Nautapa 2026 Date: 25 मई से शुरू होगा नौतपा, सूर्य बरसाएंगे आग, जानें क्यों चर्चा में है विष्णु पुराण की भविष्यवाणी
Nautapa 2026 Date: 25 मई से नौतपा, बरसेंगे आग के गोले!
Nautapa 2026 Date: भारत में गर्मी के मौसम का सबसे कड़ा और झुलसाने वाला दौर शुरू होने वाला है। आगामी 25 मई 2026 से इस साल के ‘नौतपा’ की शुरुआत होने जा रही है, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिषीय और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, इसके बाद के अगले नौ दिन यानी 2 जून तक धरती पर भीषण गर्मी अपने चरम पर होगी और आसमान से आग के गोले बरसेंगे। मौसम विभाग ने भी पहले ही चेतावनी जारी कर दी है कि दिल्ली एनसीआर सहित देश के बड़े हिस्से में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर सकता है। इस भीषण तपिश के बीच सनातन धर्म के ऐतिहासिक ग्रंथ विष्णु पुराण में की गई एक पुरानी भविष्यवाणी भी देश भर में चर्चा का विषय बन गई है, जिसमें बढ़ते वैश्विक तापमान और जल संकट को लेकर बेहद चौंकाने वाली बातें कही गई हैं।
उत्तर और मध्य भारत के बाजारों, दफ्तरों और बस स्टैंडों पर दोपहर के समय अभी से सन्नाटा पसरने लगा है। लोग गर्मी के इस आगामी प्रकोप से बचने के लिए अभी से ठंडे पेय पदार्थों, मिट्टी के घड़ों और एयर कूलर की व्यवस्था करने में जुट गए हैं। दिल्ली के कनॉट प्लेस और चांदनी चौक जैसे व्यस्त इलाकों में दोपहर के वक्त राहगीरों की संख्या में भारी कमी देखी जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी मौसम के बदलते मिजाज और नौतपा के ज्योतिषीय महत्व को लेकर लोगों के बीच लगातार चर्चाएं हो रही हैं। ग्रामीण इलाकों में किसान अपनी फसलों को इस भीषण तपिश से बचाने के लिए सिंचाई की अग्रिम रणनीतियां तैयार कर रहे हैं क्योंकि नौतपा का सीधा संबंध आगामी मानसून की स्थिति से भी जुड़ा होता है।
Nautapa 2026 Date: नौतपा का खगोलीय और ज्योतिषीय आधार क्या है और क्यों इस दौरान बढ़ती है भीषण गर्मी
वैदिक ज्योतिष और खगोलीय विज्ञान के अनुसार, जब सूर्य देव चंद्रमा के स्वामित्व वाले रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो उस अवधि को नौतपा कहा जाता है। रोहिणी नक्षत्र को शीतलता और नमी का प्रतीक माना जाता है, और जब अग्नि तत्व के प्रधान ग्रह सूर्य इस नक्षत्र में आते हैं, तो वे इसकी पूरी नमी को सोख लेते हैं। इसके परिणामस्वरूप पृथ्वी का तापमान अचानक बहुत तेजी से बढ़ने लगता है। इस साल 25 मई को जैसे ही सूर्य का यह गोचर होगा, वैसे ही नौ दिनों के लिए लू (हीटवेव) का प्रकोप देश के कई राज्यों को अपनी चपेट में ले लेगा।
मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सतीश कुमार ने बताया कि मई के आखिरी सप्ताह में सूर्य की किरणें सीधे तौर पर भारतीय उपमहाद्वीप पर पड़ती हैं। इस समय हवाओं की दिशा और वायुमंडलीय दबाव में होने वाले बदलावों के कारण मैदानी इलाकों में गर्म हवाएं चलने लगती हैं। ज्योतिष शास्त्र में यह भी मान्यता है कि यदि नौतपा के इन नौ दिनों में भरपूर गर्मी पड़ती है और आसमान साफ रहता है, तो उस साल मानसून बहुत अच्छा आता है और देश में अच्छी बारिश होती है। इसलिए इसे केवल कष्टकारी समय नहीं, बल्कि भविष्य की खुशहाली का संकेत भी माना जाता है।
विष्णु पुराण की वह कौन सी भविष्यवाणी है जो मौजूदा मौसम के मिजाज से मेल खा रही है
इस साल नौतपा के आगमन के साथ ही विष्णु पुराण की एक विशिष्ट कथा और भविष्यवाणी को लेकर लोगों में गहरा कौतूहल देखा जा रहा है। विष्णु पुराण के चतुर्थ अंश में वर्णन मिलता है कि जब सृष्टि का एक युग पूरा होने की ओर बढ़ता है, तो पृथ्वी पर तापमान में अप्रत्याशित रूप से लगातार वृद्धि होने लगती है। ग्रंथ के अनुसार, जब धरती पर गंभीर सूखा पड़ना शुरू होगा, तब भगवान विष्णु सूर्य की सात किरणों के माध्यम से संसार का सारा जल अपने भीतर समाहित कर लेंगे।
पुराण में आगे उल्लेख है कि वे सात किरणें सात अलग-अलग सूर्यों के समान अत्यंत दीप्तिमान और शक्तिशाली हो जाएंगी। उनकी भयानक तपिश से न केवल नदियां और महासागर सूख जाएंगे, बल्कि पृथ्वी इतनी कठोर हो जाएगी कि उसमें गहरी दरारें पड़ने लगेंगी। आज जिस तरह दुनिया भर के पर्यावरणविद ग्लोबल वार्मिंग, ग्लेशियरों के पिघलने और लगातार बढ़ते तापमान को लेकर चिंता जता रहे हैं, उसे देखकर लोग अचंभित हैं कि हजारों साल पहले लिखे गए शास्त्रों में इस स्थिति का हूबहू वर्णन कैसे किया गया। धार्मिक विद्वान इसे मानव जाति के लिए प्रकृति के साथ खिलवाड़ न करने की एक बड़ी चेतावनी के रूप में देख रहे हैं।
Nautapa 2026 Date: नौतपा के दौरान आम जनता को स्वास्थ्य और खान-पान के मामले में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए
भीषण गर्मी और लू के इस दौर में स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। नौतपा के दौरान शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इस समय लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बिना किसी बेहद जरूरी काम के सीधे धूप में निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना ही पड़े, तो सिर को सूती कपड़े या छाते से ढककर रखें और साथ में पानी की बोतल जरूर रखें।
खान-पान के मामले में इस दौरान पूरी तरह सात्विक और हल्के भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए। नौतपा के दिनों में बासी भोजन करने से सख्त परहेज करना चाहिए क्योंकि तेज तापमान के कारण पका हुआ खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है और इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। जितना हो सके ताजा भोजन, मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा और ककड़ी का सेवन करना चाहिए। इसके साथ ही नींबू पानी, छाछ, लस्सी और ओआरएस का घोल पीते रहने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और आंतरिक ऊर्जा बनी रहती है।
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