Patna ATM Fraud: पटना में 3 करोड़ रुपये की ATM ठगी का खुलासा, 82 कार्ड के साथ तीन शातिर गिरफ्तार

पटना में ATM कार्ड बदलकर ठगी करने के आरोप में तीन गिरफ्तार, पुलिस ने 82 कार्ड और SUV बरामद की।

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Patna ATM Fraud: बिहार की राजधानी पटना में एटीएम कार्ड बदलकर बैंक खातों में सेंध लगाने वाले एक संगठित और अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पटना के श्रीकृष्णापुरी थाना पुलिस ने सुनियोजित कार्रवाई करते हुए गिरोह के तीन प्रमुख सदस्यों को दबोचने में बड़ी सफलता हासिल की है। यह शातिर गिरोह विशेष रूप से बिना सुरक्षा गार्ड वाले एटीएम बूथों को अपना ठिकाना बनाता था और मदद के बहाने सीधे-सादे उपभोक्ताओं का कार्ड बदलकर कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये पार कर देता था। पुलिस ने पकड़े गए आरोपियों के पास से विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों के 82 एटीएम व डेबिट कार्ड, तीन स्मार्टफोन और ठगी की वारदातों में प्रयुक्त होने वाली एक लग्जरी एक्सयूवी 500 कार बरामद की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार यह गिरोह अब तक तीन करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दे चुका है।

Patna ATM Fraud: तीन करोड़ रुपये की ठगी और उच्चाधिकारियों के परिजनों को निशाना बनाने का मामला

गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुधाकर उर्फ प्रियांश, प्रशांत कुमार और राकेश कुमार के रूप में की गई है। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि तीनों आरोपी स्नातक पास हैं और तकनीकी जानकारी का गलत इस्तेमाल कर लंबे समय से साइबर व एटीएम फ्रॉड का संगठित सिंडिकेट चला रहे थे। इस गिरोह की सक्रियता इतनी बढ़ गई थी कि आम नागरिकों के साथ-साथ पुलिस प्रशिक्षण केंद्र में पदस्थापित एक पुलिस अधीक्षक (SP) के करीबी रिश्तेदार भी इनके शिकार बन गए थे।

अधिकारी के रिश्तेदार का एटीएम कार्ड बदलकर खाते से अवैध निकासी किए जाने के बाद पुलिस ने इसे बेहद गंभीरता से लिया। श्रीकृष्णापुरी थाना पुलिस ने इलाके के दर्जनों एटीएम बूथों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर घेराबंदी कर तीनों को रंगे हाथों धर दबोचा। पुलिस का मानना है कि वित्तीय रिकॉर्ड्स और बैंक लेन-देन की विस्तृत पड़ताल के बाद पीड़ितों की संख्या और ठगी की कुल राशि में और भी बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।

मदद के बहाने कार्ड बदलने और पिन उड़ाने की खौफनाक कार्यप्रणाली

पुलिस जांच में गिरोह द्वारा ठगी के लिए अपनाए जाने वाले बेहद चालाकी भरे तरीके का खुलासा हुआ है। गिरोह के सदस्य अक्सर व्यस्त बाजार क्षेत्रों के ऐसे एटीएम कियोस्क चुनते थे जहां कोई सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं होता था। जब कोई वरिष्ठ नागरिक, महिला या तकनीकी रूप से कम जानकार व्यक्ति पैसे निकालने पहुंचता, तो गिरोह का एक सदस्य मददगार बनकर उसके पास खड़ा हो जाता था।

वे मशीन में तकनीकी खराबी का झांसा देते थे या कई बार मशीन के स्लॉट में चुपके से ब्लेड या चिप फंसा देते थे जिससे कार्ड अंदर ही अटक जाता था। जब पीड़ित व्यक्ति घबराता, तो आरोपी मदद के बहाने उसका गुप्त पिन कोड देख लेते थे और पलक झपकते ही असली कार्ड को अपनी जेब में मौजूद उसी बैंक के दूसरे ब्लॉक या निष्क्रिय कार्ड से बदल देते थे। ग्राहक को यह कहकर लौटा दिया जाता था कि मशीन खराब है और कार्ड बाद में निकलेगा, जबकि ग्राहक के हटते ही गिरोह के दूसरे सदस्य नजदीकी एटीएम से जाकर खाते की अधिकतम निकासी सीमा तक नकदी उड़ा लेते थे या ऑनलाइन शॉपिंग कर डालते थे।

