Kupwara Encounter: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में LoC पर घुसपैठ की कोशिश नाकाम, दो आतंकी ढेर होने की खबर
कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में LoC पर मुठभेड़, घुसपैठ की कोशिश के बाद तलाशी अभियान जारी
Kupwara Encounter: जम्मू-कश्मीर के सीमांत जिले कुपवाड़ा में शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 की सुबह नियंत्रण रेखा (LoC) पर भारतीय सेना और सुरक्षा बलों ने सीमा पार से प्रायोजित घुसपैठ की एक बड़ी और नापाक साजिश को विफल कर दिया है। केरन सेक्टर के जमगुंड अग्रिम इलाके में सीमा पार से भारतीय सीमा में दाखिल होने की कोशिश कर रहे हथियाबंद आतंकियों के एक समूह को अग्रिम मोर्चे पर तैनात सतर्क जवानों ने घेर लिया। संदिग्ध गतिविधि भांपते ही सुरक्षा बलों द्वारा दी गई चुनौती के बाद आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में जवानों ने सटीक मोर्चा संभालते हुए भीषण मुठभेड़ शुरू की। प्रारंभिक रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस त्वरित और साहसिक सैन्य कार्रवाई में अब तक दो विदेशी आतंकवादियों के मारे जाने की सूचना है। संपूर्ण इलाके को चारों ओर से सील कर दिया गया है और घने जंगलों में छिपे अन्य संभावित संदिग्धों की तलाश के लिए सघन कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (CASO) चलाया जा रहा है।
Kupwara Encounter: केरन सेक्टर के जमगुंड इलाके में कैसे शुरू हुआ सैन्य ऑपरेशन?
नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की यह घटना शनिवार के तड़के घने कोहरे और कम दृश्यता के बीच घटित हुई। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, केरन सेक्टर के जमगुंड इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा की बाड़ (Anti-Infiltration Obstacle System) के समीप तैनात भारतीय सेना के गश्ती दल को आधुनिक निगरानी उपकरणों और थर्मल इमेजर्स के जरिए तीन से चार संदिग्ध व्यक्तियों की हलचल दिखाई दी। आतंकी घने जंगलों, प्राकृतिक खड्डों और धुंध की आड़ लेकर भारतीय सीमा में प्रवेश करने का प्रयास कर रहे थे।
जवानों द्वारा घुसपैठियों को आत्मसमर्पण करने की अंतिम चेतावनी दी गई, किंतु आतंकियों ने छिपकर सेना की गश्ती टुकड़ी पर स्वचालित हथियारों से भारी गोलाबारी शुरू कर दी और ग्रेनेड दागे। भारतीय सेना के जवानों ने तत्परता दिखाते हुए जवाबी प्रहार किया और आतंकियों के बचने के सभी पारंपरिक निकास मार्गों को बंद कर दिया। शुरुआती कुछ घंटों की भीषण गोलीबारी के बाद मुठभेड़ स्थल से गोलीबारी की तीव्रता कम हुई, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को पूरी तरह अपने नियंत्रण में लेकर अग्रिम जांच शुरू की।
दो आतंकवादियों के मारे जाने की प्रारंभिक पुष्टि, पहचान प्रक्रिया जारी
मुठभेड़ स्थल से प्राप्त प्राथमिक रक्षा रिपोर्टों के अनुसार, सेना के सटीक निशाने में आकर दो घुसपैठिए आतंकी मौके पर ही ढेर हो गए हैं। मारे गए आतंकवादियों के शव नियंत्रण रेखा के अग्रिम ढलान पर देखे गए हैं, जिन्हें निकालने और सुरक्षित कब्जे में लेने की प्रक्रिया चल रही है। प्रारंभिक आकलन से संकेत मिलता है कि मारे गए आतंकी अत्यधिक प्रशिक्षित और विदेशी मूल के हो सकते हैं, जिन्हें घाटी में शांति भंग करने और आगामी शीत ऋतु से पूर्व आतंकी गतिविधियों को हवा देने के लिए सीमा पार के लॉन्च पैड्स से भेजा गया था।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि मारे गए आतंकियों की सटीक पहचान, उनके संगठन (लश्कर-ए-तैयबा अथवा जैश-ए-मोहम्मद) और उनके पास से बरामद हथियारों, गोला-बारूद व संचार उपकरणों का विस्तृत विवरण ऑपरेशन पूरी तरह समाप्त होने और तलाशी पूरी होने के बाद ही आधिकारिक रूप से साझा किया जाएगा। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आईईडी या विस्फोटक जाल के खतरे को देखते हुए बम निरोधक दस्ते को भी एहतियातन तैयार रखा गया है।
