Sensex Today: सेंसेक्स 450 अंकों की उछाल के साथ खुला, निफ्टी 24,000 के पार; ट्रंप के ईरान बयान से बदला ग्लोबल सेंटिमेंट
सेंसेक्स 450 अंकों की उछाल के साथ खुला, निफ्टी 24,000 के पार; ट्रंप के ईरान बयान से बदला ग्लोबल सेंटिमेंट
Sensex Today: भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का कारोबारी सत्र बेहद शानदार और उत्साहजनक रहा है। हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन यानी गुरुवार को दलाल स्ट्रीट पर चौतरफा खरीदारी के दम पर बाजार की शुरुआत रिकॉर्ड मजबूती के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 450 से अधिक अंकों की छलांग लगाकर 77,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 भी 100 अंकों से ज्यादा की बढ़त लेकर 24,000 के ऐतिहासिक स्तर के ऊपर मजबूती से कारोबार करता दिखा। बाजार में आई इस अचानक तेजी के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को लेकर आया एक बेहद सकारात्मक बयान है, जिसने वैश्विक स्तर पर निवेशकों के सेंटिमेंट (रुझान) को पूरी तरह से बदल दिया है।
बाजार के जानकारों का कहना है कि वैश्विक संकेतों में आए इस बड़े सुधार और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई भारी गिरावट ने घरेलू बाजार को रॉकेट जैसी रफ्तार दे दी है। सुबह बाजार खुलते ही लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप—तीनों ही श्रेणियों के शेयरों में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया। शुरुआती ट्रेडिंग के दौरान बैंकिंग, आईटी, रियल्टी और ऑटोमोबाइल सेक्टर्स के शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखी गई, जिससे दलाल स्ट्रीट का माहौल पूरी तरह से गुलजार हो गया।
डोनाल्ड ट्रंप के ईरान बयान का असर: भू-राजनीतिक तनाव कम होने से तेल बाजारों को बड़ी राहत
वैश्विक वित्तीय बाजारों में पिछले कुछ समय से मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के तनाव को लेकर जो अनिश्चितता और डर का माहौल बना हुआ था, वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान के बाद काफी हद तक शांत हो गया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ शांति वार्ता की बहाली और एक नए संभावित समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। इस बयान के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि इससे लंबे समय से चले आ रहे भू-राजनीतिक टकराव (Geo-Political Tension) के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीदें जाग गई हैं।
इस सकारात्मक भू-राजनीतिक घटनाक्रम का सबसे सीधा और बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर देखने को मिला। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें तेजी से गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के करीब आ गईं। भारत के दृष्टिकोण से कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का एक बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल के सस्ते होने से देश का आयात बिल (Import Bill) कम होगा, जिससे चालू खाते का घाटा नियंत्रित रहेगा और घरेलू स्तर पर खुदरा महंगाई दर को काबू में रखने में सरकार व रिजर्व बैंक को बड़ी मदद मिलेगी।
बाजार की सेक्टोरल परफॉर्मेंस: बैंकिंग और आईटी शेयरों ने संभाली बाजार की कमान
आज की इस चौतरफा तेजी में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका देश के मजबूत बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर ने निभाई है। भारतीय रिजर्व बैंक की स्थिर मौद्रिक नीति और कम तेल कीमतों के कारण बैंकिंग उद्योग में नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार और मजबूत लोन ग्रोथ की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसके चलते निजी क्षेत्र के दिग्गज बैंकों जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के साथ-साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) सहित कई पीएसयू (सरकारी) बैंकों के शेयरों में भी भारी लिवाली देखी गई।
