Jharkhand Students Protest: हाईकोर्ट के फैसले के बाद भड़के छात्र, रविंद्र पासवान ने सरकार पर लगाया धोखाधड़ी का आरोप, 24 जिलों में 21 अगस्त को सीएम हेमंत सोरेन का पुतला दहन

हाईकोर्ट के फैसले से नाराज छात्रों ने 21 अगस्त को 24 जिलों में पुतला दहन का ऐलान किया

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Jharkhand Students Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को रद्द किए जाने के मामले में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए स्थगनादेश (Stay Order) के बाद राज्य का सियासी और छात्र आंदोलन का पारा अचानक चढ़ गया है। रांची में छात्र नेता रविंद्र पासवान ने एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर छात्रों की पीठ में छुरा घोंपने और राजनीतिक धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने केवल छात्र आंदोलन को समाप्त करवाने के लिए भर्ती परीक्षाएं रद्द करने का दिखावा किया था, लेकिन अदालत में सरकार के वकीलों ने मजबूती से पक्ष नहीं रखा। इस अदालती रोक के विरोध में जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच ने 21 अगस्त को झारखंड के सभी 24 जिलों में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन करने का खुला ऐलान कर दिया है।
छात्र नेताओं का कहना है कि राज्य के युवा पिछले 26 दिनों से राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और अनशन कर रहे थे। इसके बाद सरकार ने दबाव में आकर 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और 23 अन्य परीक्षाओं की जांच कराने का फैसला सार्वजनिक किया था। हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा सरकार के इस फैसले पर रोक लगाए जाने के बाद आंदोलनकारी छात्र खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

Jharkhand Students Protest: हाईकोर्ट में सरकारी वकील के रुख पर सवाल, छात्रों ने जताई गहरी नाराजगी

प्रेस वार्ता के दौरान छात्र नेता रविंद्र पासवान ने सरकार की नीयत और कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र समाज न्यायपालिका और अदालत के आदेश का पूरा सम्मान करता है, लेकिन सरकार का दोहरा रवैया पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब मामला उच्च न्यायालय की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया, तो सरकार की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने छात्रों के हित में प्रभावी दलीलें ही प्रस्तुत नहीं कीं।
रविंद्र पासवान ने कहा कि छात्रों ने राज्य के मुखिया पर भरोसा किया था कि वे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं करेंगे, लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि सरकार छात्रों के साथ केवल राजनीति कर रही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि सरकार छात्रों के साथ राजनीति करेगी, तो अब छात्रों को भी सड़क से लेकर लोकतांत्रिक मंचों तक राजनीतिक रूप से जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र मंच इतना मजबूत हो चुका है कि यदि आवश्यकता पड़ी तो 24 घंटे के भीतर लाखों की संख्या में छात्रों को दोबारा राजधानी की सड़कों पर उतारा जा सकता है।

24 जिलों में पुतला दहन का ऐलान और 60 दिन के अल्टीमेटम पर पुनर्विचार

छात्र मंच ने घोषणा की है कि विरोध की इस नई लहर के तहत राज्य भर के सभी 24 जिला मुख्यालयों पर मुख्यमंत्री का पुतला फूंका जाएगा। छात्र संगठनों का कहना है कि परीक्षा रद्द करने की अधिसूचना जारी करते समय सरकार ने जो आक्रामकता और प्रतिबद्धता दिखाई थी, वह अदालत की दहलीज पर गायब नजर आई। छात्रों ने यह संदेश दिया है कि आंदोलन को खत्म समझना सरकार की सबसे बड़ी भूल होगी।
आंदोलनकारी नेताओं ने कहा कि सरकार को व्यवस्थागत सुधार के लिए जो 60 दिनों (दो महीने) का समय दिया गया था, यदि सरकार ने अपनी मंशा स्पष्ट नहीं की और परीक्षा तंत्र में शामिल माफियाओं पर ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की, तो यह मियाद पूरी होने से पहले ही राज्यव्यापी उग्र आंदोलन का बिगुल फूंक दिया जाएगा। मंच ने मांग की है कि भर्ती परीक्षाओं में धांधली की निष्पक्ष जांच कराई जाए और पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए।

Jharkhand Students Protest: झारखंड की राजनीति में बढ़ा तनाव, छात्र आंदोलन ने लिया नया मोड़

भर्ती परीक्षाओं को लेकर उत्पन्न यह कानूनी और प्रशासनिक संकट अब झारखंड की राज्य राजनीति में बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक तरफ जहां परीक्षाओं के रद्द होने से प्रभावित चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्तियों को बचाने के लिए कानूनी शरण ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय से परीक्षा सुधार और पारदर्शिता की मांग कर रहे लाखों युवा सरकार के रुख से नाराज हैं। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है।
छात्र नेताओं ने पूरे राज्य के युवाओं से एकजुट रहने का आह्वान किया है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल किसी एक परीक्षा या नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड के युवाओं के स्वाभिमान और राज्य की भर्ती संस्थाओं में पारदर्शी व्यवस्था स्थापित करने की निर्णायक जंग है। आने वाले दिनों में पुतला दहन और छात्र संगठनों की अगली रणनीतिक बैठक से यह स्पष्ट होगा कि यह विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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