Pakistan Petrol Price Hike: पाकिस्तान में पेट्रोल ₹1000 प्रति लीटर पहुंचने की आशंका, पेट्रोलियम मंत्री ने दी चेतावनी
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक बोले- ईंधन की कमी हुई तो कीमत 1000 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक जा सकती है
Pakistan Petrol Price Hike: गंभीर आर्थिक तंगहाली और चरम मुद्रास्फीति से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान में एक और भयानक ऊर्जा संकट की आहट सुनाई दे रही है। पाकिस्तान के संघीय पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने रविवार को लाहौर में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए एक चौंकाने वाला और भयावह बयान जारी किया है। उन्होंने खुले तौर पर चेतावनी दी कि यदि देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होती है और वास्तविक कमी उत्पन्न होती है, तो पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 1,000 रुपये प्रति लीटर तक के ऐतिहासिक स्तर को छू सकती हैं। मंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि आपूर्ति तंत्र के पूरी तरह चरमराने पर ऐसी नौबत भी आ सकती है कि उपभोक्ता किसी भी कीमत पर ईंधन खरीदने में असमर्थ हो जाएं।
हालांकि, पेट्रोलियम मंत्री ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया कि वर्तमान समय में देश के पास सितंबर और अक्टूबर माह की आवश्यकताओं के अनुरूप ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता और कार्गो की अग्रिम योजना मौजूद है। इसके बावजूद, पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में फिर से गहराए भू-राजनीतिक तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न अवरोधों और वैश्विक तेल बाजार में जारी उथल-पुथल ने पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा को अत्यंत संवेदनशील मुहाने पर ला खड़ा किया है। मंत्री के इस बयान के सार्वजनिक होते ही पूरे पाकिस्तान में घबराहट का माहौल बन गया है और पहले से ही महंगे ईंधन का दंश झेल रही अवाम के होश उड़ गए हैं।
Pakistan Petrol Price Hike: वैश्विक बाजार में 80% उछला कच्चा तेल
पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के अनुसार, पाकिस्तान में मंडरा रहे इस ऊर्जा संकट का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से है। मध्य पूर्व में जून माह के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हुआ नाजुक संघर्ष-विराम समझौता टूटने के बाद क्षेत्र में युद्ध के बादल फिर से गहरा गए हैं। इसके साथ ही यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे और ऊर्जा पाइपलाइनों पर किए जा रहे हमलों ने आपूर्ति मार्गों को गंभीर रूप से बाधित किया है। पाकिस्तान के लिए सामरिक रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति गलियारा यानी होर्मुज जलडमरूमध्य व्यावहारिक रूप से अनिश्चितताओं में घिर गया है।
इन सभी भू-राजनीतिक अवरोधों के चलते 1 मार्च 2026 से लेकर अब तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 80 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया जा चुका है। पेट्रोलियम मंत्री ने जोर देकर कहा कि सऊदी अरब पर होने वाले हमलों को पाकिस्तान किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं कर सकता। चूंकि पाकिस्तान अपनी घरेलू पेट्रोलियम खपत का लगभग 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा समुद्री आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए वैश्विक बाजार की दरों में होने वाली मामूली वृद्धि का सीधा और घातक असर देश के विदेशी मुद्रा भंडार और स्थानीय खुदरा कीमतों पर पड़ता है।
मार्च से अब तक 50% बढ़ीं कीमतें: पाकिस्तान में पेट्रोल ₹389 और डीजल ₹424 के पार
पाकिस्तान में पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य निर्धारण में अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव, वैश्विक प्लैट्स दरें और रिफाइनरी प्रीमियम सीधे प्रभावी होते हैं। हालिया पाक्षिक मूल्य संशोधन के उपरांत देश में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 389.14 रुपये प्रति लीटर और उच्च-गति वाले डीजल (HSD) की दर 424.04 रुपये प्रति लीटर के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुकी है।
पेट्रोलियम मंत्री ने सरकार का बचाव करते हुए तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों में 80 प्रतिशत का उछाल आया है, किंतु प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने एक जिम्मेदार प्रशासन की भांति व्यवहार करते हुए घरेलू उपभोक्ताओं पर केवल 50 प्रतिशत मूल्य वृद्धि का ही भार डाला है। शेष घाटे को राज्य के संसाधनों के जरिए समायोजित किया जा रहा है। किंतु उन्होंने दो-टूक शब्दों में चेताया कि यदि अंतरराष्ट्रीय संकट के चलते जहाजों की आवाजाही रुकी और भौतिक रूप से आपूर्ति में अंतर आया, तो मूल्य नियंत्रण के सरकारी प्रयास धरे के धरे रह जाएंगे और ईंधन की कीमतें एक हजार रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाएंगी।