बैंकिंग के अलावा, पिछले कुछ समय से दबाव झेल रहे आईटी (Information Technology) सेक्टर्स के शेयरों में भी आज शानदार शॉर्ट-कवरिंग और रिकवरी के संकेत मिले। वैश्विक बाजारों में आए सुधार और अमेरिकी टेक इंडेक्स नैस्डैक की मजबूती के कारण इंफोसिस, टीसीएस (TCS), विप्रो और एचसीएल टेक जैसे दिग्गज आईटी शेयरों ने बाजार को ऊपर उठाने में अहम योगदान दिया। वहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर में मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स के शेयरों में भी उनकी मजबूत मासिक बिक्री के आंकड़ों और ग्रामीण मांग में सुधार की खबरों के चलते जोरदार खरीदारी दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों का रुख और गिफ्ट निफ्टी: वॉल स्ट्रीट की मजबूती से मिला घरेलू बाजार को बूस्ट
घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत से पहले ही सिंगापुर एक्सचेंज पर मौजूद ‘गिफ्ट निफ्टी’ (Gift Nifty) से पूरी तरह से सकारात्मक संकेत मिल रहे थे, जो भारतीय बाजारों के लिए एक मजबूत ओपनिंग की गवाही दे रहा था। इसके साथ ही, एशियाई बाजारों में भी आज सुबह से ही तेजी का रुख बना रहा; जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक भी ट्रंप के बयान के बाद हरे निशान पर कारोबार कर रहे थे।
इससे ठीक एक दिन पहले, अमेरिकी बाजारों (वॉल स्ट्रीट) के पिछले सत्र में भी शानदार क्लोजिंग देखने को मिली थी। डाउ जोंस और एसएंडपी-500 सूचकांकों में आई इस मजबूती का सीधा ‘रिपल इफेक्ट’ (लहरदार असर) एशियाई और भारतीय बाजारों पर पड़ा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक वैश्विक बाजारों से सकारात्मक खबरें आती रहेंगी, तब तक भारतीय बाजार में लिक्विडिटी (नकदी का प्रवाह) मजबूत बनी रहेगी, जो सूचकांकों को नए रिकॉर्ड स्तरों की ओर ले जाने का काम करेगी।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का बदलता नजरिया: घरेलू निवेशकों ने बाजार को दी स्थिरता
पिछले कुछ कारोबारी सत्रों के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से आंशिक रूप से मुनाफावसूली की थी और वे लगातार बिकवाल बने हुए थे। लेकिन आज बदले हुए वैश्विक परिदृश्य और कच्चे तेल में आई नरमी को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक एक बार फिर भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध खरीदार (Net Buyers) के रूप में वापसी कर सकते हैं।
दूसरी ओर, देश के घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) और म्यूचुअल फंड्स लगातार बाजार में खरीदार बने हुए हैं, जो किसी भी बड़ी गिरावट के समय बाजार को एक मजबूत सुरक्षा कवच और स्थिरता प्रदान करते हैं। विदेशी और घरेलू दोनों प्रकार के निवेशकों के बीच बने इस वित्तीय संतुलन ने खुदरा निवेशकों के भरोसे को और अधिक मजबूत किया है। इसके चलते देश में नए डीमैट खाते खोलने और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए म्यूचुअल फंड्स में मासिक निवेश करने का आंकड़ा भी अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।
निष्कर्ष: आगे का आउटलुक सकारात्मक, लेकिन बाजार में सतर्कता और स्टॉप-लॉस है बेहद जरूरी
यह कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार (Sensex Today) के लिए समृद्धि और मजबूती का एक नया अध्याय लेकर आया है। डोनाल्ड ट्रंप का ईरान संबंधी बयान और कच्चे तेल की गिरती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी ढांचे (मैक्रो फंडामेंटल्स) को और अधिक मजबूत करने वाली साबित होंगी। यदि मध्य पूर्व का यह भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह से समाप्त हो जाता है, तो बाजार के दिग्गज विशेषज्ञों का अनुमान है कि निफ्टी आने वाले समय में 24,500 से 25,000 के स्तर को भी आसानी से छू सकता है।
हालांकि, इस भारी उत्साह और हरियाली के बीच खुदरा निवेशकों को यह हमेशा याद रखना चाहिए कि शेयर बाजार की प्रकृति स्वभाव से ही अत्यधिक उतार-चढ़ाव (Volatile) वाली होती है। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी निवेशक को केवल तेजी देखकर हवा में या पेनी स्टॉक्स में पैसा नहीं लगाना चाहिए, बल्कि हमेशा मजबूत बैलेंस शीट और अच्छे ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनियों में लंबी अवधि के दृष्टिकोण से ही निवेश करना चाहिए। किसी भी अप्रत्याशित वैश्विक झटके या विपरीत खबर से अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स को हमेशा सख्त ‘स्टॉप-लॉस’ का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने पोर्टफोलियो को पूरी तरह डाइवर्सिफाइड रखना चाहिए।
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