Kerala Cleric Controversy: केरल में मौलवी के बयान पर विवाद, महिलाओं के सार्वजनिक जीवन को लेकर सियासी घमासान

ग्रैंड मुफ्ती की टिप्पणी के बचाव में IUML, CPIM ने धार्मिक रूढ़िवादिता पर बोला हमला

0

Kerala Cleric Controversy: केरल के कोच्चि में आयोजित एक धार्मिक सम्मेलन के दौरान ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद द्वारा महिलाओं की सामाजिक भूमिका पर दी गई टिप्पणी ने राज्य के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। मौलवी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं को अपने घरों की चारदीवारी तक सीमित रहना चाहिए और उनका सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि महिलाओं की सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी से समाज में ‘बड़ी तबाही’ हो सकती है और इसी कारण धार्मिक व्यवस्था में पर्दा प्रथा का प्रावधान किया गया है।

इस रूढ़िवादी टिप्पणी के सामने आने के बाद केरल की प्रमुख राजनीतिक पार्टी और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) की सबसे बड़ी घटक इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) मौलवी के बचाव में उतर आई है। वहीं, सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के घटक दलों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और महिला संगठनों ने इस बयान को लैंगिक समानता और संवैधानिक मूल्यों पर खुला हमला करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया है।

Kerala Cleric Controversy: हब्बुल रसूल कॉन्फ्रेंस में दिया गया बयान और धार्मिक तर्क

कोच्चि में आयोजित ‘हब्बुल रसूल कॉन्फ्रेंस’ के मंच से बोलते हुए शेख अबूबकर अहमद ने कहा कि महिलाओं के लिए घर के भीतर रहना ही सबसे सुरक्षित और श्रेष्ठ मार्ग है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि धार्मिक विद्वान पिछले 100 वर्षों से समाज को यही संदेश देते आ रहे हैं और इसी व्यवस्था के चलते महिलाओं का सम्मान और गरिमा सुरक्षित रही है।

मौलवी ने अपने वक्तव्य में आगे कहा कि कुरान और हदीस की परंपराओं में भी महिलाओं की मर्यादा बनाए रखने के लिए पर्दे और घरेलू जिम्मेदारियों को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जब महिलाएं सार्वजनिक जीवन, नौकरियों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अनियंत्रित रूप से प्रवेश करती हैं, तो इससे सामाजिक संतुलन बिगड़ता है और पारिवारिक ढांचे में विकृतियां पैदा होती हैं। इस बयान के सार्वजनिक होते ही केरल की प्रबुद्ध जनता और सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई।

आईयूएमएल का बचाव: ‘यह विद्वतापूर्ण राय और सुरक्षा की चिंता थी’

बयान पर चौतरफा आलोचनाओं के बीच इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के प्रदेश अध्यक्ष पनाक्कड़ सादिक अली शिहाब थंगल ने मौलवी का खुला बचाव किया। पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए थंगल ने कहा कि यह एक धार्मिक विद्वान का अपना अध्ययन और वैचारिक दृष्टिकोण है। उन्होंने कहा कि चूंकि यह बात एक सम्मानित धार्मिक नेता द्वारा कही गई है, इसलिए वे इस पर कोई सीधी नकारात्मक टिप्पणी नहीं करना चाहते।

जब थंगल से पूछा गया कि क्या 21वीं सदी के आधुनिक समाज में महिलाओं को घरों में कैद रहने की सलाह देना उचित है, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि धर्मगुरु संभवतः वर्तमान समय में महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों और सुरक्षा की चिंताओं को लेकर अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, इसलिए शायद इसी चिंता के वशीभूत होकर उन्होंने ऐसा कहा होगा और ऐसे संवेदनशील मामलों में समाज को संयम बरतना चाहिए।

सीपीआईएम का पलटवार: ‘धार्मिक मान्यताओं से महिलाओं की आजादी नहीं छीनी जा सकती’