प्रधानमंत्री की लक्षित ईंधन राहत योजना: 800cc गाड़ियों और रिक्शों को ₹100 की छूट
ईंधन की आसमान छूती कीमतों से आम जनता में पनप रहे तीव्र आक्रोश को शांत करने के लिए प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने लक्षित ईंधन राहत योजना को लागू किया है। इस कल्याणकारी तंत्र के तहत समाज के कमजोर वर्गों—विशेषकर मोटरसाइकिल, तिपहिया ऑटो रिक्शा, चिंगची रिक्शा चालकों और 800 सीसी तक की छोटी कारों के पंजीकृत स्वामियों—को प्रति लीटर पेट्रोल पर 100 रुपये की सीधी छूट दी जा रही है।
सरकार ने वितरण व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए प्रति टोकन 5 लीटर की पूर्व निर्धारित सीमा को भी समाप्त कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार, इस राहत व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय स्तर पर 30 से 40 अरब रुपये के बजटीय संसाधन समाज के कमजोर तबकों की ओर पुनर्निर्देशित किए गए हैं। देश भर के 7,400 अधिकृत पेट्रोल पंपों के नेटवर्क के जरिए 20 लाख से अधिक पंजीकृत नागरिकों को लाभान्वित किया जा चुका है और अकेले एक दिन में 180 मिलियन (18 करोड़) रुपये के फ्यूल टोकन जारी किए गए हैं। हालांकि आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि खाली पड़े सरकारी खजाने और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सख्त शर्तों के बीच इतने बड़े पैमाने पर सब्सिडी लंबे समय तक जारी रखना असंभव होगा।
वैकल्पिक स्रोतों की तलाश और सर्दियों के गैस संकट से निपटने की तैयारी
खाड़ी क्षेत्र के पारंपरिक सप्लायर्स पर मंडराते युद्ध के खतरे को देखते हुए पाकिस्तान अब गैर-खाड़ी वैकल्पिक मार्गों की तलाश में जुट गया है। इसमें संयुक्त राज्य अमेरिका, पश्चिम अफ्रीकी देशों और लीबिया से कच्चे तेल के आयात के अनुबंध करना अथवा ओमान के सोहार बंदरगाह के रास्ते सुरक्षित शिपमेंट मंगाना शामिल है। इसके साथ ही घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से देश के भीतर तेल कुओं की ड्रिलिंग और अन्वेषण कार्य में तेजी लाई गई है, जिसकी पहली खोज अक्टूबर माह के भीतर सामने आने की उम्मीद जताई गई है।
सर्दियों के आगामी मौसम में देश भर में गहराने वाले प्राकृतिक गैस संकट पर बोलते हुए पेट्रोलियम मंत्री ने दावा किया कि सरकार एलएनजी (LNG) कार्गो का कड़ा प्रबंधन कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि चाहे सरकार को 3 मिलियन डॉलर के स्थान पर 100 मिलियन डॉलर की महंगी तरलीकृत प्राकृतिक गैस आयात करनी पड़े, किंतु घरेलू उपभोक्ताओं को सर्दियों में चूल्हा जलाने से वंचित नहीं होने दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने जमात-ए-इस्लामी और अन्य विपक्षी दलों से आग्रह किया कि वे जनता की बुनियादी समस्याओं और वैश्विक संकट का राजनीतिक शोषण करने से परहेज करें।
पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था पर चौतरफा मार और जनमानस में दहशत
पेट्रोल की कीमतें 1,000 रुपये प्रति लीटर तक जाने की सरकारी आशंका ने पाकिस्तानी अवाम की कमर तोड़ कर रख दी है। पाकिस्तान में ईंधन केवल परिवहन का साधन नहीं, बल्कि कृषि में ट्यूबवेल चलाने, बिजली उत्पादन के लिए डीजल जनरेटर संचालित करने और माल ढुलाई की रीढ़ है। यदि पेट्रोल और डीजल की दरों में और तेजी आती है, तो इससे खाद्यान्न, दूध, सब्जियों और रोजमर्रा की वस्तुओं की माल ढुलाई लागत कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे देश में हाइपर-इन्फ्लेशन (अति-मुद्रास्फीति) की स्थिति पैदा हो जाएगी।
लाहौर, कराची, रावलपिंडी और पेशावर जैसे बड़े शहरों में रिक्शा चालकों, डिलीवरी ब्वॉयज और छोटे वेतनभोगी कर्मचारियों का कहना है कि वर्तमान 389 रुपये की दर पर भी उनकी दैनिक आय का साठ प्रतिशत हिस्सा पेट्रोल में खर्च हो जाता है। ऐसे में यदि मंत्री की चेतावनी सच साबित हुई, तो देश का संपूर्ण सार्वजनिक परिवहन और लघु उद्योग ठप हो जाएगा।
Pakistan Petrol Price Hike: निष्कर्ष
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक द्वारा दी गई 1,000 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल की चेतावनी केवल एक काल्पनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि आयात-निर्भर और विदेशी मुद्रा संकट से घिरे देश की चरम लाचारी का दस्तावेज है। मध्य पूर्व में जारी अशांति, सऊदी तेल बुनियादी ढांचे पर हमले और होर्मुज मार्ग के संकट ने साबित कर दिया है कि घरेलू राहत पैकेज और टोकन वितरण व्यवस्थाएं इस वैश्विक सुनामी के सामने नाकाफी हैं। आने वाले शीतकालीन महीने पाकिस्तान के लिए ऊर्जा, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता के मोर्चे पर सबसे कठिन परीक्षा साबित होने वाले हैं।
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