RSS Restructuring: संघ में बड़े बदलाव की तैयारी, 924 से बढ़कर 1600 हो सकते हैं जिले

इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक होगी RSS की अहम बैठक; प्रांत की जगह संभाग स्तर की संरचना और संगठनात्मक विस्तार पर चर्चा संभव।

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RSS Restructuring: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने शताब्दी वर्ष के विस्तार और आगामी दशकों की रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपने संगठनात्मक ढांचे में ऐतिहासिक फेरबदल की तैयारी कर रहा है। संगठन के कामकाज को अत्यधिक विकेंद्रीकृत, सूक्ष्म और प्रभावी बनाने के लिए दशकों पुरानी प्रांत स्तरीय व्यवस्था के स्थान पर संभाग स्तर पर नई त्रिस्तरीय संरचना लागू करने की योजना है। इस व्यापक पुनर्गठन के अंतर्गत संघ की कार्य-सुविधा वाले जिलों की संख्या को मौजूदा 924 से बढ़ाकर 1500 से 1600 तक किया जा सकता है। मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित हो रही अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की महत्वपूर्ण बैठक में इन सभी दूरगामी प्रस्तावों पर गहन मंथन के बाद अंतिम सहमति बनने की संभावना है।

RSS Restructuring: प्रांत की जगह संभाग बनेगा धुरी, भौगोलिक सीमाओं का होगा सूक्ष्म पुनर्गठन

आरएसएस की पारंपरिक कार्यप्रणाली में क्षेत्र, प्रांत, विभाग, जिला, खंड, मंडल, नगर और बस्ती स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियां संचालित होती रही हैं। प्रस्तावित बदलावों के तहत अब बड़े प्रांतों के स्थान पर प्रशासनिक और भौगोलिक सुगमता वाले ‘संभाग’ को प्राथमिक और शक्तिशाली परिचालन इकाई बनाया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य विशाल भौगोलिक क्षेत्रों की जटिलताओं को समाप्त कर निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करना और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही तय करना है।

इस नई व्यवस्था के लागू होने से संगठन के विभिन्न अंगों और आनुषंगिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करना अधिक सरल हो जाएगा। जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वयंसेवकों को अपने सीमित और केंद्रित भौगोलिक दायरे में कार्य करने की स्पष्ट स्वतंत्रता मिलेगी। इससे संघ की विचारधारा और दैनिक शाखाओं के नेटवर्क को सुदूर ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में मजबूती से स्थापित करने में मदद मिलेगी।

जिलों की संख्या 924 से बढ़कर 1600 तक होगी, मंडल व बस्तियों का दायरा भी बढ़ेगा

प्रस्तावित पुनर्गठन का सबसे क्रांतिकारी पहलू संगठनात्मक जिलों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि है। वर्तमान में संघ की प्रशासनिक व्यवस्था में देशभर में करीब 924 जिले कार्यरत हैं, जिन्हें विभाजित कर 1500 से 1600 के बीच करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही खंडों, मंडलों, नगरों और मोहल्ला स्तर की बस्तियों की संख्या में भी भारी विस्तार किया जाएगा।

जिलों का आकार छोटा होने से जिला प्रचारकों और स्थानीय पदाधिकारियों के लिए शाखाओं की दैनिक निगरानी और स्वयंसेवकों से सीधा संवाद रखना कहीं अधिक सुलभ हो जाएगा। संघ का प्राथमिक लक्ष्य देश के प्रत्येक न्याय पंचायत और 10 हजार की आबादी वाले मंडल तक अपनी प्रत्यक्ष दैनिक शाखा अथवा साप्ताहिक मिलन केंद्र पहुंचाना है। इस सूक्ष्म विकेंद्रीकरण से समाज के प्रत्येक वर्ग और कोने तक संपर्क अभियान को सघन किया जा सकेगा।

प्रचारकों की संरचना बदलेगी, दायित्वधारी स्वयंसेवकों की संख्या होगी दोगुनी

संगठन के विस्तार के साथ-साथ पूर्णकालिक प्रचारकों की तैनाती और कार्यशैली में भी बड़े बदलाव की रूपरेखा तैयार की गई है। प्राप्त जानकारियों के अनुसार, प्रांत प्रचारकों की मौजूदा 46 की संख्या को संभाग स्तर पर पुनर्गठित कर लगभग 85 संभाग प्रचारक नियुक्त किए जाने की योजना है। वहीं, व्यापक राज्य स्तर के क्षेत्रीय केंद्रों की संख्या को 11 से घटाकर 9 करने का विचार है ताकि निर्णय प्रक्रिया में नौकरशाही स्तर की देरी को खत्म किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न स्तरों पर शाखा कार्य, संपर्क, प्रचार, सेवा और सामाजिक समरसता जैसे प्रकल्पों का नेतृत्व करने वाले दायित्वधारी कार्यकर्ताओं की संख्या में भारी उछाल आएगा। वर्तमान में देशभर में ऐसे सक्रिय दायित्वधारी स्वयंसेवकों की संख्या लगभग पांच लाख है, जिसके नए ढांचे के पूरी तरह लागू होने के बाद बढ़कर 10 से 12 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। इस कदम से संगठन में युवा और ऊर्जावान चेहरों को आगे आने का व्यापक अवसर मिलेगा।

इंदौर में कार्यकारी मंडल की बैठक, शीर्ष नेतृत्व करेगा कार्ययोजना को अंतिम रूप

मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की इस उच्चस्तरीय बैठक में संघ के सर्वोच्च पदाधिकारी शिरकत कर रहे हैं। सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के नेतृत्व में सह-सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य और सभी क्षेत्रों व प्रांतों के संघचालक, कार्यवाह और प्रचारक इस महामंथन का हिस्सा हैं।

बैठक में संगठनात्मक पुनर्गठन के विस्तृत प्रस्तावों के साथ-साथ संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित हुए कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा भी की जाएगी। इसके अलावा, विजयादशमी के अवसर पर सरसंघचालक द्वारा दिए गए बौद्धिक उद्बोधन में उठाए गए विषयों—जैसे पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य, पारिवारिक मूल्य और आत्मनिर्भरता—को धरातल पर उतारने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

RSS Restructuring: मार्च 2027 के संगठनात्मक चुनावों के बाद पूरी तरह प्रभावी होगा नया ढांचा

इंदौर बैठक में सैद्धांतिक मुहर लगने के बाद इस नई संरचना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। संगठनात्मक दृष्टि से यह बदलाव अगले वर्ष मार्च 2027 में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की वार्षिक बैठक और उसके बाद संपन्न होने वाले आंतरिक संगठनात्मक चुनावों से पहले काफी निर्णायक माना जा रहा है।

नई व्यवस्था के तहत नए जिलों और संभागों के अनुसार ही आगामी वर्षों में कार्यकारिणियों का गठन होगा और नए पदाधिकारियों का चयन किया जाएगा। इस बड़े पुनर्गठन के जरिए आरएसएस अपनी दूसरी सदी में प्रवेश करते हुए एक अधिक आधुनिक, गतिशील और व्यापक नेटवर्क के साथ राष्ट्र निर्माण के अपने संकल्प को गति देने की दिशा में अग्रसर है।

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