Pakistan Gas Crisis: सर्दियों से पहले पाकिस्तान में गहराया गैस संकट, महंगी LPG के चलते लकड़ी-कोयले पर खाना बनाने को मजबूर लोग
पाकिस्तान के रावलपिंडी समेत कई इलाकों में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित होने और LPG की कीमतें बढ़ने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
Pakistan Gas Crisis: पाकिस्तान में कड़ाके की सर्दी की औपचारिक दस्तक से पहले ही ऊर्जा और गैस संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। राजधानी इस्लामाबाद के जुड़वां शहर रावलपिंडी सहित पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा के विस्तृत इलाकों में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति में भारी कटौती और तरल पेट्रोलियम गैस (LPG) के दामों में अनियंत्रित उछाल ने आम नागरिकों की रसोई का बजट पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि शहरी क्षेत्रों के मध्यमवर्गीय और निम्न-आय वर्ग के परिवारों को आधुनिक गैस चूल्हों को छोड़कर लकड़ी, कोयला, पुराने फर्नीचर के टुकड़ों और आरा मिलों के लकड़ी के बुरादे (सॉ-डस्ट) पर खाना पकाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। आने वाले हफ्तों में पारा और नीचे लुढ़कने के साथ ही घरेलू हीटिंग और ऊर्जा की मांग में होने वाली संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए यह मानवीय और आर्थिक संकट और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।
Pakistan Gas Crisis: दिन में महज छह घंटे पाइपलाइन गैस, रसोई का संचालन हुआ दूभर
रावलपिंडी और आसपास के घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्रों में पाइपलाइन के जरिए मिलने वाली प्राकृतिक गैस की आपूर्ति दिन में बमुश्किल पांच से छह घंटे ही सुनिश्चित हो पा रही है। सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइंस लिमिटेड (SNGPL) के नेटवर्क में गैस का दबाव इतना कम रहता है कि पानी गर्म करना तो दूर, चाय बनाना भी एक लंबी चुनौती बन गया है।
प्राकृतिक गैस का दबाव शून्य होने के कारण सुबह के नाश्ते और रात के खाने के समय परिवारों को भूखे पेट रहने या बाजार से महंगे बने-बनाए तंदूरी भोजन पर निर्भर होना पड़ रहा है। आपूर्ति की इस अनिश्चितता ने घरेलू महिलाओं के दैनिक कार्यकलापों को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे गैस संकट के खिलाफ विभिन्न नागरिक मंचों पर व्यापक जनआक्रोश पनप रहा है।
एलपीजी सिलिंडर और रिफिलिंग की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी
पाइपलाइन गैस की विफलता के बाद वैकल्पिक ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलिंडर भी आम जनता की पहुंच से बाहर हो चुके हैं। स्थानीय बाजारों में नए घरेलू गैस सिलिंडर की कीमत, जो पहले लगभग 10,000 पाकिस्तानी रुपये थी, अब बढ़कर 13,500 से 14,000 पाकिस्तानी रुपये के पार पहुंच गई है। वहीं 11.8 किलोग्राम वाले घरेलू सिलिंडर को दोबारा भरवाने (रिफिल) का वास्तविक खर्च 3,000 रुपये से उछलकर सीधे 5,000 रुपये तक जा पहुंचा है।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और छोटे भोजनालयों के लिए उपयोग होने वाले कमर्शियल सिलिंडर की रिफिलिंग के लिए व्यापारियों को लगभग 25,000 पाकिस्तानी रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं। ईंधन की इस बेलगाम लागत ने ढाबों, चाय की दुकानों और छोटे खाद्य विक्रेताओं की परिचालन लागत को कई गुना बढ़ा दिया है, जिसका सीधा भार अंतिम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त महंगाई के रूप में पड़ रहा है।
लकड़ी और कोयले की मांग में उछाल, बुरादा भी हुआ महंगा
रसोई गैस की अनुपलब्धता और एलपीजी की आसमान छूती कीमतों के चलते रावलपिंडी के बाजारों में जलाऊ लकड़ी और कोयले जैसे सदियों पुराने पारंपरिक ईंधनों की मांग में अप्रत्याशित तेजी देखी जा रही है। मांग में इस अचानक वृद्धि का लाभ उठाते हुए स्थानीय व्यापारियों ने लकड़ी और कोयले के दामों में भी भारी इजाफा कर दिया है।
