प्रधानमंत्री मोदी ने किया गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: मेरठ से प्रयागराज की दूरी 6 घंटे में, 594 किमी लंबे 6-लेन एक्सप्रेसवे पर टोल दरें जारी, फास्टैग अनिवार्य
मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन, यात्रा समय 6 घंटे रह जाएगा। जानें टोल दरें, फास्टैग नियम और तकनीकी विशेषताएं।
Ganga Expressway Inauguration: उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे में एक नया अध्याय जोड़ते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कर दिया है। लगभग 36,230 करोड़ रुपये की विशाल लागत से निर्मित यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज के बीच की दूरी और समय को क्रांतिकारी तरीके से कम कर देगा। इस मार्ग के जरिए अब 10 से 12 घंटे की कष्टदायक यात्रा मात्र 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे 12 महत्वपूर्ण जिलों को सीधे प्रयागराज से जोड़ता है। यह 6 लेन का ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे है, जिसे भविष्य की जरूरतों को देखते हुए 8 लेन तक विस्तारित करने का प्रावधान भी रखा गया है।
Ganga Expressway Inauguration: टोल टैक्स की विस्तृत दरें और फास्टैग की अनिवार्यता
गंगा एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने वाले वाहनों के लिए उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईआईडीए) ने श्रेणीवार टोल दरें निर्धारित की हैं। यदि आप मेरठ से प्रयागराज तक की पूरी 594 किमी की यात्रा करते हैं, तो दोपहिया वाहनों को 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से कुल 760 रुपये देने होंगे। कार और हल्के वाहनों के लिए यह दर 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर है, जिसके अनुसार कुल टोल 1515 रुपये बैठता है। हल्के वाणिज्यिक वाहनों (LMV) के लिए 2405 रुपये, जबकि भारी बस और ट्रकों को 4870 रुपये का भुगतान करना होगा। मल्टी एक्सल और विशालकाय मशीनी वाहनों के लिए टोल की राशि 7485 रुपये से लेकर 9560 रुपये तक तय की गई है। यात्रियों को यह ध्यान रखना होगा कि यहाँ केवल नियमित फास्टैग के माध्यम से ही भुगतान स्वीकार्य होगा, किसी भी प्रकार का एनुअल पास यहाँ मान्य नहीं है।
Ganga Expressway Inauguration: तकनीकी विशेषताएं और आर्थिक विकास की नई दिशा
गंगा एक्सप्रेसवे को आधुनिक इंजीनियरिंग के बेहतरीन उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। 120 किमी प्रति घंटे की अधिकतम गति सीमा के साथ डिजाइन किया गया यह एक्सप्रेसवे यातायात की दक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करता है। ग्रीनफील्ड तकनीक पर आधारित होने के कारण इसे पूरी तरह से नए मार्ग पर विकसित किया गया है, जिससे मौजूदा सड़कों पर दबाव कम होगा। यह एक्सप्रेसवे न केवल औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को गति देगा, बल्कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे अन्य प्रमुख मार्गों से जुड़कर उत्तर प्रदेश के परिवहन ढांचे को एक वैश्विक पहचान दिलाएगा। इससे क्षेत्रीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और कृषि प्रधान क्षेत्रों को बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच प्राप्त होगी।
Ganga Expressway Inauguration: सुरक्षा मानक और भविष्य की योजनाएं
सुरक्षा के दृष्टिकोण से गंगा एक्सप्रेसवे पर सभी आधुनिक प्रणालियां स्थापित की गई हैं। इसमें चौबीसों घंटे निगरानी के लिए सीसीटीवी नेटवर्क, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं और दुर्घटना रोकथाम प्रणालियां शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की यह परियोजना अन्य राज्यों के लिए भी बुनियादी ढांचे के विकास का एक मॉडल पेश करती है। जिस प्रकार यह मार्ग औद्योगिक क्षेत्रों, शिक्षण संस्थानों और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ता है, उससे राज्य के समग्र आर्थिक विकास में तेजी आने की पूर्ण संभावना है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपने फास्टैग को पर्याप्त बैलेंस के साथ रिचार्ज रखें ताकि टोल प्लाजा पर उन्हें किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
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