Middle East Crisis: मिडिल-ईस्ट तनाव से दुनिया भर में बढ़ेगी महंगाई, IMF ने घटाया आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान, भारत पर पड़ेगा असर

मिडिल ईस्ट तनाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर, IMF ने महंगाई बढ़ने और ग्रोथ घटने का अनुमान जारी किया

0

Middle East Crisis: खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका-इजराइल संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने इस साल वैश्विक महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाकर 4.4 प्रतिशत कर दिया है, जबकि जनवरी में यह 3.8 प्रतिशत था। साथ ही वैश्विक वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति और बिगड़ी तो 2026-27 में वृद्धि दर 2 प्रतिशत तक गिर सकती है।

आईएमएफ रिपोर्ट: आर्थिक विकास की सुस्त रफ्तार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने मंगलवार को जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने वैश्विक आर्थिक गति को रोक दिया है। पहले अनुमान के मुताबिक 2026 में 3.3 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद थी, लेकिन अब इसे घटाकर 3.1 प्रतिशत कर दिया गया है। 2025 में अनुमानित 3.4 प्रतिशत वृद्धि से भी यह कम है।

आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री पियरे-ओलिवियर गौरिंचास ने ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि फारस की खाड़ी में संघर्ष अल्पकालिक होने की उम्मीद थी, लेकिन स्थिति इससे कहीं ज्यादा खराब हो सकती है। ऊर्जा की कीमतों में 19 प्रतिशत की हल्की वृद्धि का अनुमान था, लेकिन अब यह और बढ़ सकता है।

महंगाई का दबाव: ईंधन की कीमतों में उछाल

खाड़ी देशों में तनाव के कारण आईएमएफ ने इस साल वैश्विक महंगाई दर के अनुमान को बढ़ाकर 4.4 प्रतिशत कर दिया है। जनवरी में यह 3.8 प्रतिशत था। 2025 के लिए महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

तेल और गैस की कीमतों में तेजी से महंगाई बढ़ रही है। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान के होर्मुज स्ट्रेट बंद करने की आशंका से तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इससे दुनिया भर में ईंधन महंगा हो रहा है।

भविष्य की चेतावनी: ऊर्जा संकट का गहरा प्रभाव

आईएमएफ ने ‘गंभीर परिदृश्य’ की चेतावनी दी है। अगर ऊर्जा संकट अगले साल तक जारी रहा और केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरें बढ़ाने को मजबूर हुए, तो वैश्विक वृद्धि 2026 और 2027 में घटकर 2 प्रतिशत हो सकती है।

यूरोप प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। गरीब और कर्ज में डूबे देश ऊर्जा आयात करते हैं और सरकारी खर्च बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को सहारा देने में असमर्थ हैं।

रूस बनाम पश्चिम: वैश्विक अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर

रूस ऊर्जा निर्यातक होने के नाते उच्च कीमतों से लाभान्वित होगा। 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद प्रतिबंधों से बुरी तरह प्रभावित रूसी अर्थव्यवस्था के लिए आईएमएफ ने अनुमान बढ़ाकर 1.1 प्रतिशत कर दिया है।

अमेरिका की वृद्धि दर के अनुमान को थोड़ा घटाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया गया है। यूरो मुद्रा साझा करने वाले 21 देश इस साल सामूहिक रूप से 1.1 प्रतिशत की वृद्धि हासिल करेंगे, जो 2025 के 1.4 प्रतिशत से कम है।

भारतीय अर्थव्यवस्था: तेल आयात और घाटे का खतरा

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है। मध्य पूर्व, रूस और अमेरिका से आयात होता है। तेल की ऊंची कीमतें भारत के चालू खाता घाटे को बढ़ा सकती हैं। 2026 की पहली तिमाही में यह 20 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

एक्साइज ड्यूटी में कटौती के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रखने से तेल कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है। अगर स्थिति बिगड़ी तो कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ेगा।

एक्सपर्ट राय: युद्धविराम और आगे के जोखिम

आईएमएफ के मुख्य अर्थशास्त्री ने कहा कि अस्थायी युद्धविराम की खबरों के बावजूद कुछ नुकसान पहले ही हो चुका है और आगे के जोखिम बहुत ज्यादा हैं।

भारतीय अर्थशास्त्रियों का कहना है कि तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ेगी और रिजर्व बैंक को ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला करना पड़ सकता है। इससे आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ेगा।

रणनीतिक सुझाव: ऊर्जा विकल्प और ईंधन की बचत

उपभोगताओं को ईंधन बचाने के उपाय अपनाने चाहिए। अनावश्यक यात्रा कम करें, कार पूलिंग करें और अच्छी माइलेज वाली गाड़ियां चुनें।

सरकार को इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस बढ़ाना चाहिए। तेल आयात पर निर्भरता कम करने के लिए रणनीति बनानी होगी।

Middle East Crisis: निष्कर्ष

मिडिल-ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। आईएमएफ ने महंगाई बढ़ने और वृद्धि दर घटने की चेतावनी दी है। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। सरकार और कंपनियों को मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों और नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस बढ़ाना चाहिए।

उपभोक्ताओं को ईंधन बचाने के उपाय अपनाने चाहिए। वैश्विक स्तर पर शांति स्थापित होने से ही स्थिति सामान्य हो सकती है।

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले महीनों में स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल सतर्क रहना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट आईएमएफ की रिपोर्ट और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। आर्थिक अनुमान बदल सकते हैं। नवीनतम अपडेट के लिए आधिकारिक स्रोत चेक करें।

Read More Here

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.