Narendra Modi Appeal: PM मोदी की अपील का उल्टा असर! सोना खरीदने उमड़ी भीड़, शादी सीजन और कीमत बढ़ने के डर से सर्राफा बाजारों में ‘पैनिक बाइंग’ तेज

PM मोदी की अपील के बाद भी बढ़ी खरीदारी, ज्वेलरी दुकानों पर लंबी कतारें

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Narendra Modi Appeal: भारत में सोने के प्रति गहरा सांस्कृतिक और आर्थिक लगाव एक बार फिर धरातल पर दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हाल ही में देशवासियों से कम से कम एक साल तक सोने की अनावश्यक खरीदारी टालने की अपील के बावजूद, देशभर के सर्राफा बाजारों में ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) का माहौल बन गया है। मई 2026 के इस तपते मौसम में ज्वेलरी शोरूम्स पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है। इस अप्रत्याशित उछाल के पीछे मुख्य कारण भविष्य में कीमतों के और बढ़ने का डर, आयात शुल्क में संभावित वृद्धि और सरकार द्वारा सोने के लेन-देन पर कड़े नियमों की आशंका है। विशेष रूप से आगामी शादियों के सीजन के लिए ब्राइडल ज्वेलरी की एडवांस बुकिंग और खरीदारी में पिछले 48 घंटों के भीतर 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

Narendra Modi Appeal: प्रधानमंत्री की अपील और बाजार की विपरीत प्रतिक्रिया

ईरान युद्ध और वैश्विक ऊर्जा संकट के चलते विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे भारी दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सादगी और बचत की अपील की थी। उन्होंने विदेशी सामानों के बहिष्कार और ईंधन संरक्षण के साथ-साथ सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए नागरिकों से सहयोग मांगा था। हालांकि, इस अपील का बाजार पर मनोवैज्ञानिक रूप से उल्टा असर पड़ा है। निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के बीच यह धारणा प्रबल हो गई है कि सरकार आने वाले समय में सोने पर जीएसटी बढ़ा सकती है या इसकी होल्डिंग को लेकर कोई नया कानून ला सकती है। इसी अनिश्चितता ने मुम्बई के जवेरी बाजार से लेकर दिल्ली के करोल बाग तक ग्राहकों की लंबी कतारें खड़ी कर दी हैं।

Narendra Modi Appeal: आसमान छूती कीमतें और बढ़ता आयात बिल

वर्तमान में सोने की कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के करीब हैं। 24 कैरेट सोने का भाव 1,62,000 से 1,63,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के बीच चल रहा है, जबकि आभूषणों के लिए उपयोग होने वाला 22 कैरेट गोल्ड 1,48,000 से 1,50,000 रुपये के स्तर पर है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता है और वित्त वर्ष 2026 में सोने का आयात रिकॉर्ड 72 बिलियन डॉलर के पार पहुँच गया है। यह बढ़ता आयात देश के चालू खाता घाटे (CAD) के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार की चिंता यह है कि यदि सोने की यह अंधाधुंध खरीदारी जारी रही, तो भारतीय रुपया अंतरराष्ट्रीय बाजार में और अधिक कमजोर हो सकता है, जिससे महंगाई का संकट गहरा जाएगा।

Narendra Modi Appeal: सांस्कृतिक अनिवार्यता और ब्राइडल ज्वेलरी की मांग

भारतीय समाज में सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और दक्षिण भारत के राज्यों में शादियों के दौरान सोने का दान और उपहार एक अनिवार्य परंपरा है। नवंबर-दिसंबर की शादियों की तैयारी कर रहे परिवारों का मानना है कि यदि अभी खरीदारी नहीं की गई, तो भविष्य में बढ़ी हुई कीमतें उनके बजट को पूरी तरह बिगाड़ सकती हैं। ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, मध्यम वर्गीय परिवार अब हल्के वजन (Lightweight) की डिजाइनर ज्वेलरी के बजाय भारी पारंपरिक आभूषणों पर निवेश कर रहे हैं, ताकि वे अपनी पूंजी को सुरक्षित रख सकें। तनिष्क, मालाबार और कल्याण ज्वेलर्स जैसे बड़े ब्रांड्स ने भी ग्राहकों की इस बढ़ती भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त स्टॉक का प्रबंध किया है।

Narendra Modi Appeal: निवेश के वैकल्पिक मार्ग और विशेषज्ञों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पैनिक बाइंग हमेशा नुकसानदेह होती है क्योंकि इसमें उपभोक्ता उच्चतम कीमतों पर खरीदारी करता है। सरकार और वित्तीय सलाहकार अब ग्राहकों को ‘फिजिकल गोल्ड’ के बजाय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और डिजिटल गोल्ड की ओर प्रेरित कर रहे हैं। इन विकल्पों में चोरी का डर नहीं होता और मेकिंग चार्ज की बचत के साथ-साथ ब्याज का भी लाभ मिलता है। हालांकि, पारंपरिक खरीदार अभी भी सोने को अपने हाथ में महसूस करने और उसे पहनने की संतुष्टि को प्राथमिकता दे रहे हैं। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह उपभोग स्तर बना रहा, तो घरेलू बचत का एक बड़ा हिस्सा अनुत्पादक संपत्तियों में फंस जाएगा, जिससे देश की विकास दर प्रभावित हो सकती है।

निष्कर्ष: आर्थिक समझदारी बनाम भावनात्मक लगाव

निष्कर्षतः, सोने की यह पैनिक बाइंग भारतीय जनमानस में व्याप्त असुरक्षा और भविष्य की चिंताओं को दर्शाती है। जहाँ एक ओर ज्वेलरी उद्योग इस अचानक आई तेजी से उत्साहित है, वहीं दूसरी ओर सरकार के लिए यह वित्तीय स्थिरता बनाए रखने की एक बड़ी चुनौती है। उपभोक्ताओं के लिए यह समय बहुत ही सोच-समझकर कदम उठाने का है। केवल अनिवार्य शादियों के लिए ही खरीदारी करना और निवेश के लिए बॉन्ड्स का चुनाव करना एक संतुलित मार्ग हो सकता है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक तनाव कम होता है, तो कीमतों में सुधार की संभावना है, इसलिए घबराहट में आकर अपनी पूरी जमापूँजी एक ही समय पर निवेश करने से बचना चाहिए।

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