ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी से वैश्विक तेल आपूर्ति खतरे में, ट्रंप की कड़ी चेतावनी, इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद सैन्य दबाव बढ़ा, भारत पर भी असर
ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी, ट्रंप की सख्त चेतावनी, इस्लामाबाद वार्ता विफल, वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा, भारत पर महंगाई का असर
Iran-US War: मध्य पूर्व में एक बार फिर से तनाव की आग भड़क उठी है। इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ईरानी जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे आदेश पर अमेरिकी नौसेना ने इस रणनीतिक जलमार्ग के पूर्वी हिस्से में 15 युद्धपोत तैनात कर दिए हैं।
Iran-US War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व और वर्तमान संकट
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से गुजरने वाला तेल वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा होता है। अमेरिका की इस नाकेबंदी ने ईरान को आर्थिक रूप से घेरने की कोशिश की है जबकि ईरान पहले ही इस मार्ग को बंद करने की कोशिश कर चुका था। दोनों देशों के बीच बढ़ते विवाद ने अब कूटनीतिक और सैन्य मोर्चे पर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।
Iran-US War: इस्लामाबाद वार्ता विफल होने के बाद तनाव क्यों बढ़ा
इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच हुई वार्ता उम्मीदों के मुताबिक कोई ठोस नतीजा नहीं दे पाई। दोनों पक्षों के बीच सीजफायर और परमाणु मुद्दे पर गहरी असहमति रही। वार्ता समाप्त होते ही अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरानी जहाजों की नाकेबंदी की डेडलाइन खत्म होने का हवाला देते हुए सख्त कदम उठा लिया। अमेरिकी नौसेना के 15 युद्धपोत अब इस क्षेत्र में तैनात हैं और ईरान से निकलने वाले हर टैंकर पर नजर रख रहे हैं।
Iran-US War: अमेरिकी नौसेना की तैनाती और ट्रंप का सख्त रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से इस नाकेबंदी का आदेश दिया है। उनके मुताबिक अमेरिकी नौसेना की निगरानी में कल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से 34 जहाज गुजरे हैं। यह संख्या तब से सबसे ज्यादा बताई जा रही है जब ईरान ने इस मार्ग को बंद करने की कोशिश शुरू की थी। ट्रंप ने ईरान की इस कोशिश को बेवकूफी भरा कदम बताया और कहा कि अमेरिका अब इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो नतीजे बहुत गंभीर होंगे।
Iran-US War: जेडी वेंस का आरोप- ईरान फैला रहा आर्थिक आतंकवाद
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान पर सीधा आरोप लगाया है। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ट्रैफिक रोककर आर्थिक आतंकवाद फैला रहा है। वेंस ने साफ चेतावनी दी कि अमेरिका इसका जवाब देगा। उन्होंने ट्रंप का हवाला देते हुए कहा कि यह खेल दोनों तरफ से खेला जा सकता है। अगर ईरान अपनी हरकतें जारी रखता है तो अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान का कोई जहाज बाहर न निकल पाए।
Iran-US War: ईरान की चेतावनी- नाकेबंदी का असर पूरे विश्व पर पड़ेगा
ईरान ने अमेरिका की इस नाकेबंदी को गंभीर चेतावनी देते हुए जवाब दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर किसी भी तरह की रोक का असर सिर्फ तेल आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव दुनिया भर के बाजारों पर कई गुना बढ़कर पड़ेगा। ईरान का मानना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई वैश्विक अर्थव्यवस्था को अस्थिर करेगी। तेहरान का रुख सख्त है और वह किसी भी समझौते के लिए शर्तों पर अड़ा हुआ है।
Iran-US War: पाकिस्तान ने दूसरे दौर की बातचीत का प्रस्ताव रखा
वार्ता विफल होने के बाद पाकिस्तान ने सकारात्मक कदम उठाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत की मेजबानी करने का प्रस्ताव रखा है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि यह प्रस्ताव दोनों पक्षों की सहमति पर निर्भर करेगा। पाकिस्तान इसे एक बार की कोशिश नहीं बल्कि चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा मान रहा है।
Iran-US War: संयुक्त राष्ट्र महासचिव की अपील- जहाजों की आवाजाही स्वतंत्र हो
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर किसी भी तरह की रोक वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए हानिकारक है। गुटेरेस की अपील ऐसे समय आई है जब ईरान और अमेरिका दोनों ही इस मार्ग पर नियंत्रण की कोशिश कर रहे हैं।
Iran-US War: अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं- चीन, रूस और पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तानी विदेश मंत्री इशाक डार ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी से फोन पर बात की। दोनों ने इस्लामाबाद वार्ता और मौजूदा संकट पर विचार साझा किए। चीन इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच रूस के विदेश मंत्री एस वी लावरोव ने ईरानी विदेश मंत्री ए अराघची से फोन पर बात की। दोनों ने मध्य पूर्व में हथियारों से लैस टकराव को रोकने पर जोर दिया। रूस ने संकट सुलझाने में मदद करने का भरोसा दिया है।
Iran-US War: वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत पर क्या असर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकेबंदी का सबसे बड़ा असर तेल की कीमतों पर पड़ने वाला है। दुनिया का बड़ा हिस्सा यहां से गुजरने वाले तेल पर निर्भर है। भारत जैसे देश जो 80 प्रतिशत से ज्यादा तेल आयात करते हैं उनके लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। तेल की कीमतें बढ़ने से पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ने का खतरा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नाकेबंदी लंबी चली तो स्टॉक मार्केट पर भी असर पड़ेगा।
Iran-US War: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का भू-राजनीतिक महत्व
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है। यह फारस की खाड़ी को गल्फ ऑफ ओमान से जोड़ता है। यहां से सऊदी अरब, इराक, यूएई और कुवैत का बड़ा तेल निर्यात होता है। पिछले वर्षों में भी कई बार यहां तनाव बढ़ा है। यह मार्ग हमेशा से बड़े देशों की रणनीति का केंद्र रहा है। अमेरिका का मानना है कि इसकी स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी है।
Iran-US War: संकट का समाधान कब और कैसे संभव
वर्तमान में कोई प्रत्यक्ष युद्ध नहीं है लेकिन नाकेबंदी और चेतावनियां जारी हैं। ट्रंप ने कहा कि अभी लड़ाई नहीं हो रही लेकिन स्थिति गंभीर है। पाकिस्तान और रूस जैसे देश कूटनीति के जरिए समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर दोनों पक्ष कुछ रियायतें देते हैं तो दूसरा दौर की बातचीत कामयाब हो सकती है। लेकिन फिलहाल दोनों तरफ से सख्त रुख जारी है।
निष्कर्ष
ईरान-अमेरिका तनाव अब सिर्फ क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया है। यह पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़ गया है। भारत समेत कई देशों की नजर इस पर टिकी हुई है। आने वाले घंटों और दिनों में कूटनीतिक गतिविधियां तेज होने वाली हैं। स्थिति पर हर किसी की नजर बनी हुई है।
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