CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आज फिर प्रदर्शन: जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ड्रोन से रखी जा रही निगरानी

SIR विवाद को लेकर विपक्षी प्रदर्शन के बीच जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर सुरक्षा बढ़ी

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Protest Against CEC: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में जारी राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक संगठनों द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग और आसपास के वीवीआईपी इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी है। लुटियंस दिल्ली की संवेदनशील सीमाओं और चौराहों पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आसमान से ड्रोन कैमरों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।

Protest Against CEC: जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर सुरक्षा का त्रिस्तरीय घेरा

प्रदर्शनकारियों को निर्वाचन सदन (चुनाव आयोग मुख्यालय) और संवेदनशील प्रशासनिक प्रतिष्ठानों की ओर बढ़ने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने संसद मार्ग, जंतर-मंतर रोड, रफी मार्ग और अशोका रोड पर सुरक्षा का अभेद्य पहरा बिठाया है। इन सभी प्रमुख मार्गों पर लोहे के मजबूत बैरिकेड्स और कंटीले तारों की तीन-स्तरीय बाड़ लगाई गई है। दिल्ली पुलिस के जवानों के अलावा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की अतिरिक्त कंपनियों को दंगा-रोधी उपकरणों के साथ तैनात किया गया है। पुलिस नियंत्रण कक्ष से संवेदनशील इलाकों में हो रही हर हलचल पर लाइव ड्रोन फुटेज के जरिए नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी संभावित अव्यवस्था से तुरंत निपटा जा सके।

विपक्षी सांसदों का मार्च और संसद मार्ग पर टकराव

सीईसी के खिलाफ यह आंदोलन विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ के आक्रामक रुख के बाद नए मुकाम पर पहुंच चुका है। इससे पहले मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से निर्वाचन सदन की ओर विरोध मार्च निकालने की कोशिश की थी। हालांकि, पुलिस ने संसद मार्ग पर भारी बैरिकेडिंग लगाकर मार्च को बीच में ही रोक दिया।
रास्ता रोके जाने के बाद वरिष्ठ विपक्षी नेता सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुचिता बनाए रखने में विफल साबित हुआ है और मतदाता सूची में मनमाने बदलाव किए जा रहे हैं।

क्या है SIR विवाद और विपक्ष के प्रमुख आरोप?

इस पूरे गतिरोध के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) और फॉर्म-6 में किए गए बदलाव हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वैध मतदाताओं के नाम बिना किसी पारदर्शी सुनवाई के मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
विपक्ष ने सवाल उठाया है कि चुनाव आयोग ने नए मतदाताओं के पंजीकरण और फॉर्म-6 के नियमों में जो संशोधन किए हैं, वे युवाओं और हाशिए के तबकों को वोटिंग अधिकार से वंचित करने की साजिश हैं। इसके साथ ही विपक्ष ने यह गंभीर आरोप भी लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त आयोग के अन्य दो सदस्यों के साथ पूर्ण सहमति बनाए बिना एकतरफा निर्णय ले रहे हैं, जिससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पूरी तरह संदेह के घेरे में आ गई है।

चुनाव आयोग का पक्ष और स्पष्टीकरण

दूसरी ओर, निर्वाचन आयोग ने विपक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग की ओर से जारी बयानों में स्पष्ट किया गया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, कानून सम्मत और नियमों के दायरे में रहकर चलाई जा रही है। आयोग ने यह भी साफ किया है कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर किसी तरह का मतभेद नहीं है और सभी निर्णय स्थापित प्रशासनिक नियमों के तहत ही लिए जा रहे हैं। फर्जी और दोहरे मतदाताओं के नाम हटाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस कदम को किसी राजनीतिक दल के दबाव में नहीं लाया गया है।

Protest Against CEC: मध्य दिल्ली में ट्रैफिक जाम और डायवर्जन

राजधानी के केंद्र में हो रहे लगातार प्रदर्शनों और सुरक्षा बंदोबस्त के कारण लुटियंस दिल्ली और मध्य दिल्ली की यातायात व्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों के लिए परामर्श जारी करते हुए संसद मार्ग, जंतर-मंतर रोड, जनपथ, कस्तूरबा गांधी मार्ग और कनॉट प्लेस के इनर व आउटर सर्कल की ओर जाने से बचने की सलाह दी है। कई मार्गों पर ट्रैफिक को डायवर्ट किए जाने के कारण सुबह के व्यस्त समय में सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। मेट्रो स्टेशनों पर भी अतिरिक्त सीआईएसएफ कर्मियों को तैनात किया गया है ताकि जंतर-मंतर के नजदीकी स्टेशनों पर भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके।
चुनावी शुचिता, मतदाता सूची और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज को लेकर छिड़ा यह राजनीतिक विवाद अब संसद के गलियारों से लेकर सड़कों और अदालत की चौखट तक फैल चुका है, जिससे आने वाले दिनों में यह टकराव और गहराने के पूरे आसार दिखाई दे रहे हैं।

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