घने जंगलों और दुर्गम नालों में व्यापक तलाशी अभियान जारी
जमगुंड और केरन के आसपास के समूचे वन क्षेत्र में सेना की राष्ट्रीय राइफल्स, विशेष बल (पैरा कमांडो) और जम्मू-कश्मीर पुलिस के विशेष अभियान समूह (SOG) की संयुक्त टुकड़ियों ने एक व्यापक घेराबंदी स्थापित कर दी है। चूंकि नियंत्रण रेखा का यह इलाका अत्यधिक बीहड़, पथरीला और चीड़ के घने जंगलों से घिरा हुआ है, इसलिए छिपे हुए आतंकियों की टोह लेने के लिए आधुनिक ड्रोन कैमरों और खोजी कुत्तों (स्निफर डॉग्स) की सहायता ली जा रही है।
सैन्य कमांडरों की प्राथमिक रणनीति यह सुनिश्चित करना है कि यदि घुसपैठिए दल में दो से अधिक आतंकी शामिल थे, तो वे किसी भी सूरत में भीतरी रिहायशी बस्तियों या घने जंगलों की गहराई में न भाग सकें। इलाके के सभी प्राकृतिक नालों, दर्रों और पारंपरिक रास्तों पर अतिरिक्त चौकियां स्थापित कर दी गई हैं तथा सीमांत गांवों के नागरिकों से सुरक्षा कारणों के चलते जंगलों की ओर न जाने की अपील की गई है।
सामरिक दृष्टि से क्यों अत्यधिक संवेदनशील है कुपवाड़ा का केरन सेक्टर?
उत्तरी कश्मीर का कुपवाड़ा जिला ऐतिहासिक और सामरिक रूप से पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ का सबसे संवेदनशील गलियारा माना जाता रहा है। केरन, माछिल और तंगधार जैसे सेक्टर सीधे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के नीलम घाटी क्षेत्र से जुड़ते हैं। नियंत्रण रेखा के ठीक उस पार पाकिस्तानी सेना की अग्रिम चौकियों की छत्रछाया में कई सक्रिय आतंकी लॉन्च पैड संचालित होते हैं, जहां भारी हथियारों से लैस आतंकियों को घुसपैठ के लिए तैयार रखा जाता है।
अक्टूबर और नवंबर का महीना इन घुसपैठियों के लिए सामरिक रूप से आखिरी अवसर माना जाता है, क्योंकि नवंबर के अंत तक पीर पंजाल और शमशाबारी पर्वतमाला के ऊंचे दर्रे भारी बर्फबारी के कारण पूरी तरह बंद हो जाते हैं। दर्रे बंद होने से पहले सीमा पार के हैंडलर्स भारी हथियारों और गोला-बारूद के साथ आतंकियों के दलों को कश्मीर घाटी में धकेलने की हताश कोशिशें करते हैं। भारतीय सेना ने इस खतरे को भांपते हुए नियंत्रण रेखा पर मल्टी-टियर सर्विलांस ग्रिड, नाइट विजन डिवाइस और ग्राउंड सेंसर का एक मजबूत जाल बिछा रखा है, जिसके कारण आतंकियों की हर हलचल तुरंत पकड़ में आ जाती है।
Kupwara Encounter: घाटी में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की अटूट मुस्तैदी
केरन सेक्टर में हुई यह ताजा मुठभेड़ भारतीय सेना की शून्य-सहनशीलता (Zero-Tolerance) नीति और सीमावर्ती रक्षा ग्रिड की अभेद्य सतर्कता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। हाल के दिनों में कश्मीर के आंतरिक इलाकों में आतंकी हिंसा में आई भारी कमी और विकास कार्यों की गति से बौखलाए सीमा पार के आका घाटी के शांतिपूर्ण माहौल को बिगाड़ने का निरंतर षड्यंत्र रच रहे हैं। भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस के बीच मजबूत खुफिया समन्वय ने घुसपैठ की अधिकांश कोशिशों को नियंत्रण रेखा पर ही समाप्त करने में सफलता हासिल की है।
श्रीनगर स्थित चिनार कोर और उधमपुर स्थित उत्तरी कमान के वरिष्ठ अधिकारी केरन सेक्टर के इस तलाशी अभियान की सीधी निगरानी कर रहे हैं। सैन्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूरे क्षेत्र की भौतिक जांच पूरी नहीं हो जाती और जमीन पर मौजूद हर खतरे का सफाया नहीं कर दिया जाता, तब तक जमगुंड के जंगलों में ऑपरेशन पूरी सघनता के साथ जारी रहेगा। विस्तृत आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति तलाशी अभियान के अंतिम चरण में जारी की जाएगी।
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