दूसरी ओर, सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक पी. जयराजन ने इस बयान और आईयूएमएल के रुख पर तीखा हमला बोला। जयराजन ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी निजी धार्मिक मान्यताओं का पालन करने और उस पर विश्वास रखने का पूरा संवैधानिक अधिकार है, किंतु किसी भी धर्म या रूढ़िवादी विचार को यह तय करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता कि महिलाएं समाज में कैसे रहें, वे किस पेशे में जाएं या वे सार्वजनिक जीवन में हिस्सा लें अथवा नहीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि एक प्रगतिशील और लोकतांत्रिक समाज का यह प्राथमिक कर्तव्य है कि वह महिलाओं की स्वायत्तता, लैंगिक समानता और उनके अधिकारों की बिना किसी समझौते के रक्षा करे। जयराजन ने कहा कि धार्मिक रूढ़िवादिता की आड़ में महिलाओं को मध्ययुगीन युग में धकेलने की किसी भी कोशिश का लोकतांत्रिक ताकतों द्वारा पुरजोर विरोध किया जाएगा।

यूडीएफ गठबंधन में असहजता और विपक्षी हमलों की धार

आईयूएमएल द्वारा इस विवादित बयान का सार्वजनिक रूप से समर्थन किए जाने के बाद विपक्षी खेमे ने कांग्रेस पार्टी को भी कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ में आईयूएमएल दूसरा सबसे बड़ा घटक दल है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल जैसे राज्य में, जहां महिला साक्षरता दर 95 प्रतिशत से अधिक है और सार्वजनिक प्रशासन, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में महिलाओं का व्यापक प्रभाव है, वहां ऐसे बयानों का बचाव करना कांग्रेस और उसके सहयोगियों के लिए राजनीतिक रूप से असहज स्थिति पैदा कर रहा है।

सत्तारूढ़ वाम मोर्चे के नेताओं ने आरोप लगाया है कि आईयूएमएल आगामी चुनावों और रूढ़िवादी वोट बैंक को साधने के लिए महिलाओं के बुनियादी अधिकारों और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के तहत मिली स्वतंत्रता की बलि चढ़ा रही है।

Kerala Cleric Controversy: संवैधानिक समानता बनाम धार्मिक रूढ़िवादिता की नई बहस

केरल हमेशा से अपने प्रगतिशील सामाजिक सुधारों, नवजागरण आंदोलनों और महिला सशक्तीकरण के लिए पूरे देश में एक मॉडल राज्य के रूप में देखा जाता रहा है। इस पृष्ठभूमि में एक शीर्ष धर्मगुरु द्वारा महिलाओं को घर तक सीमित रखने की वकालत करना और एक मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी द्वारा उसका समर्थन किया जाना यह दर्शाता है कि धार्मिक रूढ़िवादिता और आधुनिक लोकतांत्रिक मूल्यों के बीच का टकराव अभी समाप्त नहीं हुआ है।

महिला अधिकार संगठनों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर महिलाओं की आवाजाही और उनके कार्यक्षेत्र को सीमित करना पितृसत्तात्मक मानसिकता का परिचायक है। फिलहाल यह मुद्दा राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में गरमाया हुआ है और आने वाले दिनों में विधानसभा के भीतर तथा बाहर लैंगिक न्याय और धर्मनिरपेक्ष राजनीति को लेकर राजनीतिक दलों के बीच वाकयुद्ध और तेज होने की पूरी संभावना है।

Read More Here

Gold-Silver Price 2 September 2026: वैश्विक दबाव से सोने की कीमतों में नरमी, जानें 24K, 22K गोल्ड और 1 किलो चांदी के ताजा खुदरा रेट

Petrol-Diesel Price 2 September 2026: देश के प्रमुख शहरों में ईंधन की कीमतें स्थिर, जानें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में 1 लीटर का ताजा भाव

Aaj Ka Rashifal 2 September 2026: मेष से लेकर मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक भविष्यफल, जानें करियर, धन और निजी जीवन का हाल

Delhi Free Solar Panel Scheme: दिल्ली में 2.3 लाख घरों को मुफ्त मिलेगा सोलर पैनल, मेंटेनेंस का खर्च भी उठाएगी सरकार

आपको यह भी पसंद आ सकता है
Leave A Reply

Your email address will not be published.