Punjab Election 2027: चुनाव से पहले AAP में बढ़ी अंदरूनी कलह, विधायक सुखवीर मैसरखाना के निलंबन से भगवंत मान की बढ़ी चुनौती

मौर विधायक सुखवीर मैसरखाना ने शिक्षक कमी का मुद्दा उठाया, AAP ने अनुशासनहीनता के आरोप में किया निलंबित

0
Punjab Election 2027: पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर संगठनात्मक स्तर पर मतभेद और असंतोष की परतें खुलकर सामने आने लगी हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार के सामने अब तक मुख्य चुनौती विपक्षी दलों के हमलों से निपटने की थी, लेकिन अब पार्टी के अपने ही विधायकों के बगावती तेवर नेतृत्व के लिए सिरदर्द बन रहे हैं। बठिंडा जिले के मौर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना द्वारा सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाने और उसके तुरंत बाद पार्टी द्वारा उन्हें निलंबित किए जाने से सूबे का सियासी तापमान अचानक चढ़ गया है।

Punjab Election 2027: शिक्षकों की कमी पर अपनी ही सरकार को घेरा, उठाए गंभीर सवाल

इस ताजा राजनीतिक विवाद की शुरुआत विधायक सुखवीर सिंह मैसरखाना के उस वीडियो संदेश से हुई, जिसमें उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की बदहाली और शिक्षकों की भारी किल्लत पर खुला असंतोष जाहिर किया। मैसरखाना ने भावुक होते हुए कहा कि उनके अपने दोनों बच्चे भी सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, इसलिए वह इस जमीनी हकीकत और बच्चों के भविष्य को लेकर मूकदर्शक नहीं बने रह सकते।
विधायक का दावा था कि उन्होंने शिक्षा मंत्री और शीर्ष नेतृत्व के समक्ष कई बार शिक्षकों के खाली पदों को भरने की गुहार लगाई, लेकिन बार-बार केवल आश्वासन ही मिले। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आगामी 2027 के चुनाव में टिकट कटने की आशंका और पार्टी के भीतर आंतरिक संवाद खत्म होने के कारण उन्हें यह बात सीधे जनता के बीच रखने पर मजबूर होना पड़ा।

पार्टी की त्वरित अनुशासनात्मक कार्रवाई और निलंबन

वीडियो सार्वजनिक होने के कुछ ही घंटों के भीतर आम आदमी पार्टी के प्रदेश संगठन ने कड़ा रुख अख्तियार किया। पार्टी के प्रदेश महासचिव हरचंद सिंह बरसट द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में मैसरखाना की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दी गई। पार्टी ने उन पर अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया।
पार्टी नेतृत्व ने विधायक के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र के ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ में 30 में से 25 शैक्षणिक पद भरे हुए हैं और व्यवस्थाओं को निरंतर सुधारा जा रहा है। AAP के अनुसार, किसी भी जनप्रतिनिधि को अगर प्रशासनिक या नीतिगत शिकायत थी तो उसे पार्टी के आंतरिक मंचों पर रखना चाहिए था, न कि सोशल मीडिया पर जाकर सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाना चाहिए था।

पठानमाजरा से लेकर कुंवर विजय प्रताप तक: असंतोष का पुराना सिलसिला

सुखवीर सिंह मैसरखाना की बगावत कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले सनौर से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने भी राज्य में बाढ़ नियंत्रण के उपायों, प्रशासनिक विफलताओं और पंजाब सरकार में दिल्ली के नेताओं के कथित हस्तक्षेप को लेकर खुलकर नाराजगी जाहिर की थी।
वहीं अमृतसर नॉर्थ से तेजतर्रार विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी कुंवर विजय प्रताप सिंह को भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जा चुका है, जिन्होंने बेअदबी मामलों की जांच और राज्य में कानून व्यवस्था के मुद्दों पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। इन प्रमुख चेहरों के खुले विद्रोह ने यह स्पष्ट कर दिया है कि 2022 के चुनाव में 117 में से 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक बहुमत हासिल करने वाली पार्टी के भीतर आंतरिक संवाद और विधायकों की सुनवाई को लेकर गहरा असंतोष पनप रहा है।

राज्यसभा सांसदों की बगावत के बाद संगठन को दूसरा बड़ा झटका

आम आदमी पार्टी के लिए यह आंतरिक कलह ऐसे समय पर सामने आई है जब पार्टी पहले से ही बड़े संगठनात्मक नुकसान से उबरने का प्रयास कर रही है। इससे पूर्व अप्रैल माह में पार्टी के 10 राज्यसभा सांसदों में से सात सांसद—जिनमें पंजाब से जुड़े छह प्रमुख नेता शामिल थे—एक साथ भाजपा में शामिल हो गए थे।
उच्च सदन में इतनी बड़ी संख्या में सांसदों के छिटकने से पार्टी की राष्ट्रीय और क्षेत्रीय साख को गहरा आघात पहुंचा था। अब जमीनी स्तर पर विधायकों की सार्वजनिक नाराजगी ने विपक्षी दलों को मान सरकार पर चौतरफा हमला बोलने का नया हथियार दे दिया है।

Punjab Election 2027: ‘पंजाब शिक्षा मॉडल’ के दावों पर दागे तीखे सवाल

विधायक के निलंबन के बाद पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष परगट सिंह और शिरोमणि अकाली दल के नेताओं ने भगवंत मान सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष का कहना है कि जिस शिक्षा मॉडल को आम आदमी पार्टी अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताकर पूरे देश में प्रचारित करती रही है, उसी मॉडल की पोल अब उसके अपने विधायक खोल रहे हैं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सच बोलने वाले जनप्रतिनिधियों की आवाज सुनने के बजाय उन्हें निलंबित करके सरकार अपनी प्रशासनिक विफलता छिपाने की कोशिश कर रही है।
2027 के विधानसभा चुनाव के नजदीक आने के साथ ही भगवंत मान और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के लिए यह चुनौती अब दोहरी हो चुकी है। एक तरफ जहां उन्हें राज्य में जनता के बीच किए गए वादों की कसौटी पर खरा उतरना है, वहीं दूसरी तरफ अपने असंतुष्ट विधायकों को एकजुट रखना और संगठनात्मक बिखराव को रोकना उनके अस्तित्व और भविष्य की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाला है।

Read more here

Shardiya Navratri 2026: दुर्गा सप्तशती का पाठ करते समय न करें ये गलतियां, जानें सही नियम और शास्त्रीय विधि

Somwar Ke Upay 5 October 2026: सोमवार को कर लें ये काम, पितरों की कृपा और शिव आशीर्वाद के लिए बेहद खास हैं ये उपाय

Petrol-Diesel Price 5 October 2026: पेट्रोल-डीजल के आज के ताजा रेट जारी, शहरों में जानिए क्या है भाव

SC-ST Act on Social Media: सोशल मीडिया पर जातिसूचक टिप्पणी भी SC-ST Act के दायरे में, कलकत्ता हाई कोर्ट ने नए सिरे से जांच का आदेश

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.