Tech Layoffs 2026: Oracle, Amazon, Meta और Microsoft ने निकाले हजारों कर्मचारी, AI बदलाव से भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर बढ़ा संकट

AI और लागत कटौती के चलते बड़ी टेक कंपनियों ने हजारों नौकरियां खत्म कीं

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Tech Layoffs 2026: टेक इंडस्ट्री के कर्मचारियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां लागत कम करने, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी निवेश और बिजनेस स्ट्रक्चर को नई आकार देने के नाम पर हजारों नौकरियां काट रही हैं।

लेऑफ ट्रैकर्स के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक 210 से ज्यादा टेक कंपनियों ने कुल 1.34 लाख से अधिक कर्मचारियों को नौकरी से बाहर कर दिया है। इनमें सबसे ज्यादा प्रभावित ओरेकल, अमेजन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां हैं। इस छंटनी की सबसे बड़ी मार भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और H-1B वीजा धारकों पर पड़ रही है, जिनके लिए अमेरिका में भविष्य अनिश्चित हो गया है।

Tech Layoffs 2026: ओरेकल की सबसे बड़ी छंटनी

टेक दिग्गज ओरेकल ने 2026 में अब तक की सबसे बड़ी सिंगल लेऑफ की घोषणा करते हुए करीब 30,250 कर्मचारियों को निकाल दिया है। मुख्य रूप से क्लाउड और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर डिवीजन से यह कटौती हुई है।

कंपनी एआई (AI) इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही है और मानव संसाधनों की जगह ऑटोमेशन को बढ़ावा दे रही है। ओरेकल की इस छंटनी में भारत में काम कर रहे हजारों कर्मचारी भी प्रभावित हुए हैं। कंपनी के इस कदम ने पूरे आईटी सेक्टर में हड़कंप मचा दिया है Lights Max।

अमेजन की लागत बचत की रणनीति

ई-कॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग की दिग्गज कंपनी अमेजन ने विभिन्न विभागों से लगभग 19,100 कर्मचारियों की छंटनी की है। कंपनी लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउस ऑपरेशंस में AI-संचालित टूल्स बढ़ा रही है, जिसकी वजह से मानव कार्यबल की जरूरत कम हो गई है।

अमेजन के इस फैसले से वैश्विक स्तर पर कई टीमें प्रभावित हुई हैं। खासकर भारत से अमेरिका गए H-1B वीजा धारक कर्मचारियों के लिए स्थिति बेहद गंभीर है। उन्हें सिर्फ 60 दिनों का समय मिला है जिसमें नया स्पॉन्सर ढूंढना या स्वदेश लौटना होगा।

मेटा का AI फोकस और जॉब कट

मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (पूर्व में फेसबुक) ने इस साल करीब 16,900 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है। इसमें हाल ही में हुई 8,000 छंटनी भी शामिल है। कंपनी 145 बिलियन डॉलर के विशाल AI इंफ्रास्ट्रक्चर बजट को बैलेंस करने के लिए यह कूटनीतिक कदम उठा रही है।

मेटा का फोकस अब पूरी तरह AI और मेटावर्स पर शिफ्ट हो गया है। इस बदलाव ने कई मार्केटिंग, कंटेंट मॉडरेशन और सपोर्ट टीमों को प्रभावित किया है। भारतीय कर्मचारियों की बड़ी संख्या इन विभागों में काम करती है, इसलिए उन पर इसका गहरा असर पड़ा है।

माइक्रोसॉफ्ट की रणनीतिक छंटनी

माइक्रोसॉफ्ट ने नॉन-कोर प्रोजेक्ट्स को बंद करके AI इंजीनियरिंग पर पूरा फोकस करने के लिए 8,750 से ज्यादा नौकरियां खत्म की हैं। कंपनी सत्या नाडेला के नेतृत्व में AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बना रही है।

इस छंटनी से सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, सेल्स और सपोर्ट टीमों पर सीधा असर पड़ा है। माइक्रोसॉफ्ट की यह रणनीति भविष्य की तैयारी के रूप में देखी जा रही है, लेकिन वर्तमान में हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है।

भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स पर मंडराता संकट

अमेरिकी टेक कंपनियों की इन छंटनियों की सबसे ज्यादा मार भारतीय कर्मचारियों पर पड़ रही है। H-1B वीजा पर काम कर रहे हजारों भारतीयों को अचानक नौकरी गंवाने के बाद स्वदेश वापसी का खतरा मंडरा रहा है।

