Olympia Coffee House License Suspended: फूड स्टोरेज में यूरिनल, जांच में मिलीं कई गंभीर खामियां

मुंबई के 108 साल पुराने कॉफी हाउस में यूरिनल, कॉकरोच और गंदगी मिली

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Olympia Coffee House License Suspended: दक्षिण मुंबई के ऐतिहासिक और पॉश इलाके कोलाबा में स्थित दशकों पुराने मशहूर ‘ओलंपिया कॉफी हाउस’ (Olympia Coffee House) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और चिंताजनक मामला सामने आया है। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने व्यापक जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा नियमों के घोर उल्लंघन के चलते इस प्रतिष्ठित प्रतिष्ठान का फूड लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। विभाग द्वारा चलाए जा रहे ‘सेफ फूड सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के तहत मिली एक उपभोक्ता शिकायत के आधार पर जब खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के दल ने यहां औचक निरीक्षण किया, तो परिसर के भीतर स्वच्छता और सुरक्षा की जो तस्वीर सामने आई, उसने अधिकारियों को भी सन्न कर दिया।

जांच के दौरान सबसे घिनौनी और गंभीर लापरवाही यह पाई गई कि जिस हिस्से में खाद्य सामग्रियों का भंडारण यानी स्टोरेज किया जा रहा था, वहीं एक यूरिनल (मूत्रालय) मौजूद था। इसके अतिरिक्त मुख्य रसोई घर में जिंदा कॉकरोचों और मक्खियों का जमावड़ा, डीप फ्रीजर के भीतर सड़े हुए मांस के खून के अवशेष, फर्श पर सीधे रखी खाद्य सामग्री और कटे-फटे लकड़ी के चॉपिंग बोर्ड जैसी गंभीर अनियमिताएं दर्ज की गईं। जनस्वास्थ्य के लिए आसन्न खतरे को देखते हुए नियामक प्राधिकरण ने होटल प्रबंधन को भोजन बनाने, पकाने, संग्रह करने और परोसने की सभी गतिविधियों को अविलंब बंद करने का वैधानिक आदेश जारी किया है।

Olympia Coffee House License Suspended: ‘सेफ फूड सेफ महाराष्ट्र’ के तहत उपभोक्ता शिकायत पर हुई औचक छापेमारी

महाराष्ट्र एफडीए द्वारा राज्यभर में भोजनालयों, होटलों और रेस्तरांओं में शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘सेफ फूड सेफ महाराष्ट्र’ (Safe Food Safe Maharashtra) अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के अंतर्गत विभाग को कोलाबा स्थित ओलंपिया कॉफी हाउस में परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता और परिसर की गंदगी को लेकर एक नागरिक की ओर से आधिकारिक शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा निरीक्षकों की एक विशेष टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के भोजनालय परिसर पर छापा मारा।

निरीक्षण दल ने पाया कि वर्षों से चल रहे इस लोकप्रिय ठिकाने पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) 2006 के तहत निर्धारित बुनियादी स्वच्छता दिशा-निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। किसी भी व्यावसायिक खाद्य प्रतिष्ठान में कच्चे माल के सुरक्षित भंडारण से लेकर ग्राहकों की थाली तक पहुंचने वाली प्रत्येक प्रक्रिया के लिए कड़े मानक तय हैं, किंतु यहां हर स्तर पर गंभीर प्रक्रियात्मक और ढांचागत चूक पाई गई।

फूड स्टोरेज में यूरिनल और रसोई में कीड़े-मकौड़ों का खुला वास

जांच रिपोर्ट में सबसे आपत्तिजनक तथ्य यह दर्ज किया गया कि प्रतिष्ठान के फूड स्टोरेज एरिया के भीतर ही एक यूरिनल स्थापित था। वैज्ञानिक और विधिक दृष्टि से यह क्रॉस-कंटैमिनेशन और घातक बैक्टीरिया फैलने का सबसे बड़ा स्रोत है। जहां एक ओर ग्राहकों के लिए कच्चा अनाज, मसाले और अन्य खाद्य वस्तुएं रखी जा रही थीं, वहीं दूसरी ओर यूरिनल की मौजूदगी स्वच्छता मानकों पर गहरा तमाचा है।

