Lancet Study: भारत में ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित 13% महिलाओं में फैला ‘मेटास्टेसिस’, लैंसेट की रिपोर्ट में हैरान करने वाला खुलासा
Lancet Study: भारत में ब्रेस्ट कैंसर पीड़ित 13% महिलाओं में फैला 'मेटास्टेसिस
Lancet Study: भारत में महिलाओं के बीच तेजी से बढ़ती ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर) की समस्या को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली मेडिकल रिपोर्ट सामने आई है। प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन के अनुसार, भारत में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित लगभग 13 प्रतिशत महिलाओं में ‘मेटास्टेसिस’ की गंभीर समस्या पाई गई है। आसान शब्दों में कहें तो इन मरीजों में कैंसर सिर्फ स्तनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके शरीर के दूसरे अंगों में भी फैल चुका है। सोमवार, 25 मई 2026 को सार्वजनिक हुई इस रिपोर्ट ने चिकित्सा जगत और आम लोगों के बीच एक नई चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि कैंसर का यह रूप सबसे घातक माना जाता है।
Lancet Study: क्या होता है ‘मेटास्टेसिस’ और यह कितना खतरनाक है?
कैंसर की भाषा में ‘मेटास्टेसिस’ उस एडवांस स्टेज को कहा जाता है, जब कैंसर की कोशिकाएं (Cancer Cells) ट्यूमर वाली मूल जगह से टूटकर खून या लिम्फ सिस्टम के जरिए शरीर के अन्य हिस्सों में पहुंच जाती हैं। वहां जाकर ये कोशिकाएं नए ट्यूमर बनाने लगती हैं।
जब ब्रेस्ट कैंसर में मेटास्टेसिस होता है, तो इसे ‘मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर’ या स्टेज-4 कैंसर कहा जाता है। इस स्थिति में बीमारी का इलाज करना और उसे नियंत्रित करना डॉक्टरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है, क्योंकि संक्रमण एक साथ कई अंगों को अपना निशाना बना चुका होता है।
76 हजार से ज्यादा महिलाओं के डेटा पर हुआ बड़ा शोध
लैंसेट पत्रिका में छपी यह स्टडी कोई सामान्य सर्वे नहीं है, बल्कि इसे बेहद व्यापक स्तर पर तैयार किया गया है। शोधकर्ताओं की टीम ने भारत के ‘राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम’ के तहत जुटाए गए कुल 76,356 कैंसर पीड़ित महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण किया है।
इस बड़े वैज्ञानिक अध्ययन में मुख्य रूप से उन महिलाओं के डेटा को शामिल किया गया था, जिनमें साल 2009 से लेकर 2020 के बीच पहली बार ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों की पहचान हुई थी। जांच के बाद आंकड़ों से साफ हुआ कि कुल मरीजों में से 12.96 फीसदी (लगभग 13 प्रतिशत) महिलाएं मेटास्टेसिस की गिरफ्त में आ चुकी थीं।
हड्डियों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है कैंसर
इस शोध से एक और बेहद जरूरी और ध्यान देने वाली बात निकलकर सामने आई है कि जब स्तन कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैलता है, तो इसका सबसे पसंदीदा और आम ठिकाना मानव शरीर की हड्डियां (Bones) होती हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, मेटास्टेसिस के जितने भी कुल मामले दर्ज किए गए, उनमें से अकेले 25.1 प्रतिशत हिस्सेदारी हड्डियों की पाई गई। हड्डियों के अलावा यह कैंसर फेफड़ों, लिवर और मस्तिष्क (Brain) को भी अपनी चपेट में ले लेता है, जिससे मरीज की हालत लगातार बिगड़ती चली जाती है।
हाल के सालों में तेजी से बढ़ा है बीमारी का जोखिम
इस रिसर्च को करने वाले वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की टीम ने समय के साथ बीमारी के बदलते हुए ट्रेंड (रुझान) को भी नोट किया है। उन्होंने तुलनात्मक अध्ययन में पाया कि साल 2009 से 2014 के दौर के मुकाबले, साल 2015 से 2020 के बीच सामने आए नए मामलों में कैंसर के शरीर में फैलने का रिस्क काफी ज्यादा देखा गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मेटास्टेटिक स्तन कैंसर का सीधा संबंध मुख्य रूप से ट्यूमर के बढ़ते वजन (Tumor Burden) और बीमारी के तेजी से आक्रामक होने के संकेतों से पाया गया है। हालांकि, टीम ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि राष्ट्रीय स्तर पर इस बीमारी को बढ़ाने वाले सटीक कारकों के पुख्ता सबूत अभी भी काफी सीमित हैं, जिन पर और रिसर्च होना बाकी है।
Lancet Study: उम्र से कोई लेना-देना नहीं, ट्यूमर की बनावट है असली वजह
आमतौर पर आम लोगों और कई डॉक्टरों के बीच भी यह धारणा बनी हुई थी कि बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं में कैंसर के फैलने का खतरा ज्यादा होता है। लेकिन लैंसेट की इस नई स्टडी ने इस पुरानी थ्योरी को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।
अध्ययन के नतीजों से यह साफ हो गया है कि कैंसर के शरीर में फैलने (मेटास्टेसिस) का मरीज की उम्र से कोई खास या सीधा संबंध नहीं है। यह जोखिम पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि महिला के स्तन में मौजूद ट्यूमर की जैविक बनावट (Biological Structure) कैसी है। अगर ट्यूमर की प्रकृति ज्यादा आक्रामक है, तो वह कम उम्र की महिला के शरीर में भी तेजी से फैल सकता है।
Lancet Study: समय पर जांच और जागरूकता ही एकमात्र बचाव
भारत में अक्सर देखा जाता है कि महिलाएं लोक-लाज या अज्ञानता के कारण शुरुआती स्टेज में स्तनों में होने वाली गांठ या दर्द को छिपाती हैं। जब तक वे डॉक्टर के पास पहुंचती हैं, तब तक कैंसर एडवांस स्टेज में पहुंच चुका होता है। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर स्टेज-1 या स्टेज-2 में ही बीमारी पकड़ में आ जाए, तो सही इलाज से मरीज को पूरी तरह ठीक किया जा सकता है और मेटास्टेसिस के खतरे को टाला जा सकता है।
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी ‘द लैंसेट’ की हालिया मेडिकल रिपोर्ट और सामान्य स्वास्थ्य जानकारियों पर आधारित है। यह किसी भी तरह से योग्य डॉक्टर या विशेषज्ञ की पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। अपनी सेहत से जुड़ी किसी भी समस्या, लक्षणों या स्तन में किसी भी तरह की गांठ दिखने पर तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर या ऑन्कोलॉजिस्ट से संपर्क करें और उचित जांच करवाएं।
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