PCOS India: PCOS और PCOD के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जो महिलाओं की प्रजनन क्षमता और माँ बनने के सपने को कर रहे हैं खतरे में, जानिए लक्षण, कारण और बचाव के तरीके
भारत में महिलाओं में PCOS और PCOD के बढ़ते मामले इनफर्टिलिटी का बड़ा खतरा, स्वामी रामदेव ने सुझाया योग और आयुर्वेद
PCOS India: भारत में महिलाओं के बीच पीसीओएस (PCOS) और पीसीओडी (PCOD) के मामले खतरनाक स्तर पर बढ़ रहे हैं, जो भविष्य में ‘इनफर्टिलिटी’ (बांझपन) की एक प्रमुख वजह बनते जा रहे हैं। अनियमित पीरियड्स, हॉर्मोनल असंतुलन, तेजी से बढ़ता वजन और मानसिक तनाव इसके मुख्य कारक हैं। योग गुरु स्वामी रामदेव ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए योग, प्राणायाम और आयुर्वेदिक जीवनशैली को इस समस्या से बचाव का सबसे कारगर और प्राकृतिक उपाय बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते सही जांच और जीवनशैली में बदलाव से इस बीमारी को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।
हर महिला का माँ बनने का सपना आज के दौर में लाखों परिवारों के लिए एक चुनौती बनता जा रहा है। देश में प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़ी इन हॉर्मोनल बीमारियों का तेजी से फैलना एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर इशारा कर रहा है।
PCOS India: देश में पीसीओएस और पीसीओडी की स्थिति कितनी गंभीर है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में प्रजनन आयु (Reproductive Age) की एक बहुत बड़ी आबादी पीसीओएस यानी ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ और पीसीओडी यानी ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजीज’ से जूझ रही है। यह आंकड़ा हर साल डराने वाली गति से बढ़ रहा है। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ अब ग्रामीण इलाकों में भी यह समस्या अपनी जड़ें जमा रही है। चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि आधुनिक युग का खराब खानपान, शारीरिक सक्रियता में कमी, बढ़ता प्रदूषण और हर वक्त का मानसिक तनाव इस बीमारी को बढ़ावा देने वाले प्राथमिक कारक हैं।
PCOS India: पीसीओएस और पीसीओडी क्या हैं और इनमें क्या फर्क है
अक्सर लोग इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, लेकिन इनमें तकनीकी अंतर है। पीसीओडी (PCOD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें अंडाशय (Ovary) में अपरिपक्व अंडे जमा होने लगते हैं, जो समय के साथ सिस्ट का रूप ले लेते हैं। इससे हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ता है और पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। वहीं, पीसीओएस (PCOS) एक अधिक जटिल हॉर्मोनल विकार है, जिसमें शरीर में पुरुष हॉर्मोन ‘एण्ड्रोजन’ का स्तर सामान्य से बहुत अधिक हो जाता है। स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पीसीओएस में गर्भधारण न कर पाने का खतरा पीसीओडी की तुलना में कहीं अधिक होता है।
PCOS India: इनफर्टिलिटी से इसका क्या संबंध है
जब शरीर में ओव्यूलेशन (अंडा बनने की प्रक्रिया) नियमित रूप से नहीं होती, तो गर्भधारण की संभावना प्राकृतिक रूप से न्यूनतम हो जाती है। पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में ओव्यूलेशन की प्रक्रिया या तो रुक जाती है या बहुत अनियमित हो जाती है, जो इनफर्टिलिटी का मुख्य कारण बनती है। हालांकि, प्रजनन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि समय पर बीमारी का पता चल जाए और सही उपचार शुरू हो, तो अधिकतर महिलाएं सामान्य रूप से गर्भधारण करने में सक्षम होती हैं। समस्या तब जटिल होती है जब इन लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता है।
PCOS India: आधुनिक जीवनशैली किस तरह बढ़ा रही है यह खतरा
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में करियर का दबाव, देर से शादी और परिवार नियोजन में देरी जैसी स्थितियां इन बीमारियों को पनपने का मौका देती हैं। इसके अलावा, प्रोसेस्ड फूड और जंक फूड का अत्यधिक सेवन हॉर्मोनल संतुलन को पूरी तरह बिगाड़ देता है। रात को देर तक जागना और नींद की कमी शरीर के प्राकृतिक चक्र (Circadian Rhythm) को प्रभावित करती है। साथ ही, प्लास्टिक के बर्तनों में मौजूद हानिकारक रसायन और बढ़ता पर्यावरणीय प्रदूषण भी महिलाओं के हॉर्मोनल तंत्र पर नकारात्मक प्रहार कर रहे हैं।
PCOS India: स्वामी रामदेव ने योग और आयुर्वेद को क्यों बताया सबसे कारगर उपाय
योग गुरु स्वामी रामदेव, जो दशकों से प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा दे रहे हैं, उनका मानना है कि योग और प्राणायाम हॉर्मोनल असंतुलन को जड़ से ठीक करने की शक्ति रखते हैं। उनके अनुसार, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी और विशेषकर कपालभाति जैसे प्राणायाम शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाते हैं और तनाव को कम करते हैं, जिससे हॉर्मोनल ग्रंथियां दोबारा सक्रिय हो जाती हैं। इसके साथ ही, आयुर्वेद की औषधियां और सात्विक आहार इस समस्या के उपचार में सहायक सिद्ध होते हैं, जिनके कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होते।
PCOS India: पीसीओएस के लक्षण क्या होते हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
अनियमित मासिक धर्म या पीरियड्स का कई महीनों तक न आना पीसीओएस का सबसे प्रमुख लक्षण है। इसके अलावा, अचानक बिना कारण वजन बढ़ना, चेहरे और ठुड्डी पर अनचाहे सख्त बाल आना (Hirsutism), गंभीर मुंहासे और गर्दन या बगल की त्वचा का काला पड़ना भी इस बीमारी के स्पष्ट संकेत हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि इनमें से कोई भी दो-तीन लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। आज अल्ट्रासाउंड और हॉर्मोन प्रोफाइल टेस्ट के जरिए इसका सटीक निदान संभव है।
PCOS India: योग और जीवनशैली में बदलाव से कैसे मिलेगी राहत
नियमित योगाभ्यास शरीर में ‘इंसुलिन प्रतिरोध’ (Insulin Resistance) को कम करता है, जो पीसीओएस की मुख्य जड़ है। प्रतिदिन 30 से 45 मिनट का व्यायाम और समय पर सोने की आदत हॉर्मोनल स्वास्थ्य में चमत्कारिक सुधार ला सकती है। खानपान में बदलाव के तहत विशेषज्ञों का सुझाव है कि कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाला भोजन, जैसे हरी सब्जियां, साबुत अनाज और ताजे फल शामिल करें। मैदा, चीनी, अधिक नमक और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज करना इस बीमारी से लड़ने का पहला कदम है।
निष्कर्ष
पीसीओएस और पीसीओडी आज के युग की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक हैं। इन्हें मामूली समस्या मानकर टालना भविष्य में मातृत्व के सुख में बाधा बन सकता है। जागरूकता, नियमित योग, संतुलित पोषण और समय पर डॉक्टरी परामर्श ही इस समस्या का एकमात्र समाधान हैं। किसी भी प्रकार के संकोच को छोड़कर अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, क्योंकि एक स्वस्थ शरीर ही एक खुशहाल परिवार की नींव है।
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