मुंबई में फोन हाईजैक स्कैम से 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के 25 लाख रुपये गए, बिजली विभाग का अधिकारी बनकर WhatsApp पर 13 रुपये की पेमेंट के बहाने मैलवेयर डालकर फोन हाईजैक कर लिया, जानें कैसे काम करता है यह नया साइबर अपराध और खुद को बचाने के जरूरी उपाय
मुंबई में बिजली विभाग अधिकारी बनकर WhatsApp पर 13 रुपये पेमेंट के बहाने फोन हाईजैक, 78 वर्षीय महिला के 25 लाख ठगे गए
Mumbai Cyber Crime: मुंबई में साइबर अपराधियों ने एक बुजुर्ग महिला के फोन को हाईजैक करके उनके बैंक खाते से 25 लाख रुपये की ठगी कर ली। अपराधियों ने बिजली विभाग का अधिकारी बनकर WhatsApp पर संपर्क किया और मात्र 13 रुपये की छोटी सी पेमेंट के बहाने महिला के फोन में मैलवेयर इंस्टॉल कर दिया। यह नया फोन हाईजैक स्कैम देश भर में तेजी से फैल रहा है और आम लोगों को इससे सावधान रहने की सख्त जरूरत है। डिजिटल दुनिया में जैसे-जैसे लोग स्मार्टफोन पर निर्भर होते जा रहे हैं, साइबर अपराधी भी उतने ही शातिर होते जा रहे हैं। अब महज एक छोटी सी पेमेंट के बहाने आपका पूरा बैंक खाता खाली किया जा सकता है। मुंबई की एक 78 वर्षीय महिला के साथ हुई इस घटना ने पूरे देश को चौंका दिया है और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
Mumai cyber crime: मुंबई में कैसे हुई 25 लाख की ठगी?
साइबर पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, अपराधियों ने महिला से WhatsApp पर संपर्क किया और खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि बिजली कनेक्शन में नाम अपडेट करने की जरूरत है और इसके लिए एक फाइल डाउनलोड करनी होगी।
महिला उस समय केरल में छुट्टियां मना रही थीं। सरकारी विभाग का संदेश समझकर उन्होंने बिना किसी संदेह के वह फाइल डाउनलोड की और बताए गए लिंक पर 13 रुपये की पेमेंट कर दी।
बस यही वह पल था जब अपराधियों का जाल पूरी तरह से बिछ गया। उस फाइल में मैलवेयर था जिसने महिला के फोन को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में ले लिया और उनकी बैंकिंग जानकारी चुराकर खाते से 25 लाख रुपये निकाल लिए।
Mumbai cyber crime: क्या होता है फोन हाईजैक स्कैम?
फोन हाईजैक एक ऐसी साइबर तकनीक है जिसमें अपराधी आपके स्मार्टफोन पर मैलवेयर या स्पाईवेयर इंस्टॉल करवा देते हैं। एक बार यह सॉफ्टवेयर फोन में आ जाए तो हैकर्स को आपके पासवर्ड, बैंकिंग OTP, कैमरा, माइक्रोफोन और पूरे फोन की स्क्रीन तक पहुंच मिल जाती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक डिजिटल अरेस्ट जैसे पुराने स्कैम से ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें पीड़ित को पता ही नहीं चलता कि उनका फोन किसी और के नियंत्रण में है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर पिछले एक वर्ष में इस तरह के सैकड़ों मामले दर्ज हो चुके हैं।
Mumbai cyber crime: अपराधी कैसे बनाते हैं शिकार?
साइबर अपराधी हमेशा किसी भरोसेमंद संस्था का नाम लेकर संपर्क करते हैं। वे बिजली विभाग, बैंक, TRAI, आयकर विभाग या टेलीकॉम कंपनी का अधिकारी बनकर फोन करते हैं या WhatsApp, SMS और ईमेल के जरिए मैसेज भेजते हैं।
उनकी रणनीति बेहद सोची-समझी होती है। पहले वे एक मामूली काम जैसे नाम अपडेट या छोटी पेमेंट का बहाना बनाते हैं। फिर उस काम को पूरा करने के लिए एक APK फाइल, PDF या लिंक भेजते हैं जिसमें मैलवेयर छुपा होता है।
जैसे ही पीड़ित उस फाइल को डाउनलोड करता है या लिंक खोलता है, मैलवेयर तुरंत सक्रिय हो जाता है और हैकर्स को पीड़ित के फोन का पूरा नियंत्रण मिल जाता है।
Mumbai cyber crime: बुजुर्गों को क्यों बनाया जाता है निशाना?
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि वरिष्ठ नागरिक इन अपराधों के आसान शिकार बन जाते हैं क्योंकि वे अक्सर डिजिटल तकनीक से उतने परिचित नहीं होते। सरकारी विभाग का नाम सुनते ही उनका भरोसा बढ़ जाता है और वे बिना जांचे-परखे निर्देशों का पालन कर देते हैं।
इसके अलावा, बुजुर्ग नागरिकों के पास अक्सर जीवन भर की जमा पूंजी होती है जो इन्हें आर्थिक रूप से आकर्षक लक्ष्य बनाती है। परिवार से दूर यात्रा पर होने की स्थिति में वे और भी असुरक्षित हो जाते हैं।
Mumbai cyber crime: फोन हाईजैक से बचने के उपाय क्या हैं?
सबसे पहला और सबसे जरूरी नियम यह है कि किसी भी अनजान नंबर से आए WhatsApp मैसेज में भेजी गई फाइल या लिंक को कभी न खोलें चाहे भेजने वाला खुद को किसी भी सरकारी विभाग का अधिकारी क्यों न बताए।
किसी को भी अपना OTP, बैंकिंग पासवर्ड, आधार नंबर या कोई भी व्यक्तिगत दस्तावेज शेयर न करें। असली सरकारी विभाग कभी भी WhatsApp पर फाइल भेजकर पेमेंट नहीं मांगते। यदि किसी कॉल या मैसेज पर संदेह हो तो सीधे संबंधित विभाग के आधिकारिक नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अपने फोन में किसी भरोसेमंद एंटीवायरस ऐप को जरूर इंस्टॉल रखें और समय-समय पर अपने बैंक खाते की गतिविधि जांचते रहें।
Mumbai cyber crime: साइबर स्कैम का शिकार होने पर क्या करें?
यदि आपके साथ ऐसी कोई घटना हो जाए तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।
इसके साथ ही अपने बैंक को तुरंत सूचित करें और खाते को अस्थायी रूप से ब्लॉक करवाएं। साइबर पुलिस थाने में भी लिखित शिकायत जरूर दर्ज करवाएं और किसी भी लेन-देन का स्क्रीनशॉट या रिकॉर्ड संभालकर रखें।
निष्कर्ष
मुंबई की बुजुर्ग महिला के साथ हुई यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि साइबर अपराधी अब और भी चालाक और तकनीकी रूप से सक्षम हो गए हैं। एक छोटी सी लापरवाही जीवन भर की कमाई को पलभर में नष्ट कर सकती है।
डिजिटल सुरक्षा की पहली जिम्मेदारी हमारी अपनी है। किसी भी अनजान फाइल, लिंक या पेमेंट अनुरोध को अनदेखा करें और अपने परिवार के बुजुर्ग सदस्यों को इन खतरों के बारे में जागरूक करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।
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