Raksha Bandhan 2026 Puja Vidhi: राखी बांधने से पहले करें तिलक या आरती? जानें सही नियम और विधि

Raksha Bandhan 2026 Puja Vidhi: राखी बांधने से पहले करें तिलक या आरती? जानें सही नियम और विधि

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Raksha Bandhan 2026 Puja Vidhi: भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार हर साल हमारे जीवन में ढेर सारी खुशियां लेकर आता है। इस खास दिन पर हर बहन बड़ी ही श्रद्धा के साथ भाई की कलाई पर राखी बांधती है और उसकी लंबी उम्र की कामना करती है। लेकिन पूजा की थाली सजाने के बाद अक्सर एक बड़ा असमंजस सामने आ जाता है कि आखिर रस्मों की शुरुआत कैसे की जाए। क्या सबसे पहले भाई का तिलक करना चाहिए, कलाई पर राखी बांधनी चाहिए या फिर आरती उतारनी चाहिए? मामला कुछ इस तरह से है कि थोड़ी सी जानकारी के अभाव में लोग अक्सर आगे-पीछे रस्में पूरी कर देते हैं, जिससे मन में एक अनजाना संकोच बना रहता है। आखिर पारंपरिक रूप से राखी बांधने की सही विधि क्या है, जिसके बारे में हर किसी को जरूर पता होना चाहिए?
जानकारों का मानना है कि सनातन परंपरा में हर पूजा-पाठ और अनुष्ठान का एक निश्चित क्रम होता है, जिसे विधि-विधान के अनुसार ही पूरा किया जाना चाहिए। रक्षा बंधन के पावन अवसर पर भी यदि आप सही क्रम में रस्में निभाते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव भाई-बहन दोनों के जीवन पर पड़ता है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर वे कौन से चरण हैं जिनके जरिए इस पूजा को पूर्ण माना जाता है और किस गलती से बचना चाहिए? आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं कि इस बार आपको थाली सजाने से लेकर भाई को मिठाई खिलाने तक किन नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।

Raksha Bandhan 2026 Puja Vidhi: रक्षाबंधन की पूजा थाली में क्या-क्या सामग्री रखना है जरूरी

किसी भी धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत एक व्यवस्थित थाली से होती है और रक्षा बंधन के दिन यह थाली भाई-बहन के रिश्ते की मिठास को और बढ़ा देती है। राखी की थाली को सजाने के लिए बहुत अधिक तामझाम या महंगी सामग्री की कोई आवश्यकता नहीं होती है। इस पावन थाली में मुख्य रूप से राखी, रोली या कुमकुम, अक्षत यानी साबुत चावल, शुद्ध घी का दीपक, कुछ मीठी चीजें और आरती की सामग्री रखनी चाहिए।
थाली को आकर्षक बनाने के लिए आप उसमें ताजे फूल या पत्तियों का इस्तेमाल भी कर सकती हैं। जब बहन अपने हाथों से पूरी तल्लीनता के साथ थाली सजाती है और उसमें भाई की पसंद की चीजें शामिल करती है, तो यह रस्म और भी अधिक खास बन जाती है। पूजा के दौरान आसपास का वातावरण पूरी तरह शांत और सकारात्मक रखना चाहिए, ताकि भाई-बहन के बीच का यह रिश्ता और अधिक मजबूत हो सके।

राखी बांधने का सही क्रम: सबसे पहले क्या और उसके बाद क्या करें

पूजा का सबसे अहम हिस्सा तब शुरू होता है जब भाई को एक साफ-सुथरे आसन पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाया जाता है। इसके बाद रस्मों की शुरुआत करते हुए सबसे पहले रोली या कुमकुम से भाई के माथे पर तिलक लगाया जाता है। तिलक लगाने के बाद ठीक उसी जगह पर अक्षत यानी चावल के दाने लगाए जाते हैं, जिन्हें शुभता, समृद्धि और मंगल का प्रतीक माना जाता है।
अक्षत लगाने की यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है जो भाई के जीवन में कभी भी अन्न और धन की कमी न होने की कामना को दर्शाती है। तिलक और अक्षत की यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अगला चरण शुरू होता है, जिसमें भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। इस दौरान मन ही मन ईश्वर से भाई के सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की जाती है।

राखी बांधने के तुरंत बाद आरती उतारने और मिठाई खिलाने का नियम

जब बहन भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध लेती है, तो उसके तुरंत बाद का चरण बेहद भावुक और आनंददायक होता है। राखी बंध जाने के बाद बहन को त्रेता युग की परंपराओं का पालन करते हुए भाई की आरती उतारनी चाहिए और उसके उज्जवल भविष्य की कामना करनी चाहिए। आरती के बाद भाई को अपने हाथों से कोई मीठी चीज जैसे मिठाई या गुड़ खिलाकर इस पवित्र रस्म को पूरा किया जाता है।
इसके बदले में भाई अपनी क्षमता और प्यार के अनुसार बहन को उपहार भेंट करता है, जो उनके आपसी स्नेह का इजहार होता है। देखने पर लगता है कि यह बहुत छोटी-छोटी बातें हैं, लेकिन यही वो पल होते हैं जो उम्र भर के लिए यादों के संदूक में सुरक्षित हो जाते हैं। जब आप इन सभी नियमों को सही क्रम में निभाते हैं, तो त्योहार की असली खूबसूरती निखर कर सामने आती है।

Raksha Bandhan 2026 Puja Vidhi:राखी बांधते और बनवाते समय किन छोटी बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान

त्योहार की जल्दबाजी में कई बार लोग कुछ ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर बैठते हैं जिन पर बाद में पछताना पड़ता है। रक्षा बंधन की रस्मों को कभी भी औपचारिकता समझकर जल्दबाजी में पूरा नहीं करना चाहिए, बल्कि इन्हें पूरी श्रद्धा और सहजता के साथ निभाना चाहिए। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कलाई पर बांधी जाने वाली राखी न तो इतनी ढीली हो कि आसानी से निकल जाए और न ही इतनी कसी हुई हो कि भाई की कलाई पर असहजता पैदा करे।
पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी वस्तुएं पूरी तरह स्वच्छ होनी चाहिए और खंडित चावलों का प्रयोग करने से बचना चाहिए। दीपक जलाते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। जब आप इन तमाम छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हैं, तो आपका यह पावन पर्व बिना किसी विघ्न के हंसी-खुशी संपन्न हो जाता है।
यह त्योहार केवल एक धागे का बंधन नहीं है, बल्कि यह दो दिलों के बीच अटूट विश्वास और एक-दूसरे की रक्षा करने के आजीवन संकल्प का प्रतीक है। जब आप इन पारंपरिक नियमों और सही विधि के साथ इस पर्व को मनाते हैं, तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस साल बहनें किस तरह से इन पारंपरिक तरीकों से अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र सजाकर इस दिन को ऐतिहासिक बनाती हैं।

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