BMC मेयर पद की रेस में नया मोड़, उद्धव गुट ने मेयर पद के लिए किया बड़ा दावा, सिर्फ 6 सीटों की दूरी पर बहुमत

बीएमसी चुनाव में उद्धव गुट का दावा - महज 6 सीटों की दूरी पर बहुमत; महायुति के 118 के खिलाफ विपक्ष के 108

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Mumbai New Mayor News: देश की सबसे बड़ी नगर निगम बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के चुनाव परिणामों के बाद मुंबई की राजनीति में रोचक मोड़ आ गया है। जहां महायुति गठबंधन आराम से बहुमत के आंकड़े को पार कर चुका है, वहीं विपक्षी गठबंधन ने भी मेयर पद की दौड़ में अपनी दावेदारी पेश कर दी है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने दावा किया है कि विपक्ष बहुमत से महज छह सीटों की दूरी पर है और मुंबई की राजनीति में कुछ भी हो सकता है।

Mumbai New Mayor News: चुनाव परिणाम और सीटों का गणित

227 सीटों वाली बृहन्मुंबई नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 89 सीटें हासिल कीं और सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना को 29 सीटें प्राप्त हुईं। महायुति गठबंधन ने संयुक्त रूप से 118 सीटें अपने खाते में डालीं जो मेयर चुनने के लिए आवश्यक 114 सीटों के जादुई आंकड़े से अधिक है।

इस प्रदर्शन के बाद यह स्वाभाविक माना जा रहा था कि मुंबई का अगला मेयर महायुति गठबंधन से ही होगा। परंतु विपक्ष ने समीकरण में नया ट्विस्ट ला दिया है। संजय राउत का दावा है कि यदि विपक्षी गठबंधन को केवल छह पार्षदों का अतिरिक्त समर्थन मिल जाए तो पूरा खेल पलट सकता है।

विपक्षी गठबंधन की ताकत

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) को चुनाव में 65 वार्ड प्राप्त हुए हैं। राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) जिसने शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन किया था, ने 6 सीटें जीतीं। कांग्रेस और वंचित बहुजन अघाड़ी ने मिलकर 24 सीटों पर विजय प्राप्त की। असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के खाते में 8 सीटें आईं।

इसके अतिरिक्त समाजवादी पार्टी ने 2 सीटें जीतीं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 3 सीटें मिलीं जबकि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को 1 सीट प्राप्त हुई। यहां उल्लेखनीय है कि अजित पवार महायुति का हिस्सा होते हुए भी BMC चुनाव (Mumbai New Mayor News) स्वतंत्र रूप से लड़े थे। संजय राउत के अनुसार इन सभी को मिलाकर विपक्षी गठबंधन के पास वर्तमान में 108 सीटें हैं।

Mumbai New Mayor News: राउत का आत्मविश्वास भरा बयान

संजय राउत ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि विपक्ष बहुमत के आंकड़े से केवल छह सीटों की दूरी पर है। उन्होंने कहा कि मुंबई की राजनीति अत्यंत गतिशील है और यहां कुछ भी हो सकता है। उनका यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि विपक्ष पार्टी रेखाओं के पार से समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकता है।

राउत का यह आत्मविश्वास किसी ठोस रणनीति पर आधारित प्रतीत होता है। मुंबई की राजनीति में पहले भी कई बार अप्रत्याशित गठबंधन और समर्थन देखे गए हैं। यदि विपक्ष छह पार्षदों को अपने पक्ष में करने में सफल हो जाता है तो मेयर पद की पूरी दौड़ बदल सकती है।

महायुति का आत्मविश्वास

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दूसरी ओर महायुति गठबंधन (Mumbai New Mayor News) अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रहा है। 118 सीटों के साथ उनके पास आवश्यक बहुमत से चार सीटें अधिक हैं। भाजपा और शिंदे गुट के नेताओं का मानना है कि उनका बहुमत सुरक्षित है और मेयर पद उनके गठबंधन को ही मिलेगा।

हालांकि महायुति को भी सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि राजनीति में अंतिम क्षण तक कुछ भी निश्चित नहीं होता। विशेषकर जब विपक्ष सक्रिय रूप से समर्थन जुटाने की बात कर रहा हो।

स्वतंत्र और छोटे दलों की भूमिका

इस पूरे समीकरण में स्वतंत्र पार्षदों और छोटे दलों (Mumbai New Mayor News) की भूमिका निर्णायक हो सकती है। यदि कुछ स्वतंत्र पार्षद या छोटे दलों के सदस्य विपक्ष का समर्थन करने का निर्णय लेते हैं तो स्थिति पूरी तरह बदल सकती है। अजित पवार की एनसीपी की तीन सीटें भी इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों गुटों द्वारा इन छोटे खिलाड़ियों को अपने पक्ष में करने के प्रयास तेज होंगे। मुंबई नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित और शक्तिशाली निकाय का मेयर पद अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Mumbai New Mayor News: मुंबई नगर निगम का महत्व

बृहन्मुंबई नगर निगम केवल देश का सबसे बड़ा नगर निगम नहीं है बल्कि यह अत्यंत शक्तिशाली और समृद्ध निकाय भी है। इसका वार्षिक बजट कई राज्यों के बजट से भी अधिक है। मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और यहां के मेयर की भूमिका अत्यंत प्रभावशाली होती है।

इसलिए सभी राजनीतिक दल इस पद को हासिल करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। महायुति के लिए यह उनकी राजनीतिक प्रतिष्ठा का प्रश्न है जबकि विपक्ष के लिए यह साबित करने का अवसर है कि वे अभी भी प्रासंगिक हैं।

आगे की राजनीतिक चालें

अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में कौन सा गुट कितना प्रभावी रणनीति अपनाता है। विपक्ष को छह पार्षदों का समर्थन जुटाना होगा जो आसान नहीं है। महायुति को अपने पार्षदों को साधे रखना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई क्रॉस वोटिंग न हो।

मुंबई की राजनीति हमेशा से रोचक और अप्रत्याशित रही है। यह मेयर चुनाव (Mumbai New Mayor News) भी इसका अपवाद नहीं होगा। दोनों गुट अपनी-अपनी रणनीति पर काम कर रहे हैं और अंतिम परिणाम तब तक अनिश्चित रहेगा जब तक वास्तविक मतदान नहीं हो जाता।

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