Rabri Devi Notice:10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने का अंतिम नोटिस, 7 दिनों में कार्रवाई की चेतावनी, बिहार में सियासी घमासान तेज

राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने का अंतिम नोटिस: 7 दिनों में कार्रवाई की चेतावनी, बिहार में सियासी घमासान तेज

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Rabri Devi Notice:  बिहार की राजधानी पटना के सबसे वीवीआईपी राजनीतिक गलियारे में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की वरिष्ठ नेता राबड़ी देवी को उनके आधिकारिक निवास, 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले को खाली करने का ‘अंतिम नोटिस’ थमा दिया गया है। बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी इस कड़े नोटिस में साफ तौर पर चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर इस बंगले को पूरी तरह से खाली नहीं किया गया, तो विभाग मजबूरन दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू कर देगा। यह आलीशान सरकारी बंगला पिछले लगभग दो दशकों से लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार का मुख्य आधिकारिक और राजनीतिक ठिकाना रहा है, जिसके कारण इस नोटिस ने राज्य के सियासी तापमान को चरम पर पहुंचा दिया है।

भवन निर्माण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, नई सरकार की संशोधित नियमावली और आवास आवंटन नीतियों के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवासीय विशेषाधिकारों को अब सीमित कर दिया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत 10 सर्कुलर रोड स्थित इस बंगले को अब राज्य सरकार के एक अन्य वरिष्ठ मंत्री को आवंटित किया जा चुका है। सरकार का कहना है कि यह एक पूरी तरह से प्रशासनिक और नियमसंगत प्रक्रिया है, जबकि आरजेडी और लालू परिवार इसे सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिशोध और बदले की भावना से प्रेरित कार्रवाई बता रहा है।

अंतिम नोटिस की मुख्य बातें: वैकल्पिक आवास मिलने के बाद खाली करने का निर्देश

भवन निर्माण विभाग द्वारा राबड़ी देवी को भेजा गया यह तीसरा और अंतिम रिमाइन्डर नोटिस है। विभाग ने अपने आधिकारिक पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में राबड़ी देवी का इस विशिष्ट बंगले पर रहने का कानूनी अधिकार काफी समय पहले ही समाप्त हो चुका है। चूंकि वे वर्तमान में बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, इसलिए उनके पद की गरिमा और प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें पहले ही पटना के 39 हार्डिंग रोड स्थित एक अन्य भव्य वैकल्पिक बंगला आवंटित किया जा चुका है।

नोटिस में लिखा गया है कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद 10 सर्कुलर रोड के परिसर को नए आवंटिती को नहीं सौंपा गया है, जिससे सरकारी कामकाज में बाधा आ रही है। विभाग ने साफ किया है कि इस सात दिन की अंतिम समय सीमा के बीत जाने के बाद जिला प्रशासन और पुलिस बल की मदद से बंगले को खाली कराने की कानूनी प्रक्रिया (इविक्शन प्रोसीडिंग्स) शुरू कर दी जाएगी। इससे पहले जारी किए गए दो नोटिसों पर लालू परिवार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब न मिलने के बाद ही सरकार ने यह सख्त रुख अपनाया है।

राबड़ी देवी का कड़ा और भावुक रुख: राजनीतिक बदले की भावना का लगाया आरोप

इस अंतिम नोटिस के सार्वजनिक होने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए दोटूक शब्दों में कहा कि सरकार चाहे तो पुलिस बल और फौज बुलाकर उनसे जबरन यह बंगला खाली करा ले, लेकिन वे खुद से इस घर को छोड़कर नहीं जाएंगी। राबड़ी देवी ने बेहद भावुक होते हुए कहा कि इस बंगले के साथ उनके पूरे परिवार का पिछले 20 वर्षों का गहरा भावनात्मक और आत्मीय लगाव जुड़ा हुआ है। इसी घर में रहकर उन्होंने बिहार की राजनीति के कई ऐतिहासिक और बड़े फैसले लिए हैं और परिवार के सुख-दुख के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं।

राबड़ी देवी और आरजेडी के अन्य बड़े नेताओं का आरोप है कि मुख्यमंत्री और सत्ताधारी गठबंधन जान-बूझकर विपक्ष के शीर्ष नेताओं को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए इस तरह की ओछी राजनीति का सहारा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को उनके सम्मान और सुरक्षा को देखते हुए आजीवन आवास देने की परंपरा रही है, लेकिन वर्तमान सरकार सभी लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखकर केवल राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाने का काम कर रही है।

10 सर्कुलर रोड का ऐतिहासिक महत्व: दो दशकों की बिहार राजनीति का मुख्य केंद्र

पटना का 10 सर्कुलर रोड केवल एक सरकारी आवास नहीं है, बल्कि यह पिछले दो दशकों की बिहार और देश की राजनीति की कई बड़ी पटकथाओं का साक्षी रहा है। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए यह बंगला इस कुनबे का मुख्य निवास स्थान बना था। इसके बाद राबड़ी देवी ने भी मुख्यमंत्री के रूप में और बाद में विपक्ष की नेता के तौर पर इसी प्रांगण से अपनी पूरी राजनीति का संचालन किया। राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठकें, महामंत्रणाएं और टिकटों का बंटवारा जैसी तमाम बड़ी गतिविधियां इसी परिसर के भीतर होती आई हैं।

पॉलिटिकल एनालिस्ट्स का मानना है कि लालू परिवार के लिए इस बंगले को छोड़ना उनकी राजनीतिक विरासत के एक बड़े केंद्र के छिन जाने जैसा है। यही कारण है कि यह पूरा मामला अब एक बड़े कानूनी और राजनीतिक दंगल का रूप ले चुका है। दूसरी तरफ, नीतीश सरकार का तर्क है कि लोकतंत्र में कोई भी सरकारी संपत्ति किसी व्यक्ति या परिवार की स्थायी जागीर नहीं हो सकती है, और समय के साथ बदलाव व नियमों का कड़ाई से पालन होना अत्यंत अनिवार्य है।

निष्कर्ष: विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शह और मात का खेल, कोर्ट जा सकता है मामला

बिहार में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उठे इस आवास विवाद ने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को जनता के बीच अपनी-अपनी बात रखने का एक नया मुद्दा दे दिया है। राष्ट्रीय जनता दल इस पूरे प्रकरण को लालू परिवार के प्रति सरकार के अन्याय और ‘अति पिछड़ा व दलित विरोधी’ मानसिकता के रूप में पेश करने की रणनीति बना रही है ताकि सहानुभूति कार्ड खेला जा सके। इसके विपरीत, एनडीए (NDA) गठबंधन इसे सुशासन, कानून के राज और सभी के लिए समानता के सिद्धांत के रूप में भुनाने की कोशिश कर रहा है।

आगामी सात दिनों की यह समय सीमा जैसे-जैसे नजदीक आएगी, पटना की सड़कों पर राजनीतिक सरगर्मी और अधिक बढ़ने की पूरी उम्मीद है। कानूनी विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस संभावित प्रशासनिक कार्रवाई को रोकने के लिए आरजेडी का लीगल सेल बहुत जल्द पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या लालू परिवार सात दिनों के भीतर खुद नए आवास में शिफ्ट होता है या फिर पटना की सड़कों पर एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक और कानूनी टकराव देखने को मिलता है।

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