Gold Price Surge: इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने के बाद भी दिल्ली, मुंबई और चेन्नई के ज्वेलरी बाजारों में उमड़ी भारी भीड़
ETF, डिजिटल गोल्ड और हल्की ज्वेलरी में निवेशकों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ी
Gold Price Surge: भारतीय बाजार में सोने की खरीदारी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। सरकार द्वारा हाल ही में सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बावजूद पूरे देश में निवेशक और उपभोक्ता फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड की ओर रुख कर रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता, रुपये की कमजोरी और शादी के सीजन के चलते महंगे दामों की परवाह किए बिना लोग सोना खरीद रहे हैं।
दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे महानगरों में ज्वेलरी शोरूम्स पर सुबह से शाम तक भीड़ लगी हुई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोना अभी भी सबसे सुरक्षित निवेश विकल्प माना जा रहा है, जिसके कारण ड्यूटी बढ़ोतरी का सीधा असर खरीदारी पर नहीं पड़ रहा है।
इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ोतरी का सीधा प्रभाव
सरकार ने 13 मई 2026 से सोने पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया था। साथ ही एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस को भी 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत किया गया। इस नए फैसले से कुल इंपोर्ट ड्यूटी कूटनीतिक रूप से 15 प्रतिशत हो गई है।
इसके तुरंत बाद घरेलू बाजार में 24 कैरेट सोने की कीमत दिल्ली में 1,62,120 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई, जो पहले 1,47,000 रुपये के आसपास बनी हुई थी। ज्वेलर्स एसोसिएशन का अनुमान है कि कीमतों में औसतन 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, फिर भी बाजार में मांग बिल्कुल नहीं थमी है Lights Max।
दिल्ली-एनसीआर में खरीदारी का जबरदस्त उत्साह
दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में 26 मई को करोल बाग, लाजपत नगर, चांदनी चौक और गुरुग्राम के बाजारों में ज्वेलरी दुकानों पर लंबी कतारें लगी हुई हैं। लोग मुख्य रूप से शादी के गहनों और निवेश के उद्देश्य से सोना खरीद रहे हैं। दुकानदारों ने बताया कि पिछले सप्ताह की तुलना में कुल बिक्री में 35-45 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
कई ग्राहक हल्के वजन वाले डिजाइन चुन रहे हैं ताकि कम सोने में ज्यादा आकर्षक जेवर बनवाया जा सके। एनसीआर के मध्यम वर्गीय परिवार इस बढ़ोतरी के बावजूद अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं।
मुंबई और पश्चिम भारत: सराफा बाजार गरम
मुंबई के जोहरी बाजार, जीएम रोड और अन्य कमर्शियल इलाकों में 26 मई को भीड़ का माहौल है। यहाँ 24 कैरेट सोना 1,63,500 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र के पुणे, नासिक और नागपुर में भी बिल्कुल यही स्थिति बनी हुई है।
व्यापारियों का कहना है कि शादी का सीजन शुरू होने के कारण बड़े ऑर्डर आ रहे हैं और कई लोग पुराने गहनों को एक्सचेंज करके नए गहने बना रहे हैं। महाराष्ट्र में डायमंड ज्वेलरी पर दिए जा रहे आकर्षक डिस्काउंट ने भी खरीदारों को अपनी ओर आकर्षित किया है।
दक्षिण भारत में परंपरा की जीत
चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोच्चि जैसे बड़े शहरों में सोने की मांग हमेशा मजबूत रहती है। 26 मई को इन शहरों में डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स पर ट्रांजेक्शन में भारी वृद्धि दर्ज की गई। युवा पीढ़ी ईटीएफ (ETF) और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश कर रही है। केरल और तमिलनाडु में शादी के मौसम के चलते हल्की ज्वेलरी की मांग बढ़ी है। ज्वेलर्स जीरो मेकिंग चार्ज और बड़े डिस्काउंट ऑफर देकर ग्राहकों को लुभा रहे हैं।