इसके साथ ही रसोई के भीतरी कमरों में नियमित पेस्ट कंट्रोल (कीट नियंत्रण) का अभाव स्पष्ट नजर आया। दीवारों, बर्तनों के रैक और गैस चूल्हों के आसपास बड़ी संख्या में जिंदा कॉकरोच रेंगते मिले और खुली रखी गई खाद्य सामग्रियों पर मक्खियां भिनभिना रही थीं। कीटों का यह संक्रामक प्रसार टाइफाइड, डायरिया और फूड पॉइजनिंग जैसी गंभीर बीमारियों को सीधा आमंत्रण देने के समान पाया गया।

डीप फ्रीजर में खून के अवशेष, वेज-नॉनवेज के पृथक्करण का अभाव

निरीक्षण के दौरान जब टीम ने रेफ्रिजरेटर और डीप फ्रीजर की पड़ताल की, तो वहां की स्थिति और भी विकट निकली। फ्रीजर के भीतरी तलों पर मांस के पुराने अवशेष और जमा हुआ खून बिखरा हुआ था, जिसे लंबे समय से साफ तक नहीं किया गया था। इस जमे हुए खून और दुर्गंधयुक्त वातावरण में ही अन्य कच्ची सामग्रियां रखी जा रही थीं।

इसके अतिरिक्त भारतीय खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार शाकाहारी (Veg) और मांसाहारी (Non-Veg) कच्चे उत्पादों को पूरी तरह अलग-अलग कंपार्टमेंट्स में पृथक रखा जाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। ओलंपिया कॉफी हाउस में इस नियम की पूरी तरह अनदेखी की जा रही थी। दोनों श्रेणियों के उत्पादों को एक साथ अव्यवस्थित ढंग से ठूंसा गया था, जिससे शाकाहारी भोजन में मांसाहारी तत्वों और बैक्टीरिया के संदूषण (Cross-Contamination) का सीधा खतरा बना हुआ था।

फर्श पर रखा भोजन, फंगस लगे लकड़ी के बोर्ड और गंदा पानी

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने देखा कि रसोइये और सहायक कर्मचारी पकी हुई और अधपकी खाद्य सामग्रियों को बर्तनों में भरकर सीधे जमीन (फर्श) पर रख रहे थे। फर्श पर चलने वाले जूतों की धूल और नाली के दूषित पानी के छींटे सीधे इन खाद्य बर्तनों के संपर्क में आ रहे थे। वहीं सब्जियां और मांस काटने के लिए जिन लकड़ी के चॉपिंग बोर्ड्स का इस्तेमाल हो रहा था, वे जगह-जगह से चटके और गहरे गड्ढों से भरे थे, जिनमें काले रंग की फंगस और गंदगी जमी हुई थी।

रसोई में खाना पकाने और बर्तन धोने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी की शुद्धता को लेकर भी भारी लापरवाही सामने आई। परिसर में वॉटर प्यूरीफिकेशन सिस्टम संतोषजनक स्थिति में नहीं था। एफडीए के नियमों के तहत प्रत्येक छह माह में पानी की अनिवार्य लैब टेस्टिंग रिपोर्ट और ओवरहेड वॉटर टैंकों की सफाई का सैनिटेशन रजिस्टर मेंटेन करना जरूरी होता है, किंतु प्रबंधन जांच दल के समक्ष पानी की जांच से जुड़ा कोई भी वैध दस्तावेज या सैनिटेशन रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका।

35 में से 34 कर्मचारियों के पास नहीं थी अनिवार्य फूड सेफ्टी ट्रेनिंग

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के नियमों के अंतर्गत किसी भी व्यावसायिक रसोई में कार्यरत फूड हैंडलर्स (खाना बनाने और परोसने वाले कर्मियों) को ‘फोस्टैक’ (FoSTaC) के तहत खाद्य सुरक्षा, व्यक्तिगत शुचिता और संक्रमण से बचाव का औपचारिक प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होता है।

