Rajya Sabha MPs Assets: राज्यसभा के 226 सांसदों की कुल संपत्ति 26,047 करोड़ रुपये, 31 अरबपति; तेलंगाना के सांसद सबसे अमीर, ADR रिपोर्ट में खुलासा
राज्यसभा के 226 सांसदों की कुल संपत्ति 26,047 करोड़ रुपये, 31 अरबपति; तेलंगाना के सांसद सबसे अमीर, ADR रिपोर्ट में खुलासा
Rajya Sabha MPs Assets: भारतीय राजनीति और देश के नीति-निर्धारण में धनबल और बाहुबल की भूमिका को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। देश की चुनावी और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर नजर रखने वाली गैर-सरकारी संस्था एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच ने राज्यसभा के सांसदों की वित्तीय स्थिति और उनके आपराधिक रिकॉर्ड को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। इस ताजा रिपोर्ट के अनुसार, संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा के 226 सांसदों की कुल घोषित संपत्ति का आंकड़ा 26,047 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि देश के इस प्रतिष्ठित सदन में प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों की औसत संपत्ति 115.25 करोड़ रुपये से अधिक है, जो देश के एक आम नागरिक की औसत आय और संपत्ति के मुकाबले बेहद असाधारण है।
एडीआर ने यह विस्तृत विश्लेषण सांसदों द्वारा चुनाव के समय निर्वाचन आयोग को दिए गए आधिकारिक शपथ पत्रों और राज्यसभा सचिवालय से प्राप्त डेटा के आधार पर तैयार किया है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारतीय लोकतंत्र में उच्च सदन की जो मूल परिकल्पना ज्ञान, अनुभव और समाज के हर वर्ग के प्रतिनिधित्व के लिए की गई थी, वह अब धीरे-धीरे धनकुबेरों के प्रभाव में तब्दील होती जा रही है। इस विश्लेषण में राज्यसभा की कुल 233 सीटों में से 226 मौजूदा सदस्यों के वित्तीय और कानूनी इतिहास का पूरा खाका देश के सामने रखा गया है।
ADR रिपोर्ट में राज्यसभा सांसदों की संपत्ति का आंकड़ा: करोड़पतियों का दबदबा
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट के सबसे चौंकाने वाले आंकड़े उच्च सदन में अमीर वर्ग के वर्चस्व को रेखांकित करते हैं। विश्लेषण किए गए 226 सांसदों में से 90 प्रतिशत से भी अधिक सदस्य करोड़पति की श्रेणी में आते हैं। पूरे सदन में मात्र चार सांसद ऐसे पाए गए हैं, जिनकी घोषित संपत्ति 20 लाख रुपये से भी कम है। संपत्ति के इस वितरण को अगर बारीकी से देखा जाए, तो पता चलता है कि राज्यसभा के 100 सांसदों के पास 10 करोड़ रुपये से अधिक की व्यक्तिगत संपत्ति है। वहीं, 41 सांसद ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 5 से 10 करोड़ रुपये के बीच है, जबकि 66 सांसदों ने अपनी संपत्ति 1 से 5 करोड़ रुपये के दायरे में घोषित की है। मात्र 15 सांसद ऐसे हैं जिनकी संपत्ति 20 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये के बीच दर्ज है।
यह आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि राज्यसभा में गरीब, निम्न और मध्यम वर्ग के सीधे प्रतिनिधित्व की गुंजाइश लगातार सिकुड़ती जा रही है। देश के उच्च सदन को आमतौर पर विद्वानों, वैज्ञानिकों, कलाकारों और जमीन से जुड़े अनुभवी नीति-निर्माताओं का मंच माना जाता है, लेकिन करोड़पतियों और अरबपतियों की यह भारी तादाद इस पारंपरिक छवि को गहराई से प्रभावित कर रही है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में धनबल का सदन में मौजूद होना कहीं न कहीं देश की आर्थिक और कॉर्पोरेट नीतियों के निर्धारण को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
तेलंगाना के सांसद सबसे अमीर: कुल संपत्ति का औसत सबसे ऊपर
इस रिपोर्ट का एक और बेहद आकर्षक और महत्वपूर्ण पहलू राज्यों के आधार पर किया गया संपत्ति का वर्गीकरण है, जिसमें तेलंगाना राज्य ने पूरे देश में बाजी मारी है। एडीआर के आंकड़ों के मुताबिक, तेलंगाना से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व करने वाले महज 7 सांसदों की कुल घोषित संपत्ति का योग 8,310 करोड़ रुपये के विशाल आंकड़े को छू रहा है। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि तेलंगाना का हर दूसरा राज्यसभा सांसद अरबपति है और राज्य के 57 प्रतिशत सदस्य इसी संभ्रांत श्रेणी में आते हैं। तेलंगाना के सांसदों की यह भारी-भरकम संपत्ति मुख्य रूप से बड़े व्यावसायिक उद्यमों, रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विभिन्न वित्तीय निवेशों से जुड़ी हुई है।
