मार्च में ही झुलसा रहा सूरज! रेवाड़ी में 2.8 तीव्रता का भूकंप, दिल्ली-NCR में तेज झटके, अमरावती में 40.8 डिग्री पार, 5 राज्यों में IMD का लू अलर्ट, होर्मुज संकट से पहले भीषण गर्मी

सुबह 7:01 बजे रेवाड़ी में 2.8 तीव्रता का भूकंप, दिल्ली-NCR में झटके, अमरावती 40.8 डिग्री, 5 राज्यों में लू का अलर्ट, IMD ने 10 मार्च तक चेतावनी जारी की

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Rewari earthquake: सोमवार की सुबह राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में अचानक धरती हिल उठी। सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर हरियाणा के रेवाड़ी जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिसकी कंपन दिल्ली NCR तक साफ तौर पर महसूस की गई। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 2.8 मापी गई और भूकंप का केंद्र जमीन से महज 5 किलोमीटर की गहराई में था।

Rewari earthquake: रेवाड़ी रहा भूकंप का केंद्र

नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार इस भूकंप का एपिसेंटर हरियाणा के रेवाड़ी जिले में स्थित था। सुबह का समय होने के बावजूद कई लोग अपने घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम थी, फिर भी झटके इतने अचानक थे कि लोगों में थोड़ी देर के लिए भय का माहौल बन गया। अभी तक किसी जानमाल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है।

Rewari earthquake: दिल्ली NCR में क्यों बार-बार आते हैं भूकंप

दिल्ली और उसके आसपास का क्षेत्र भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। भूगर्भ विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली भूकंप जोन-4 में आती है, जो देश के सबसे खतरनाक भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। इस जोन में 7 या उससे अधिक तीव्रता के भूकंप आने की संभावना रहती है, जो भारी तबाही मचा सकते हैं। दिल्ली NCR में भूकंप के झटके अक्सर इसलिए आते हैं क्योंकि यह क्षेत्र कई भूगर्भीय फॉल्ट लाइनों के करीब स्थित है। सोहना फॉल्ट, दिल्ली मुरादाबाद फॉल्ट और महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट इस क्षेत्र की प्रमुख फॉल्ट लाइनें हैं। इन्हीं फॉल्ट लाइनों पर टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण छोटे-बड़े भूकंप आते रहते हैं।

Rewari earthquake: क्यों आता है भूकंप, जानें पूरा विज्ञान

पृथ्वी की संरचना को समझें तो इसके भीतर सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटें होती हैं। ये प्लेटें पृथ्वी की आंतरिक गर्मी और दबाव के कारण लगातार गतिशील रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं, एक-दूसरे के नीचे खिसकती हैं या एक-दूसरे से घर्षण करती हैं, तो इससे जबरदस्त ऊर्जा उत्पन्न होती है। यही ऊर्जा भूकंप के रूप में धरती की सतह पर आती है। भारत में भूकंप का मुख्य कारण भारतीय टेक्टोनिक प्लेट का यूरेशियन प्लेट से टकराव है। यह टकराव हिमालय पर्वत श्रृंखला के निर्माण के लिए जिम्मेदार है और साथ ही उत्तर भारत में बार-बार भूकंप आने का कारण भी यही है।

Rewari earthquake: भारत में भूकंप के चार जोन

भारतीय मानक ब्यूरो ने देश को भूकंप की दृष्टि से चार जोन में विभाजित किया है। जोन-2 सबसे कम खतरनाक है जबकि जोन-5 सर्वाधिक संवेदनशील माना जाता है। भारत का करीब 59 प्रतिशत भूभाग किसी न किसी भूकंपीय जोन में आता है। जोन-5 में पूर्वोत्तर भारत, जम्मू-कश्मीर का कुछ हिस्सा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्र, कच्छ का रण और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। जोन-4 में दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कुछ मैदानी इलाके और हिमालय की तलहटी शामिल हैं। जोन-3 में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और राजस्थान के कुछ हिस्से आते हैं। जोन-2 में दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्से आते हैं जो अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं।

Rewari earthquake: रिक्टर स्केल पर कितना खतरनाक होता है भूकंप

रिक्टर स्केल वह पैमाना है जिससे भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। 2.8 तीव्रता का यह भूकंप हल्की श्रेणी में आता है और इससे किसी प्रकार के नुकसान की संभावना नहीं रहती। हालांकि अगर तीव्रता बढ़ती है तो खतरा बढ़ता जाता है। 4 से 4.9 तीव्रता होने पर घर में रखी वस्तुएं हिल सकती हैं और गिर सकती हैं। 5 से 5.9 तीव्रता पर भारी फर्नीचर और सामान खिसक जाता है। 6 से 6.9 तीव्रता होने पर इमारतों की नींव को नुकसान पहुंच सकता है। 7 से 7.9 तीव्रता पर बड़ी इमारतें ढहने का खतरा होता है। 8 से 8.9 तीव्रता में भारी तबाही मचती है और सुनामी का खतरा भी उत्पन्न हो सकता है।

Rewari earthquake: भूकंप आने पर क्या करें और क्या न करें

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है और इससे बचाव के लिए जागरूकता जरूरी है। भूकंप के दौरान अगर आप घर के भीतर हैं तो किसी मजबूत मेज के नीचे बैठ जाएं या दीवार के पास झुककर अपने सिर और गर्दन को हाथों से ढक लें। लिफ्ट का उपयोग बिल्कुल न करें। खिड़कियों और बाहरी दरवाजों से दूर रहें। अगर आप घर से बाहर हैं तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर रहें। खुले मैदान में जाएं और जमीन पर लेट जाएं। तटीय इलाकों में रहने वाले लोग भूकंप के तुरंत बाद ऊंची जगह की तरफ चले जाएं क्योंकि तेज भूकंप के बाद सुनामी का खतरा रहता है।

Rewari earthquake: हाल के दिनों में बढ़ी भूकंप की घटनाएं

पिछले कुछ महीनों में दिल्ली NCR और आसपास के इलाकों में भूकंप के झटके कई बार महसूस किए गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार यह टेक्टोनिक प्लेटों की बढ़ती सक्रियता का संकेत हो सकता है। हालांकि छोटे-छोटे झटके बड़े भूकंप के संचित दबाव को थोड़ा-थोड़ा कम करते रहते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि बड़ा भूकंप नहीं आएगा। सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग समय-समय पर नागरिकों को भूकंप से बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक करते रहते हैं। नई इमारतों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है ताकि जनहानि को कम किया जा सके।

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