Parenting Tips: स्कूल में रैगिंग और बुलिंग का बढ़ता खतरा, जानिए वे 5 जरूरी बातें जो हर पेरेंट्स को अपने बच्चों को समझानी चाहिए
Parenting Tips: स्कूल में रैगिंग और बुलिंग का बढ़ता खतरा, जानिए वे 5 जरूरी बातें जो हर पेरेंट्स को अपने बच्चों को समझानी चाहिए
Parenting Tips: रैगिंग और बुलिंग के बदलते रूप को समझें
बच्चों को सिखाएं ये पांच बेहद जरूरी बातें
- किसी भी दबाव या धमकी में न आएं: बच्चे को यह स्पष्ट रूप से समझा देना चाहिए कि उसे किसी भी सीनियर या साथी छात्र के अनुचित दबाव में आने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि कोई उसे तंग करता है, तो उसे तुरंत इसकी शिकायत अपने स्कूल के शिक्षकों से करनी चाहिए और घर आकर माता-पिता को इसकी पूरी जानकारी देनी चाहिए।
- माता-पिता से कुछ भी न छुपाएं: पेरेंट्स को हमेशा अपने बच्चों के साथ एक दोस्त की तरह पेश आना चाहिए ताकि बच्चा बिना किसी डर या झिझक के अपनी हर अच्छी-बुरी बात शेयर कर सके। जब बच्चों को यह पूरा यकीन होगा कि उनके मम्मी-पापा उनकी बात को समझेंगे और उनकी रक्षा करेंगे, तो वे कभी भी किसी बात को अपने तक सीमित नहीं रखेंगे।
- घटना की पूरी जानकारी सुरक्षित रखें: यदि दुर्भाग्यवश बच्चा किसी ऐसी घटना का शिकार हो जाता है, तो उसे यह सिखाएं कि वह पूरी बात को याद रखे। किसने, कब और किस तरह से परेशान किया, इसकी सटीक जानकारी होना जरूरी है। अगर किसी को सोशल मीडिया या चैट्स के जरिए धमकाया जा रहा है, तो उस चैट या मैसेज को डिलीट करने की बजाय सुरक्षित रखना चाहिए।
- असहज और गलत काम से इनकार: बच्चों को कड़ाई से समझाएं कि वे किसी के भी दबाव में आकर कोई भी ऐसा काम न करें जो उन्हें असहज महसूस कराए। यदि कोई उनकी कोई फर्जी तस्वीर या वीडियो बनाकर उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है, तो उससे डरने के बजाय तुरंत अपने शिक्षकों या माता-पिता को बताएं।
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मजाक और रैगिंग का फर्क समझें: कई बार बच्चे दूसरों की हरकतों को सिर्फ एक मजाक समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यदि किसी हरकत से मन में डर, शर्म या मानसिक पीड़ा पैदा हो रही है, तो वह मजाक नहीं बल्कि रैगिंग है। बच्चे को इन दोनों के बीच का बारीक फर्क अच्छी तरह समझाना बहुत आवश्यक है।
Parenting Tips: अचानक बदले बर्ताव पर रखें पैनी नजर
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