सूखी जलाऊ लकड़ी वर्तमान में 1,500 से 1,800 पाकिस्तानी रुपये प्रति मन (लगभग 40 किलोग्राम) की दर से बेची जा रही है, जबकि सामान्य नमी वाली लकड़ी के भाव 1,300 से 1,400 रुपये प्रति मन दर्ज किए जा रहे हैं। यहां तक कि जो लकड़ी का बुरादा फर्नीचर कारखानों द्वारा पूर्व में अनुपयोगी कचरा समझकर सड़कों पर फेंक दिया जाता था, वह भी अब करीब 700 रुपये प्रति मन के भाव पर बिक रहा है। कारखानेदारों का कहना है कि लोग सुबह से ही फैक्ट्रियों के बाहर बुरादा और लकड़ी की कतरनें खरीदने के लिए कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं, जो यह साबित करता है कि जनता ऊर्जा के मामले में बुनियादी स्तर पर संघर्ष कर रही है।
वेतनभोगी वर्ग पर आर्थिक बोझ, घरेलू बजट असंतुलित
बढ़ते गैस संकट की सीधी मार देश के सीमित आय वाले सरकारी कर्मचारियों और वेतनभोगी तबके पर पड़ी है। ऑल-पाकिस्तान क्लर्क्स एसोसिएशन (APCA) के रावलपिंडी डिविजनल अध्यक्ष शहजाद मंजूर कियानी के अनुसार, गैस की अनिश्चितता और बाजार की मनमानी के चलते परिवारों का केवल रसोई ईंधन का मासिक खर्च 10,000 से 12,000 पाकिस्तानी रुपये तक बढ़ गया है।
मुद्रास्फीति और बिजली के भारी-भरकम बिलों के बीच अतिरिक्त ईंधन का यह खर्च आम कर्मचारियों की बचत को पूरी तरह समाप्त कर रहा है। कई परिवारों को अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य खर्चों में कटौती करके रसोई का चूल्हा जलाने के लिए पैसे जुटाने पड़ रहे हैं।
ओगरा की आधिकारिक अधिसूचना और खुले बाजार की कालाबाजारी
पाकिस्तान के तेल एवं गैस नियामक प्राधिकरण (OGRA) ने नवंबर 2026 के लिए एलपीजी की आधिकारिक उत्पादक कीमत बढ़ाकर 2,94,075 पाकिस्तानी रुपये प्रति टन अधिसूचित की है, जो अक्टूबर माह में 2,79,341 रुपये प्रति टन थी। इस आधिकारिक बढ़ोतरी के परिणामस्वरूप 11.8 किलोग्राम के घरेलू सिलिंडर का सरकारी मूल्य 173 रुपये की वृद्धि के साथ 3,470 पाकिस्तानी रुपये तय किया गया था।
किंतु सरकारी नियंत्रण और बाजार निगरानी तंत्र की पूर्ण विफलता के कारण खुले बाजार में यह आधिकारिक दर केवल कागजों तक सीमित रह गई है। जमीनी हकीकत यह है कि खुले बाजार में मुनाफाखोर एलपीजी को 600 से 630 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से ब्लैक में बेच रहे हैं, जबकि कुछ अधिकृत फ्रेंचाइजी पर भी यह 400 रुपये प्रति किलोग्राम से कम में उपलब्ध नहीं है। सरकारी मूल्य और खुदरा बाजार के बीच प्रति सिलिंडर 1,500 से 2,000 रुपये का भारी अंतर प्रशासनिक निष्क्रियता और जमाखोरों के गठजोड़ को उजागर करता है।
Pakistan Gas Crisis: आगामी कड़ाके की ठंड में और गहराएगा मानवीय संकट
दिसंबर और जनवरी के महीनों में जब उत्तरी और मध्य पाकिस्तान में तापमान जमाव बिंदु के करीब पहुंचेगा, तब हीटिंग और गीजर की आवश्यकता के चलते प्राकृतिक गैस की राष्ट्रीय मांग अपने चरम पर होगी। विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि संघीय सरकार ने तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के पर्याप्त कार्गो समय पर आयात नहीं किए और स्थानीय आपूर्ति प्रबंधन को दुरुस्त नहीं किया, तो यह संकट देश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों और ऊर्जा संयंत्रों को भी अपनी चपेट में ले लेगा।
वर्तमान परिस्थितियों में आम पाकिस्तानी परिवारों के सामने अपने दैनिक भोजन की व्यवस्था करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। यदि प्रशासन ने कालाबाजारी पर नकेल कसने और तय दरों पर पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कड़े कदम नहीं उठाए, तो आने वाले शीतकालीन महीनों में जनता की मुश्किलें असहनीय स्तर तक बढ़ सकती हैं।
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