अमीर सांसदों की इस राष्ट्रीय सूची में सबसे ऊपर भारत राष्ट्र समिति (BRS) के सांसद डॉ. बंदी पार्थ सराधी का नाम शामिल है, जिनकी कुल घोषित संपत्ति 5,300 करोड़ रुपये से भी अधिक बताई गई है। इसी सूची में दूसरे बड़े नाम के रूप में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और प्रख्यात कानूनविद अभिषेक मनु सिंघवी का नाम आता है, जिनकी कुल संपत्ति लगभग 2,558 करोड़ रुपये आंकी गई है। तेलंगाना के अलावा अन्य बड़े राज्यों के सांसद भी आर्थिक रूप से बेहद संपन्न हैं, लेकिन प्रति सांसद औसत संपत्ति के मामले में तेलंगाना ने देश के बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को काफी पीछे छोड़ दिया है।
31 अरबपति सांसद: बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की बड़ी संख्या
एडीआर की इस नई रिपोर्ट ने सदन के भीतर मौजूद ‘सूपर-रिच’ यानी अरबपति सांसदों की सूची को भी सार्वजनिक किया है। देश के उच्च सदन में कुल 31 ऐसे सांसद हैं जिन्हें आधिकारिक तौर पर अरबपति माना गया है, यानी जिनकी कुल घोषित संपत्ति 100 करोड़ रुपये या उससे कहीं अधिक है। राजनीतिक दलों के आधार पर यदि इस सूची का विश्लेषण करें, तो सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पास ऐसे 7 सांसद हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 6 अरबपति सांसद मौजूद हैं। इनके अलावा क्षेत्रीय दलों में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 2, तेलुगु देशम पार्टी के 2, भारत राष्ट्र समिति के 2 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2 सांसद इस एलीट क्लब का हिस्सा हैं।
पंजाब राज्य से भारतीय जनता पार्टी के सांसद राजिंदर गुप्ता देश के दूसरे सबसे अमीर राज्यसभा सांसद बनकर उभरे हैं, जिनकी कुल घोषित संपत्ति 5,053 करोड़ रुपये के आसपास है। अमीर सांसदों की यह सूची इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि राजनीति में धनबल की यह सर्वव्यापकता किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लगभग सभी प्रमुख राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों ने धनी पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को उच्च सदन में भेजने को प्राथमिकता दी है, जिससे चुनावी राजनीति में पूंजीपतियों का प्रभाव साफ झलकता है।
आपराधिक मामलों का सनसनीखेज खुलासा: 69 सांसदों पर दर्ज हैं मुकदमे
पूंजी और संपत्ति के अलावा, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की इस रिपोर्ट ने सांसदों की आपराधिक पृष्ठभूमि को लेकर भी कई गंभीर और चिंताजनक खुलासे किए हैं। विश्लेषण में शामिल 226 सांसदों में से 69 सदस्यों (यानी लगभग 31 प्रतिशत) ने अपने चुनावी हलफनामे में खुद के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की घोषणा की है। इससे भी अधिक गंभीर बात यह है कि इन 69 सांसदों में से 36 सदस्य (यानी कुल सदन का 16 प्रतिशत) बेहद गंभीर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। इन गंभीर आरोपों में ऐसे मामले शामिल हैं जहां कानूनन दोषी पाए जाने पर न्यूनतम 5 वर्ष या उससे अधिक की जेल की सजा का प्रावधान है।
कानूनी मामलों के इस वर्गीकरण में यह भी सामने आया है कि उच्च सदन के एक मौजूदा सांसद पर हत्या जैसा संगीन मामला दर्ज है, जबकि चार सांसदों पर हत्या के प्रयास और अन्य चार सांसदों पर महिलाओं के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों व अत्याचारों से जुड़े मुकदमे चल रहे हैं। राजनीतिक दलों के प्रतिशत के हिसाब से देखें तो समाजवादी पार्टी के 50 प्रतिशत, तेलुगु देशम पार्टी के 75 प्रतिशत, राष्ट्रीय जनता दल के 67 प्रतिशत, कांग्रेस के 41 प्रतिशत और भारतीय जनता पार्टी के 26 प्रतिशत सांसदों पर आपराधिक मामले लंबित हैं। यह आंकड़े देश की सर्वोच्च पंचायत की वैधानिक और नैतिक गुणवत्ता पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं।
सबसे कम संपत्ति वाले सांसद: सदन में मौजूद विविधता की बानगी
