्मेदार हैं। अमेरिका और यूरोप में आर्थिक विकास की गति धीमी पड़ रही है जो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए बुरी खबर है क्योंकि उनका अधिकांश कारोबार इन्हीं दो बाजारों पर निर्भर है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती में देरी का असर भी बाजार की धारणा पर पड़ रहा है। इसके अलावा बड़ी विदेशी कंपनियां अपने आईटी बजट में सावधानी बरत रही हैं और नए खर्च करने से पहले AI के असर का इंतजार कर रही हैं।
Share Market Today: आगे क्या होगा?
कुछ बड़े ब्रोकरेज हाउसों का मानना है कि अगर AI एप्लिकेशन सर्विसेज की कमाई में बड़ी सेंध लगाता है तो आने वाले 3 से 4 वर्षों में आईटी कंपनियों के राजस्व वृद्धि पर सालाना 2 प्रतिशत तक का प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालांकि 25 फरवरी को कुछ राहत जरूर दिखी लेकिन यह राहत अभी तक अस्थायी ही लग रही है। जब तक आईटी कंपनियां यह नहीं दिखा देतीं कि वे AI को खतरे की जगह एक अवसर के रूप में इस्तेमाल करने में सक्षम हैं तब तक बाजार में निवेशकों की बेचैनी बनी रह सकती है।
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