ओलंपिया कॉफी हाउस में जब कर्मियों के दस्तावेजों की पड़ताल की गई, तो पाया गया कि कुल 35 कर्मचारियों में से 34 कर्मचारियों ने कोई बुनियादी फूड सेफ्टी ट्रेनिंग नहीं ली थी। इसके अलावा कर्मचारियों के नियमित मेडिकल चेकअप सर्टिफिकेट और नाखून, बालों व वर्दी की व्यक्तिगत स्वच्छता से जुड़े मानक भी पूरी तरह नदारद पाए गए।

लाइसेंस सस्पेंड: सुधार और पुनः निरीक्षण तक पूरी तरह बंद रहेगा प्रतिष्ठान

इन तमाम संगीन लापरवाहियों के मद्देनजर महाराष्ट्र एफडीए के संयुक्त आयुक्त के निर्देश पर ओलंपिया कॉफी हाउस का फूड लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जब तक निलंबन आदेश प्रभावी है, तब तक भोजनालय में किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री की खरीद, भंडारण, तैयारी, बिक्री और ऑनलाइन या ऑफलाइन डिलीवरी की पूर्ण मनाही रहेगी।

प्रबंधन को एक विस्तृत कारण बताओ नोटिस और सुधार निर्देश जारी किए गए हैं। प्रतिष्ठान को स्टोरेज से यूरिनल हटाने, रसोई का व्यापक सैनिटाइजेशन और पेस्ट कंट्रोल कराने, नए उपकरण लगाने, सभी कर्मचारियों को प्रमाणित ट्रेनिंग दिलाने और पानी की वैध टेस्टिंग रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। जब प्रबंधन इन सभी कमियों को दूर करने की अनुपालन रिपोर्ट सौंपेगा, उसके बाद एफडीए की टीम पुनः औचक निरीक्षण करेगी। यदि परिसर पूरी तरह मानकों पर खरा उतरा, तभी लाइसेंस बहाली पर विचार किया जाएगा।

त्योहारी सीजन में एफडीए का व्यापक शिकंजा: नायर अस्पताल की कैंटीन पर भी गिरी गाज

महाराष्ट्र में आगामी त्योहारी सीजन (गणेशोत्सव, नवरात्रि और दिवाली) के मद्देनजर मिलावटखोरों और लापरवाह खाद्य कारोबारियों के खिलाफ एफडीए ने पूरे राज्य में सघन तलाशी अभियान छेड़ रखा है। ओलंपिया कॉफी हाउस के अलावा मुंबई के प्रमुख नायर अस्पताल (TNMC & Nair Hospital) की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (RDA) की कैंटीन में भी गंभीर अनियमितताएं मिलने पर उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।

इसके साथ ही शहरभर में मिठाइयों की दुकानों, मावा-पनीर के गोदामों और ड्राई फ्रूट विक्रेताओं के परिसरों पर छापेमारी कर मिलावटी मावा, घटिया पनीर और सिंथेटिक दूध की विशाल खेप जब्त की जा रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी पुराना, नामचीन या ऐतिहासिक क्यों न हो।

Olympia Coffee House License Suspended: निष्कर्ष

कोलाबा के ओलंपिया कॉफी हाउस पर हुई यह कठोर दंडात्मक कार्रवाई उन तमाम खाद्य कारोबारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो केवल अपने ब्रांड नाम और पुरानी ख्याति के दम पर बुनियादी स्वच्छता मानकों को ताक पर रख देते हैं। किसी भी भोजनालय की पहली जिम्मेदारी अपने ग्राहकों को स्वच्छ, सुरक्षित और संक्रमण मुक्त भोजन उपलब्ध कराना है। फूड स्टोरेज में यूरिनल और रसोई में कीड़े-मकौड़ों की मौजूदगी यह साबित करती है कि यहां नियमित निगरानी का घोर अभाव था। एफडीए की यह सक्रियता न केवल उपभोक्ताओं के अधिकारों और स्वास्थ्य की रक्षा करती है, बल्कि यह भी रेखांकित करती है कि ऐतिहासिक विरासत के नाम पर खाद्य सुरक्षा के राष्ट्रीय नियमों से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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