जामिया में 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का ऐलान, 15 दिन की शर्त पर अब भी विवाद

जामिया प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव संविधान की मंजूरी के 15 दिन के भीतर कराने का आदेश दिया

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JMI Election News: देश के प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शुमार जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI) में पिछले दो हफ्तों से छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर चल रहा जोरदार आंदोलन आखिरकार एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। परिसर में छात्रों की लगातार भूख हड़ताल, धरने और बढ़ते तनाव के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ा नीतिगत कदम उठाते हुए छात्रसंघ चुनाव कराने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, छात्रसंघ के नए संविधान को मंजूरी मिलने के ठीक 15 दिनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन ने आंदोलनकारी विद्यार्थियों पर की गई दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने का ऐलान भी किया है। हालांकि, चुनाव की निश्चित तारीख की घोषणा न होने और प्रशासन द्वारा रखी गई कुछ शर्तों को लेकर छात्रों का असंतोष अब भी बना हुआ है।

JMI Election News: दो दशक का लंबा इंतजार, 2006 से भंग पड़ा है निर्वाचित छात्रसंघ

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इतिहास में छात्र राजनीति और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का एक लंबा और समृद्ध दौर रहा है। हालांकि, विश्वविद्यालय परिसर में आखिरी बार वर्ष 2005 में निष्पक्ष छात्रसंघ चुनाव संपन्न हुए थे। इसके बाद वर्ष 2006 में तत्कालीन प्रशासन ने कुछ आंतरिक विवादों और अनुशासनात्मक कारणों का हवाला देते हुए छात्रसंघ को औपचारिक रूप से भंग कर दिया था। तब से लेकर आज तक यानी लगभग 20 वर्षों से परिसर में लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई छात्र परिषद की व्यवस्था पूरी तरह ठप पड़ी थी।

छात्र संगठनों और सामान्य विद्यार्थियों का लंबे समय से तर्क रहा है कि विश्वविद्यालय में एक निर्वाचित संस्था का न होना छात्रों के अधिकारों को कमजोर करता है। छात्रसंघ के अभाव में फीस वृद्धि, छात्रावासों की कमी, पुस्तकालय सुविधाओं और मेस जैसे बुनियादी मुद्दों पर विद्यार्थियों की आवाज शीर्ष प्रशासनिक मंचों तक नहीं पहुंच पाती थी। इसी लोकतांत्रिक अधिकार को दोबारा हासिल करने के लिए समय-समय पर आवाजें उठती रहीं, जिसने इस बार एक बड़े और व्यापक आंदोलन का रूप ले लिया।

संविधान मंजूरी के 15 दिन बाद मतदान का वादा, तारीख पर फंसा पेंच

विश्वविद्यालय के कार्यवाहक रजिस्ट्रार द्वारा 26 अक्टूबर को देर शाम जारी किए गए आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रशासन छात्रसंघ के गठन के पक्ष में है। आदेश के तहत छात्रसंघ के प्रस्तावित संविधान का प्रारूप अंतिम रूप से स्वीकृत होते ही उसके 15 दिनों के भीतर नामांकन, प्रचार और मतदान की प्रक्रिया आयोजित कर दी जाएगी।

हालांकि, इस आदेश ने पूरी तरह से छात्रों के संदेह को दूर नहीं किया है। आदेश में इस बात का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि संविधान को स्वीकृति देने वाली समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट किस तारीख तक सौंपेगी। प्रदर्शनकारी छात्र इसे केवल आंदोलन को कमजोर करने और समय खींचने का प्रशासनिक पैंतरा मान रहे हैं। छात्रों की सीधी मांग है कि प्रशासन एक ठोस कैलेंडर जारी करे, जिसमें संविधान की स्वीकृति और मतदान का निश्चित दिन पहले से तय हो।

निलंबन और कारण बताओ नोटिस रद्द, लेकिन माफी मांगने की शर्त पर तकरार

छात्रों के निरंतर दबाव को देखते हुए प्रशासन ने राहत भरा कदम उठाते हुए उन सभी छात्रों के निलंबन आदेश रद्द करने की घोषणा की है, जिन्हें आंदोलन के दौरान निष्कासित या प्रतिबंधित किया गया था। साथ ही, जारी किए गए सभी कारण बताओ नोटिस भी निरस्त कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, परिसर में सुरक्षाकर्मियों और निजी सुरक्षा गार्डों द्वारा छात्रों के साथ की गई कथित धक्का-मुक्की और ज्यादती की निष्पक्ष जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने का भी आश्वासन दिया गया है।

प्रशासन ने इन रियायतों के साथ एक कड़ी शर्त भी जोड़ दी है। आदेश में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों, शिक्षकों और प्रशासनिक संस्था के विरुद्ध सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर की गई कथित अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणियों को छात्रों को तुरंत हटाना होगा और इसके लिए सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त करना होगा। छात्र संगठनों ने इस शर्त को असंवैधानिक और छात्रों के लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के अधिकार पर अंकुश लगाने का प्रयास बताते हुए इसे मानने से साफ इनकार कर दिया है।

12 अक्टूबर से भूख हड़ताल, तनाव के बाद ऑनलाइन मोड में चल रही हैं कक्षाएं

जामिया में यह ताजा विवाद 12 अक्टूबर को उस समय भड़क उठा था जब कुछ प्रमुख छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों ने छात्रसंघ चुनाव की निश्चित समयसीमा तय करने की मांग को लेकर प्रशासनिक भवन के बाहर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। देखते ही देखते इस प्रदर्शन में हजारों सामान्य छात्र-छात्राएं भी शामिल हो गए और परिसर के मुख्य द्वारों को जाम कर दिया गया।

आंदोलन के उग्र होने और परिसर में लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने 24 अक्टूबर को आपातकालीन बैठक बुलाई थी। शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने के लिए प्रशासन ने आगामी आदेश तक सभी स्नातक, स्नातकोत्तर और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की कक्षाएं तत्काल प्रभाव से ऑफलाइन से बदलकर ऑनलाइन मोड में संचालित करने का अप्रत्याशित निर्णय लिया था। पूरे परिसर में दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई थीं।

JMI Election News: क्या बहाल हो पाएगी जामिया में छात्र राजनीति?

विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा चुनाव कराने का लिखित आदेश जारी करना आंदोलनकारियों की एक बड़ी नैतिक जीत माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों का कहना है कि छात्र कल्याण संकाय और कानूनी विशेषज्ञों की समिति संविधान के नियमों को अंतिम रूप देने में जुटी है ताकि लिंगदोह समिति की सिफारिशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जा सके।

अब पूरी नजर छात्रों के रुख और प्रशासनिक समिति की आगामी बैठक पर टिकी है। यदि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के जरिए माफी मांगने की शर्त और समयबद्ध चुनावी कार्यक्रम पर आम सहमति बन जाती है, तो दो दशक बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया में एक बार फिर पर्चों, नारों और मतदान के साथ लोकतांत्रिक छात्र राजनीति की ऐतिहासिक वापसी संभव हो सकेगी।

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