Share Market 24 September 2026: क्रूड में उछाल से शेयर बाजार में तेज गिरावट, सेंसेक्स 555 अंक टूटा, निफ्टी 23,200 के करीब
26 सितंबर को NSE-BSE बंद, सोमवार को कच्चे तेल और ग्लोबल संकेतों पर रहेगी नजर
Share Market 24 September 2026: भारतीय इक्विटी बेंचमार्क सूचकांकों में 24 सितंबर 2026 के कारोबारी सत्र के दौरान जोरदार दबाव देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण दलाल स्ट्रीट पर गुरुवार को बिकवाली हावी रही। बुधवार की राहत भरी बढ़त के बाद बाजार की शुरुआत खासी कमजोरी के साथ हुई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 555.85 अंक यानी 0.74 प्रतिशत का गोता लगाकर 74,272.40 के स्तर पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 225 अंक की तेज गिरावट के साथ 23,221.80 के स्तर पर आ गया।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती दरों ने आयात-निर्भर भारतीय अर्थव्यवस्था में महंगाई और चालू खाता घाटे की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है। इसके चलते सुबह के सत्र में निवेशकों ने तेल से जुड़े क्षेत्रों, ऑटोमोबाइल, आईटी और चुनिंदा बैंकिंग काउंटरों में मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।
Share Market 24 September 2026: बुधवार की तेजी पर फिरा पानी
23 सितंबर के पिछले कारोबारी सत्र में घरेलू बाजारों ने मजबूत वापसी के संकेत दिए थे। बुधवार को बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं दूसरी ओर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 117.80 अंक या 0.50 प्रतिशत चढ़कर 23,446.80 के स्तर पर टिका था।
बुधवार की इस रिकवरी को मेटल और कुछ चुनिंदा वित्तीय शेयरों में हुई खरीदारी से समर्थन मिला था, जबकि व्यापक बाजार में भी सुधार दर्ज किया गया था। हालांकि गुरुवार को वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों और क्रूड के दबाव ने इस तेजी की रफ्तार को थाम दिया, जिसके चलते बाजार खुलते ही पिछले दिन की पूरी बढ़त गंवा बैठा।
कच्चे तेल में उछाल बना बिकवाली का सबसे बड़ा कारण
शेयर बाजार में ताजा कमजोरी का मुख्य कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों का दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर जाना है। पश्चिम एशिया के समुद्री परिवहन मार्गों पर आपूर्ति की अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव के चलते ऊर्जा की वैश्विक लागत बढ़ रही है।
भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात करता है। कच्चे तेल के महंगा होने से पेंट, टायर, एविएशन, ऑयल मार्केटिंग और केमिकल कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर सीधा असर पड़ता है। इसी चिंता में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने सतर्कता बरतते हुए घरेलू इक्विटी से निकासी का रुख बनाए रखा।
निफ्टी और सेंसेक्स के प्रमुख सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर
तकनीकी चार्ट्स पर नजर डालें तो बाजार विश्लेषक मौजूदा गिरावट को छह सप्ताह लंबे चले आ रहे करेक्शन का विस्तार मान रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी 50 के लिए 23,200 का स्तर पहला महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक और तकनीकी सपोर्ट है। यदि इंडेक्स इस स्तर के नीचे फिसलता है, तो 23,000 का स्तर अगली बड़ी रक्षा पंक्ति साबित हो सकता है।
ऊपरी स्तरों पर सुधार के लिए निफ्टी को 23,450 से 23,500 के दायरे को मजबूती से पार करना अनिवार्य होगा। जब तक सूचकांक 23,500 के पार नहीं टिकता, तब तक बाजार में ‘राइज ऑन सेल’ यानी हर उछाल पर बिकवाली का रुझान बना रह सकता है। वहीं सेंसेक्स के लिए 74,300–74,500 का क्षेत्र तात्कालिक सपोर्ट है और 75,000–75,300 का स्तर कड़ा रेजिस्टेंस बना हुआ है।
सेक्टोरल ट्रेंड: आईटी और ऑटो पर दबाव, मेटल में सीमित स्थिरता
सत्र के दौरान विभिन्न सेक्टर्स में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। आईटी कंपनियों—टीसीएस, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक—में लगातार बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे निफ्टी आईटी इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करता रहा। वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंकाओं और अमेरिकी आईटी खर्च में कटौती के चलते तकनीकी शेयरों में निवेशकों का रुझान सतर्क बना हुआ है।
वहीं दूसरी ओर, चीन के हालिया आर्थिक प्रोत्साहन कदमों से मेटल शेयरों को कुछ हद तक सहारा मिलता दिख रहा है, हालांकि बेंचमार्क की भारी गिरावट के कारण अधिकांश व्यापक सूचकांक दबाव में हैं। बैंकिंग क्षेत्र में निजी और सरकारी बैंकों की मिली-जुली चाल ने बाजार के निचले स्तरों को साधने का प्रयास किया, किंतु चौतरफा बिकवाली के आगे यह समर्थन नाकाफी साबित हुआ।
Share Market 24 September 2026: कारोबारियों और निवेशकों के लिए आगे की रणनीति
बाजार में जारी उच्च अस्थिरता को देखते हुए वित्तीय सलाहकारों ने खुदरा निवेशकों को आक्रामक ट्रेडिंग से बचने की हिदायत दी है। सप्ताहांत से पहले वैश्विक संकेतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की दैनिक चाल पर नजर रखना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह सलाह दी जा रही है कि वे घबराहट में शेयर बेचने के बजाय मजबूत बुनियादी फंडामेंटल्स वाली लार्जकैप कंपनियों में किस्तों में खरीदारी की रणनीति पर अमल करें।
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