जहां एक तरफ राज्यसभा में हजारों करोड़ की संपत्ति वाले महारथी बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी सांसद हैं जो अपनी सादगी और बेहद सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण इस सदन में एक अलग पहचान रखते हैं। एडीआर की रिपोर्ट में देश के सबसे कम संपत्ति वाले सांसदों की सूची भी दी गई है, जो यह साबित करती है कि तमाम विसंगतियों के बावजूद भारतीय लोकतंत्र में अभी भी कहीं न कहीं जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के लिए जगह बची हुई है। इस सूची में सबसे पहला नाम पंजाब से आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संत बलबीर सिंह का है, जिनकी कुल घोषित संपत्ति मात्र 3.79 लाख रुपये है।
इसी तरह, केरल राज्य से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद एए रहीम की कुल संपत्ति केवल 11.62 लाख रुपये घोषित की गई है, जो उनके साधारण जीवन और वामपंथी राजनीतिक पृष्ठभूमि को दर्शाती है। मध्य प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसद सुमित्रा वाल्मीक भी इस सूची में शामिल हैं, जिनकी कुल चल-अचल संपत्ति मात्र 17.85 लाख रुपये है। ये कुछ ऐसे गिने-चुने उदाहरण हैं जो राज्यसभा की उस विविधता को जीवित रखते हैं जिसकी कल्पना हमारे संविधान निर्माताओं ने की थी, हालांकि कुल मिलाकर ऐसे सांसदों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक ही रह गई है।
भारी कर्ज और देनदारी का बोझ: कुछ सांसदों पर करोड़ों के वित्तीय जोखिम
एडीआर की इस वित्तीय रिपोर्ट का एक और दिलचस्प पहलू सांसदों की देनदारियों यानी उनके ऊपर बकाया कर्ज से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट से यह साफ होता है कि राजनीति में बड़े पैमाने पर व्यवसाय और निवेश करने वाले इन सांसदों पर भारी वित्तीय जोखिम भी मंडरा रहे हैं। झारखंड से आने वाले स्वतंत्र सांसद परिमल नाथवानी के पास जहां 755 करोड़ रुपये की विशाल संपत्ति है, वहीं उनके ऊपर 256 करोड़ रुपये की भारी देनदारी भी दर्ज है। इसी तरह, आंध्र प्रदेश से तेलुगु देशम पार्टी के सांसद बी. रामा कृष्णा पर भी 200 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया कर्ज है।
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और समाजवादी पार्टी की वरिष्ठ सांसद जया बच्चन की वित्तीय स्थिति भी इस सूची में काफी चर्चा में है, जिनकी कुल घोषित संपत्ति 1,578 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है, लेकिन इसके साथ ही उनके ऊपर 149 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी भी है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि सांसदों द्वारा घोषित किया गया यह कर्ज मुख्य रूप से उनके पारिवारिक व्यवसायों के लिए लिए गए बैंक लोन, कॉर्पोरेट गारंटियों और व्यक्तिगत ऋणों के रूप में है, जो यह दिखाता है कि देश के नीति-निर्माता खुद बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियों और आर्थिक उतार-चढ़ाव से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।
निष्कर्ष: लोकतंत्र की शुचिता के लिए पारदर्शिता और जनता की जागरूकता अत्यंत आवश्यक
कुल मिलाकर, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की यह ताजा रिपोर्ट देश की संसद के उच्च सदन की वर्तमान स्थिति का एक निष्पक्ष और पारदर्शी आईना है। इस रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि आधुनिक भारतीय राजनीति में चुनाव लड़ने और संसद तक पहुंचने के लिए धनबल एक अनिवार्य योग्यता बनता जा रहा है, जिससे आम आदमी और मध्यम वर्ग का प्रतिनिधित्व लगातार कमजोर हो रहा है। इसके साथ ही, आपराधिक छवि वाले सांसदों की बढ़ती संख्या देश के कानून-निर्माण की प्रक्रिया की शुचिता पर भी एक गंभीर संकट पैदा करती है।
लोकतंत्र की मजबूती और इसकी विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए यह बेहद जरूरी है कि देश का आम मतदाता और नागरिक अपने जनप्रतिनिधियों की इस पृष्ठभूमि के प्रति पूरी तरह सजग और जागरूक रहे। चुनाव आयोग और न्यायपालिका को भी राजनीति के इस अपराधीकरण और अत्यधिक धनबल के उपयोग को रोकने के लिए आने वाले समय में और अधिक कड़े विधायी कदम उठाने होंगे। जब तक राजनीतिक दल स्वयं साफ-सुथरी छवि और समाज के शोषित-वंचित वर्गों से आने वाले योग्य उम्मीदवारों को संसद में भेजने की इच्छाशक्ति नहीं दिखाएंगे, तब तक लोकतंत्र की वास्तविक समावेशिता का सपना अधूरा ही रहेगा।
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