Hormuz Strait agreement: होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान-ओमान डील अंतिम चरण में, लेकिन ट्रंप के रुख पर टिकी है पूरी बात

ईरान-ओमान समझौता अंतिम चरण में, अमेरिकी नाकेबंदी हटने पर निर्भर पूरी डील

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Hormuz Strait agreement: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक बड़ा समझौता सामने आने वाला है। ईरान ने बुधवार को साफ कहा है कि ओमान के साथ नए होर्मुज रूट पर सहमति बन गई है और समझौते का मसौदा अब आखिरी चरण में है। अगर सब कुछ अनुकूल रहा तो जल्द ही दोनों देशों का साझा बयान जारी हो सकता है। हालांकि यह डील पूरी तरह से तभी संभव है जब अमेरिका ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई अपनी नाकेबंदी हटा ले। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर इस पूरे समझौते की सफलता निर्भर करती दिख रही है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब काफी हद तक होर्मुज पर नियंत्रण की लड़ाई बन चुका है। न तो ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर अपना प्रभाव छोड़ने को तैयार है और न ही ट्रंप प्रशासन ऐसा कोई समझौता स्वीकार करना चाहता है जिससे ईरान की पकड़ और मजबूत हो जाए।

Hormuz Strait agreement: नए रूट पर सहमति और शर्तें

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि ओमान के साथ भौगोलिक निर्देशांकों यानी रूट के कोऑर्डिनेट्स पर सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ पक्ष इस प्रक्रिया में रुकावट नहीं डालते हैं तो दोनों देशों का संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। माना जा रहा है कि उनका इशारा अमेरिका की ओर था।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाजों का मार्ग ईरान के क्षेत्रीय जल से होकर गुजरेगा जबकि बाहर निकलने वाले जहाज ओमान के जल क्षेत्र से गुजरेंगे। यह व्यवस्था अस्थायी हो सकती है और दो से चार महीने या उससे अधिक समय तक लागू रह सकती है। ईरान का कहना है कि वह होर्मुज को युद्ध से पहले की तरह पूरी तरह खुला अंतरराष्ट्रीय मार्ग नहीं बनने देगा। वह किसी न किसी रूप में नियंत्रण अपने पास रखना चाहता है।

अमेरिका का विरोध और ट्रंप का रुख

ट्रंप प्रशासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह ऐसे किसी समझौते के पक्ष में नहीं है जिससे होर्मुज पर ईरान की पकड़ मजबूत हो। अमेरिका का मानना है कि ऐसा होना उसकी बड़ी हार के बराबर होगा और लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ होगा। ट्रंप ने कहा है कि इस हफ्ते समझौते का ऐलान हो सकता है लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर बात नहीं बनी तो ईरान पर कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कोई भी अस्थायी मार्ग ईरान की मंजूरी या अनुमति पर आधारित नहीं होना चाहिए और कोई टोल या शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। वहीं ईरानी पक्ष सेवा शुल्क की बात कर रहा है जो पर्यावरणीय प्रभाव, सुरक्षा और स्टाफिंग के लिए लिया जाएगा और राजस्व दोनों देशों में बराबर बांटा जाएगा।

युद्ध की शुरुआत और होर्मुज का महत्व

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को संघर्ष शुरू किया था। उनका लक्ष्य ईरान की सरकार को गिराना और उसके परमाणु कार्यक्रम को खत्म करना बताया गया था। लेकिन अब तक इनमें से कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। अब पूरा संघर्ष होर्मुज पर नियंत्रण को लेकर केंद्रित हो गया है। ईरान के दावों और जहाजों पर हमलों की वजह से यहां समुद्री यातायात लगभग ठप पड़ गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और प्राकृतिक गैस व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा संभालता था। इसके बंद होने से तेल-गैस और रोजमर्रा के सामानों की कीमतें बढ़ गईं जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई। अमेरिका में संसदीय चुनाव भी करीब हैं इसलिए ट्रंप पर इस अलोकप्रिय संघर्ष को खत्म करने का दबाव बढ़ रहा है।

अस्थायी समाधान और आगे की संभावनाएं

बातचीत की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार यह समझौता फिलहाल सिर्फ एक अस्थायी समाधान है। यह जून में अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौते से जुड़ा हुआ है जिसका मकसद लड़ाई खत्म करना और समुद्री मार्ग को फिर से खोलना था लेकिन बाद में वह समझौता टूट गया। अगर नया समझौता हो जाता है तो तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत फिर से शुरू हो सकती है।
ईरान का रुख साफ है कि जब तक अमेरिका नाकेबंदी नहीं हटाता और पहले के बिंदुओं पर वापसी नहीं होती तब तक जलमार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाएगा। ओमान मध्यस्थ की भूमिका में है और दोनों पक्षों के बीच सेतु का काम कर रहा है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

होर्मुज के बंद रहने से ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है और कई देश वैकल्पिक मार्गों की तलाश में हैं। अगर समझौता हो जाता है तो बाजार में राहत मिल सकती है और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर करने में मदद मिलेगी। वहीं समझौता न होने पर तनाव और बढ़ सकता है जिससे कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
क्षेत्रीय देश भी इस विकास पर नजर रखे हुए हैं। कई खाड़ी देश चाहते हैं कि तनाव कम हो और व्यापार सामान्य हो लेकिन वे ईरान की बढ़ती भूमिका को लेकर सतर्क भी हैं।

Hormuz Strait agreement: दोनों पक्षों के लिए चुनौती

ईरान के लिए होर्मुज पर नियंत्रण बनाए रखना रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से महत्वपूर्ण है। वहीं अमेरिका के लिए किसी भी ऐसी व्यवस्था को स्वीकार करना मुश्किल है जो ईरान को फायदा पहुंचाए। ट्रंप प्रशासन को घरेलू राजनीतिक दबाव और अंतरराष्ट्रीय छवि दोनों संतुलित करने होंगे।
समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका कितना लचीला रुख अपनाता है और ईरान अपनी मांगों में कितना समझौता करने को तैयार है। अगर दोनों पक्ष अड़ियल रुख अपनाए रखते हैं तो तनाव जारी रह सकता है। वहीं अगर बीच का रास्ता निकलता है तो यह क्षेत्रीय स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
होर्मुज को लेकर चल रही यह कूटनीतिक कवायद सिर्फ दो देशों का मामला नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और मध्य पूर्व की स्थिरता से जुड़ी है। आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन का फैसला इस पूरे समीकरण को तय करेगा। दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या राजनयिक रास्ता निकलेगा या तनाव नया रूप लेगा।

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