भारत में भी आईटी कंपनियां सतर्क हो गई हैं और कई कंपनियों ने हायरिंग फ्रीज लगा दिया है तथा वे AI टूल्स को बढ़ावा दे रही हैं। नास्कॉम के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय आईटी सेक्टर में नई नौकरियों की संख्या पिछले सालों की तुलना में काफी कम हो गई है Lights Max Lights Max।

वैश्विक छंटनी के पीछे मुख्य कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में छंटनी का प्रमुख कारण AI का तेजी से बढ़ता उपयोग है। कंपनियां रिपेटिटिव और रूटीन कामों को AI पर शिफ्ट कर रही हैं, जिससे मानव संसाधनों की जरूरत घट रही है।

इसके अलावा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, उच्च ब्याज दरें और वैश्विक निवेशकों का कूटनीतिक दबाव भी कंपनियों को लागत कम करने के लिए मजबूर कर रहा है। कई कंपनियां AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश कर रही हैं, जिसके लिए उन्हें नकदी की सख्त जरूरत है।

प्रभावित कर्मचारियों पर पड़ने वाला असर

इन छंटनियों से न सिर्फ आर्थिक नुकसान हो रहा है बल्कि कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। कई कर्मचारी लंबे समय से कंपनी के साथ जुड़े थे और अचानक नौकरी जाना उनके लिए सदमा बन गया है।

भारत में लौट रहे कर्मचारियों के लिए नई नौकरी ढूंढना काफी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यहां भी मार्केट स्लो चल रहा है। युवा प्रोफेशनल्स को कौशल अपग्रेड करने और AI, मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने की सलाह दी जा रही है।

सरकार और उद्योग जगत की भूमिका

केंद्र सरकार और नास्कॉम इस वर्तमान स्थिति पर बारीक नजर रखे हुए हैं। कुछ राज्यों में स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम्स को तेज किया जा रहा है ताकि प्रभावित कर्मचारी नए अवसरों के लिए कूटनीतिक रूप से तैयार हो सकें।

उद्योग जगत का मानना है कि AI के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियां जाएंगी लेकिन नई स्किल्स वाले क्षेत्रों में अवसर भी बढ़ेंगे। कंपनियों को रिस्किलिंग और अपस्किलिंग पर अब ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

भविष्य की मुख्य चुनौतियां और नए अवसर

2026 की यह छंटनी टेक इंडस्ट्री के व्यापक ट्रांसफॉर्मेशन का हिस्सा है। कंपनियां AI-फर्स्ट अप्रोच अपना रही हैं, जो भविष्य में ज्यादा कुशल और प्रॉफिटेबल बिजनेस मॉडल बना सकती है।

हालांकि, शॉर्ट टर्म में कर्मचारियों के लिए यह बेहद मुश्किल समय है। विशेषज्ञ कूटनीतिक सलाह देते हैं कि कर्मचारियों को निरंतर सीखने, नए डिजिटल टूल्स सीखने और नेटवर्किंग पर फोकस करना चाहिए।

क्या कहते हैं इस क्षेत्र के विशेषज्ञ

आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि यह छंटनी आर्थिक चक्र का हिस्सा है। साल 2022-23 में भी ऐसी छंटनी हुई थी, लेकिन उसके बाद बाजार में रिकवरी देखी गई थी। साल 2026 में AI के कारण तकनीकी बदलाव काफी तेज है, इसलिए कर्मचारियों को समय के साथ खुद को अपडेट रखना होगा।

निष्कर्ष

2026 में ओरेकल, अमेजन, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों की छंटनी ने पूरे टेक सेक्टर को हिला दिया है। जबकि कंपनियां भविष्य की तैयारी कर रही हैं, कर्मचारियों के लिए यह बड़ा चुनौती भरा समय है। भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले समूह के रूप में देखा जा रहा है। अब जरूरत है स्किल अपग्रेडेशन, सरकारी सपोर्ट और उद्योग की सामूहिक जिम्मेदारी की ताकि इस संकट को कूटनीतिक रूप से नए अवसर में बदला जा सके। टेक सेक्टर की यह नई वास्तविकता सभी हितधारकों को सोचने पर मजबूर कर रही है।

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