बेंगलुरु की सब्जियों में जहर! CPCB रिपोर्ट में खुलासा,- बैंगन में FSSAI सीमा से 20 गुना ज्यादा लेड, 72 में से 19 सैंपल फेल; करेला, लौकी और हरी सब्जियां भी दूषित
CPCB रिपोर्ट में खुलासा, 72 में से 19 सैंपल फेल, बैंगन में FSSAI सीमा से 20 गुना लेड, करेला-लौकी भी
CPCB Report: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रहने वाले लोगों के लिए एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आई है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड यानी CPCB की जॉइंट कमिटी ने एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि शहर के लोकप्रिय बाजारों में बिकने वाली आम सब्जियों में लेड यानी सीसे की मात्रा फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI की तय सीमा से कई गुना अधिक है। इसके अलावा कई सब्जियों में खतरनाक कीटनाशकों के अवशेष भी पाए गए हैं। यह रिपोर्ट बेंगलुरु के लाखों लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
CPCB Report: कैसे हुई जांच और कहां से लिए गए सैंपल?
CPCB ने इस जांच के लिए एक विशेष जॉइंट कमिटी गठित की जिसमें कर्नाटक स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (KSPCB), FSSAI, ICAR इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ सॉइल साइंस (IISS) भोपाल और यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (UAS) के विशेषज्ञ शामिल थे। कमिटी ने 2025 में फरवरी और सितंबर के दौरान कुल 72 सब्जी सैंपल एकत्र किए। ये सैंपल नेलमंगला के केम्पलिंगना हल्ली, राजाजीनगर के सिद्दैया पुराणिक रोड, कोलार के APMC मार्केट और महालक्ष्मी लेआउट के HOPCOMS सब्जी मार्केट से लिए गए थे। जांच में बीन्स, लौकी, चुकंडर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च, मिर्च, खीरा, शलजम, पत्तेदार सब्जियां और स्क्वैश शामिल थे।
CPCB Report: किन सब्जियों में मिला सबसे ज्यादा लेड?
जांच के नतीजे बेहद चौंकाने वाले हैं। 72 में से 19 सैंपलों में लेड की मात्रा FSSAI की अनुमति वाली सीमा से कहीं अधिक पाई गई। बैंगन में लगभग 2 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम लेड मिला जबकि FSSAI की सीमा सिर्फ 0.1 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम है यानी सीमा से 20 गुना अधिक। कोलार से आए करेले के सैंपल में लेड 1.9 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक था जबकि सीमा 0.1 mg/kg है यानी 19 गुना अधिक। छोटी लौकी में 1.75 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम लेड मिला जबकि सीमा 0.1 mg/kg है यानी साढ़े 17 गुना अधिक। हरी पत्तेदार सब्जियों में लेड 1.68 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक पहुंचा जबकि सीमा 0.3 mg/kg है यानी लगभग 6 गुना अधिक।
CPCB Report: कीटनाशकों के अवशेष भी मिले
लेड के अलावा कमिटी ने सभी 72 सैंपलों में FSSAI के 2011 नियमों के तहत 230 कीटनाशक अवशेषों की भी जांच की। इसमें 10 सैंपलों में कुल 18 अलग-अलग कीटनाशक अवशेष मिले। शिमला मिर्च, मिर्च बज्जी, खीरा और अदरक में किसानों द्वारा इस्तेमाल किए गए कीटनाशकों के अवशेष तय सीमा से अधिक पाए गए। इसके अलावा जांच में 11 भारी धातुओं और तीन खनिजों की भी जांच की गई।
CPCB Report: कहां से आ रहा है लेड?
कमिटी ने नेलमंगला, चिक्कबल्लापुर और कोलार के खेतों से 26 मिट्टी के सैंपल भी लिए। जांच में पाया गया कि कोलार और चिक्कबल्लापुर की मिट्टी में लेड की मात्रा नेलमंगला से अधिक थी। ग्राउंडवाटर और ट्रीटेड वेस्टवाटर के सैंपलों में भी जिंक, आयरन, मैंगनीज, निकल और क्रोमियम की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई। यह समस्या पहली बार 2013 में एक न्यूज रिपोर्ट में सामने आई थी जिसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्वतः संज्ञान लेते हुए CPCB को जांच का निर्देश दिया था।
CPCB Report: क्या करें आम नागरिक?
विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित सब्जी खाने वालों को सतर्क रहना चाहिए। सब्जियों को अच्छी तरह धोकर और जहां संभव हो छिलका उतारकर खाएं। CPCB की जॉइंट कमिटी ने सिफारिश की है कि सब्जियों में लेड के संभावित स्रोतों की और गहराई से जांच की जाए और सख्त कार्रवाई की जाए। यह रिपोर्ट खाद्य सुरक्षा तंत्र और कृषि निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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