Nitin Gadkari E20 Fuel Controversy: नितिन गडकरी का बड़ा दावा, E20 फ्यूल के खिलाफ विरोध पेड कैंपेन था, अब गुस्सा शांत
Nitin Gadkari E20 Fuel Controversy: नितिन गडकरी का बड़ा दावा, E20 फ्यूल के खिलाफ विरोध पेड कैंपेन था, अब गुस्सा शांत
Nitin Gadkari E20 Fuel Controversy: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के खिलाफ हुए विरोध को पेड कैंपेन करार दिया है। उन्होंने कहा कि तीन महीने पहले इस मुद्दे पर काफी हंगामा किया गया था, लेकिन अब वह गुस्सा पूरी तरह शांत हो चुका है। गडकरी का यह बयान उद्योग संगठन सीआईआई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मंत्री ने साफ कहा कि E20 ईंधन के खिलाफ सुनियोजित तरीके से माहौल बनाया गया था।
यह बयान सरकार द्वारा मोटर वाहन नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी करने के ठीक एक दिन बाद आया है। नई अधिसूचना के तहत फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को शत प्रतिशत इथेनॉल (E100) तक के ईंधन पर चलने की अनुमति दी गई है। गडकरी ने जोर दिया कि कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों का प्रसार जरूरी है। इथेनॉल के व्यापक इस्तेमाल से पर्यावरण को लाभ होगा और विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
नितिन गडकरी ने E20 विरोध को पेड कैंपेन क्यों बताया?
सीआईआई के कार्यक्रम में बोलते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि तीन महीने पहले E20 ईंधन के खिलाफ काफी हंगामा किया गया था। अब वह गुस्सा पूरी तरह शांत हो चुका है। उन्होंने इसे सीधे तौर पर पेड कैंपेन बताया। मंत्री के अनुसार कुछ समय पहले सुनियोजित तरीके से माहौल बनाया गया था।
गडकरी ने दोहराया कि देश की कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाना जरूरी है। इथेनॉल ब्लेंडिंग से न केवल पर्यावरण को फायदा होता है, बल्कि भारत की कीमती विदेशी मुद्रा भी बचती है। उनका मानना है कि विरोध के पीछे कोई ठोस आधार नहीं था और अब स्थिति सामान्य हो गई है।
सरकार की नई अधिसूचना में क्या बदलाव किए गए हैं?
सरकार ने सोमवार को केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन की अधिसूचना जारी की। इस संशोधन से ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति मिल गई है जो E100 यानी लगभग शुद्ध इथेनॉल तक के ईंधन पर चल सकते हैं। यह कदम इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को और आगे बढ़ाने की दिशा में उठाया गया है।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल और इथेनॉल के विभिन्न मिश्रण पर चलने में सक्षम होते हैं। नई अधिसूचना के बाद इन वाहनों को शत प्रतिशत इथेनॉल पर भी चलाने का कानूनी रास्ता खुल गया है। सरकार का कहना है कि इससे इथेनॉल की मांग बढ़ेगी और किसानों को भी फायदा होगा।
E20 को लेकर पहले क्या विवाद हुआ था?
केंद्र सरकार द्वारा देशभर में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल लागू करने के फैसले के बाद इस साल की शुरुआत में विरोध और राजनीतिक आलोचनाएं शुरू हो गई थीं। वाहन मालिकों ने माइलेज कम होने और पुराने वाहनों में इस ईंधन के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई थी। कई लोगों का कहना था कि पुरानी गाड़ियों के इंजन पर असर पड़ सकता है।
विपक्षी दलों ने भी अप्रैल 2025 से पूरे देश में पेट्रोल पंपों पर E20 को मानक ईंधन बनाने के निर्णय पर सवाल उठाए थे। यह विवाद तब और बढ़ गया जब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने E20 को एक प्रयोग बताया और कहा कि इसके नतीजे अगले साल पता चलेंगे। उनका यह बयान वायरल हो गया। बाद में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि अटॉर्नी जनरल इथेनॉल की आपूर्ति की मात्रा के संदर्भ में बात कर रहे थे, न कि E20 नीति को प्रयोग बता रहे थे। वेंकटरमणी ने भी कहा कि उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया था।
सरकार और उद्योग का E20 पर क्या रुख है?
सरकार और ऑटोमोबाइल उद्योग ने ऐसे अध्ययनों का हवाला दिया है जिनसे पता चलता है कि E20 से इंजन के धातु वाले पुर्जों को कोई खास नुकसान नहीं पहुंचता है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना है कि अलग-अलग वाहनों में ईंधन दक्षता और अनुकूलता अलग-अलग हो सकती है। कुछ वाहनों में माइलेज पर मामूली असर पड़ सकता है, जबकि नए वाहन बेहतर तरीके से अनुकूल हो सकते हैं।
सरकार का मुख्य उद्देश्य कच्चे तेल की आयात निर्भरता कम करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है। इथेनॉल गन्ने और अन्य कृषि उत्पादों से बनता है, इसलिए इससे किसानों की आय भी बढ़ने की संभावना है। विदेशी मुद्रा की बचत भी एक बड़ा कारण है क्योंकि कम कच्चा तेल आयात करना पड़ेगा।
आगे क्या हो सकता है और वाहन मालिकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
गडकरी के बयान के बाद E20 पर चर्चा फिर से शुरू हो सकती है। नई अधिसूचना से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि विरोध शांत हो गया है और नीति अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ रही है।
वाहन मालिकों को सलाह दी जाती है कि अपने वाहन के मैनुअल में इथेनॉल ब्लेंडिंग की सीमा चेक करें। पुराने वाहनों में अधिक ब्लेंडिंग से समस्या हो सकती है, जबकि नए वाहन बेहतर तरीके से संभाल सकते हैं। पेट्रोल पंपों पर E20 की उपलब्धता बढ़ने के साथ लोग अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं। आने वाले समय में इथेनॉल ब्लेंडिंग का प्रतिशत और बढ़ाने की योजना है।
नितिन गडकरी का पेड कैंपेन वाला दावा राजनीतिक और नीतिगत दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन सकता है। सरकार इथेनॉल कार्यक्रम को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर देख रही है। वाहन मालिकों की चिंताओं को लेकर और अध्ययन तथा स्पष्ट संचार की जरूरत बनी हुई है।
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