बिहार के कई जिलों से लेकर झारखंड तक फैला था अंतरराज्यीय नेटवर्क

पुलिसिया जांच में यह भी साफ हुआ है कि इस गिरोह का जाल केवल पटना के चुनिंदा इलाकों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक बहु-राज्यीय नेटवर्क के तहत काम कर रहा था। पटना के श्रीकृष्णापुरी, पाटलिपुत्र, कोतवाली, कंकड़बाग और बुद्धा कॉलोनी जैसे प्रमुख इलाकों के अलावा आरोपियों ने गया, नवादा और सीतामढ़ी के विभिन्न इलाकों में भी दर्जनों वारदातों को अंजाम दिया था।

इसके साथ ही गिरोह की गतिविधियों के तार पड़ोसी राज्य झारखंड के रांची, जमशेदपुर और पूर्वी व पश्चिमी सिंहभूम तक फैले मिले हैं। पुलिस द्वारा जब्त की गई डायरियों और मोबाइल फोन में दर्ज सैकड़ों खातों और कार्ड नंबरों से यह संकेत मिला है कि गिरोह ने अंतरराज्यीय स्तर पर एक समानांतर नेटवर्क बना रखा था। पुलिस अब झारखंड पुलिस के साथ संपर्क स्थापित कर अन्य फरार सहयोगियों और शरणदाताओं की धरपकड़ के लिए दबिश दे रही है।

मुख्य सरगना सुधाकर पर पहले से 17 आपराधिक मुकदमे दर्ज

पुलिस अधिकारियों के अनुसार पकड़े गए आरोपियों का आपराधिक इतिहास काफी पुराना और गंभीर है। गिरोह के मुख्य सरगना सुधाकर उर्फ प्रियांश के विरुद्ध बिहार के अलग-अलग थानों में धोखाधड़ी, चोरी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं में पहले से ही 17 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। वह पहले भी कई बार जेल जा चुका है, लेकिन जमानत पर बाहर आते ही नए साथियों को जोड़कर फिर से वही गोरखधंधा शुरू कर देता था।

वहीं उसके सहयोगी प्रशांत कुमार और राकेश कुमार के खिलाफ भी पूर्व से दो-दो आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस अब इस बात की गहनता से वित्तीय जांच कर रही है कि ठगी से जुटाई गई करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति को आरोपियों ने कहां खपाया है और क्या इन पैसों से अचल संपत्तियां या बेनामी जमीनें खरीदी गई हैं। संबंधित जांच अधिकारी आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज कराने की कानूनी प्रक्रिया में जुट गए हैं।

Patna ATM Fraud: एटीएम उपयोग के दौरान आम नागरिकों के लिए अनिवार्य सुरक्षा सावधानियां

इस बड़े खुलासे के बाद बैंकिंग विशेषज्ञों और पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से एटीएम का इस्तेमाल करते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की अपील की है। किसी भी परिस्थिति में किसी अपरिचित व्यक्ति को एटीएम केबिन के अंदर न आने दें और अपना चार अंकों का गोपनीय पिन दर्ज करते समय कीपैड को हमेशा अपने दूसरे हाथ से ढक कर रखें। यदि कार्ड मशीन के स्लॉट में फंस जाता है या कोई तकनीकी समस्या आती है, तो किसी अजनबी की सलाह लेने के बजाय तुरंत अपने बैंक के आधिकारिक टोल-फ्री नंबर पर कॉल कर कार्ड को तत्काल ब्लॉक करवाएं।

इसके साथ ही बैंक खाते में अपना मोबाइल नंबर हमेशा अपडेट रखें ताकि पैसे कटते ही तत्काल एसएमएस अलर्ट मिल सके। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनधिकृत लेन-देन का आभास होते ही बिना समय गंवाए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर शिकायत दर्ज कराएं और नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें ताकि त्वरित वित्तीय नाकेबंदी कर पैसे को होल्ड कराया जा सके।

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