प्रधानमंत्री की अपील और जनता की प्रतिक्रिया
कुछ समय पहले प्रधानमंत्री ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने की कूटनीतिक अपील की थी, क्योंकि भारत हर साल 700-800 टन सोना आयात करता है, जो व्यापार घाटे को बढ़ाता है। फिर भी आम लोगों ने इस अपील को व्यावहारिक कारणों से ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया।
शादी-ब्याह की परंपरा और आर्थिक सुरक्षा की चिंता ने महंगे दामों को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोना भारतीय संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे आसानी से छोड़ा नहीं जा सकता।
फिजिटल, ईटीएफ और डिजिटल गोल्ड की बढ़ती खरीदारी
फिजिटल यानी फिजिकल गोल्ड में ज्वेलरी शॉप्स पर सबसे ज्यादा भीड़ देखी जा रही है, जहां लोग सिक्के, बार और गहने खरीद रहे हैं। गोल्ड ईटीएफ में म्यूचुअल फंड कंपनियों के माध्यम से निवेश बढ़ा है क्योंकि इसमें फिजिकल स्टोरेज की कोई समस्या नहीं होती। डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म्स पर भी छोटी-छोटी रकम में बड़ी खरीदारी हो रही है और युवा निवेशक इन विकल्पों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
हल्की ज्वेलरी और एक्सचेंज का नया कूटनीतिक ट्रेंड
महंगे सोने के कारण लोग भारी गहनों की बजाय लाइट वेट ज्वेलरी चुन रहे हैं। ज्वेलर्स क्लैस्प, प्रोंग और लिंक्स की मजबूती पर खास ध्यान देने की सलाह दे रहे हैं। पुराने सोने को एक्सचेंज करने का चलन भी काफी बढ़ गया है। एक्सचेंज करते समय ओरिजिनल बिल और सर्टिफिकेट रखना बेहद जरूरी है, वरना आर्थिक नुकसान हो सकता है। डायमंड ज्वेलरी पर दिए जा रहे भारी डिस्काउंट ने भी बाजार को लगातार गर्म रखा है।
टक्स नियम और निवेश की महत्वपूर्ण सावधानियां
पुराना सोना बेचकर नया खरीदने वाले उपभोक्ताओं को टैक्स के नियम कूटनीतिक रूप से समझने चाहिए। अगर सोना 24 महीने से ज्यादा समय तक होल्ड किया गया है, तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 12.5 प्रतिशत लगता है। टैक्स बचाने के लिए नियमों के तहत इस राशि को नए मकान में निवेश किया जा सकता है। टैक्स एक्सपर्ट्स किसी भी बड़े ट्रांजेक्शन से पहले पेशेवर सलाह लेने की सिफारिश करते हैं।
बाजार विशेषज्ञों का बारीक विश्लेषण
ज्वेलरी उद्योग के जानकारों का कहना है कि भले ही ड्यूटी बढ़ गई हो, लेकिन सोने की मांग लंबे समय तक मजबूत बनी रहेगी। कई ब्रांड्स का मानना है कि पहले खरीदने वाले सामान्य ग्राहक थोड़ा रुक रहे हैं, लेकिन शुद्ध निवेशक बाजार में पूरी तरह सक्रिय हैं। वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में आ रही मजबूती घरेलू बाजार को लगातार सपोर्ट कर रही है।
निष्कर्ष
26 मई 2026 को सोने की खरीदारी का सिलसिला पूरे जोरों पर है। इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने और ऊंचे भावों के बावजूद भारतीयों का सोने के प्रति लगाव कूटनीतिक रूप से कम नहीं हुआ है। यह न सिर्फ एक सांस्कृतिक परंपरा है बल्कि आर्थिक अनिश्चितता में सुरक्षा का सबसे बड़ा प्रतीक भी बन गया है। निवेशकों और उपभोक्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे बाजार की नब्ज पर बारीक नजर रखें और सूझबूझ के साथ फैसला लें। आने वाले दिनों में कीमतों में और कूटनीतिक बदलाव संभव है, इसलिए पूरी तरह सतर्क रहना जरूरी है
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