MP News: धार भोजशाला में 10 साल बाद एक ही दिन पूजा और नमाज, तनाव के बीच 8000 पुलिसकर्मी तैनात
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर वसंत पंचमी पर विशेष व्यवस्था, दोनों समुदायों के लिए अलग स्थान
MP News: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में वसंत पंचमी के मौके पर शुक्रवार को मां वाग्देवी का पूजन शुरू हो गया है। यह एक दुर्लभ अवसर है जब 10 साल बाद वसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन पड़ी है। सूर्योदय के साथ ही वेदारंभ संस्कार से पूजा की शुरुआत हुई, जबकि दोपहर एक बजे से तीन बजे तक मुस्लिम समुदाय के लोग अलग स्थान पर नमाज अदा करेंगे।
इस संवेदनशील आयोजन को सुरक्षित और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं। करीब 8000 पुलिसकर्मी जिले में तैनात किए गए हैं और आधुनिक तकनीक से निगरानी की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में स्पष्ट है कि दोनों समुदाय के आयोजन पृथक-पृथक स्थान पर होंगे और पूजा-अर्चना निर्विघ्न संपन्न होगी।
MP News: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सख्ती से पालन
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने स्पष्ट किया कि हिंदू समाज पूर्व परंपरा के अनुसार पूजन करेगा। सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि दोनों समुदायों के प्रवेश और निकासी के रास्ते अलग होने चाहिए। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से नक्शा लेकर परिसर में उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई है।
कलेक्टर के अनुसार, कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि प्रवेश-निकासी अलग होनी चाहिए और परिसर में पर्याप्त जगह उपलब्ध है। जिला प्रशासन कानून व्यवस्था को देखते हुए स्वयं स्थान तय कर सकता है। दोनों पक्षों की बैठक बुलाई गई थी। हिंदू समाज संतुष्ट है और मुस्लिम समाज से भी चर्चा हुई है। उन्हें विभिन्न विकल्प दिए गए हैं।
अगर सहमति के आधार पर स्थान तय नहीं होता है, तो स्थानीय प्रशासन स्वयं निर्णय लेने के लिए अधिकृत है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करते हुए शांति और व्यवस्था बनाए रखना है।
वसंत पंचमी पर विशेष कार्यक्रम

सुबह साढ़े 10 बजे शहर के लालबाग से भोजशाला तक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। इस शोभायात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। दोपहर सवा 12 बजे धर्मसभा का आयोजन होगा, जिसमें प्रमुख वक्ता के रूप में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और सनातनी अखाड़ा के संयोजक स्वामी स्वदेशानंद गिरी महाराज शामिल रहेंगे।
दोपहर एक बजकर 15 मिनट पर भोजशाला परिसर में महाआरती का आयोजन होगा। भोजशाला मुक्ति यज्ञ के पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा शांतिपूर्ण और निर्विघ्न रूप से संपन्न होगी। सभी धार्मिक अनुष्ठान परंपरागत विधि-विधान से किए जाएंगे।
MP News: 8000 पुलिसकर्मियों की तैनाती
इस संवेदनशील अवसर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जिला प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं लेने का फैसला किया है। करीब 8000 पुलिसकर्मी जिले के विभिन्न हिस्सों में तैनात किए गए हैं। इनमें 1000 से अधिक महिला पुलिसकर्मी शामिल हैं, जो भीड़ नियंत्रण और महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष रूप से तैनात की गई हैं।
सुरक्षा की कमान 13 IPS अधिकारी संभाल रहे हैं। 25 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी विभिन्न स्थानों पर तैनात किए गए हैं। 107 नगर निरीक्षक और उप निरीक्षक तथा 393 अन्य अधिकारी-कर्मचारी ड्यूटी पर लगाए गए हैं। भोजशाला के आसपास 300 मीटर का सुरक्षा घेरा बनाया गया है, जिसमें सिर्फ अधिकृत व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति है।
आधुनिक तकनीक से निगरानी
सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया है। शहर और भोजशाला परिसर में 1000 से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इनसे 24 घंटे निगरानी की जा रही है और सभी फीड कंट्रोल रूम में मॉनिटर किए जा रहे हैं।
20 ड्रोन कैमरों का उपयोग हवाई निगरानी के लिए किया जा रहा है। ये ड्रोन परिसर के आसपास के क्षेत्र की रीयल-टाइम जानकारी प्रदान कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जो संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में मदद कर रही है।
350 से अधिक पुलिसकर्मी भोजशाला के भीतर तैनात किए गए हैं, जबकि 100 पुलिसकर्मी छत पर सुरक्षा के लिए तैनात हैं। थ्रीडी मैपिंग का उपयोग पूरे परिसर की विस्तृत जानकारी के लिए किया गया है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
MP News: भोजशाला का ऐतिहासिक विवाद
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक स्मारक है। हिंदू पक्ष का दावा है कि यह मां सरस्वती का मंदिर है और इसे राजा भोज ने बनवाया था। मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद मानता है और यहां नमाज पढ़ने का अधिकार मांगता है।
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, यहां बसंत पंचमी पर हिंदुओं को पूजा करने और जुमे के दिन मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की इजाजत है। बाकी दिनों में यहां आम लोगों के प्रवेश पर रोक है। लेकिन जिस साल बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, तब यहां तनाव की स्थिति बन जाती है क्योंकि दोनों समुदाय एक ही दिन अपने धार्मिक अधिकारों का प्रयोग करना चाहते हैं।
10 साल बाद ऐसा दुर्लभ अवसर आया है जब जुमे की नमाज और वसंत पंचमी की पूजा एक साथ हो रही है। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और स्थानीय प्रशासन के प्रयासों से इस बार शांतिपूर्ण समाधान निकाला गया है। दोनों समुदायों को अलग-अलग स्थानों पर अपनी धार्मिक गतिविधियां करने की अनुमति दी गई है, जिससे किसी भी तरह के टकराव की संभावना को टाला जा सका है।
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