Iran–Israel War: ईरान पर हमले का सीधा असर भारतीय बाजार पर, सप्लाई संकट की आशंका से तेल-तिलहन की कीमतों में जबरदस्त उछाल, सरसों तिलहन 6500 रुपये के पार
ईरान-इजरायल युद्ध से तेल-तिलहन बाजार में तेजी: सरसों 6,475-6,500, सरसों तेल 13,450, सोयाबीन तेल 14,450, सीपीओ 11,775; होली से पहले महंगाई का असर, आयात शुल्क बढ़ा, खाड़ी रूट पर खतरा
Iran–Israel War: मध्य-पूर्व में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हवाई हमलों की आंच अब सीधे भारतीय रसोई तक पहुंचने लगी है। रविवार 1 मार्च 2026 को देशभर के तेल-तिलहन बाजारों में एकाएक जोरदार तेजी देखने को मिली। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के बाधित होने की आशंका ने व्यापारियों को घबराहट में खरीदारी करने पर मजबूर कर दिया जिसके चलते लगभग सभी प्रमुख खाद्य तेलों और तिलहनों के दाम तेजी से चढ़ गए। होली से ठीक पहले आई यह महंगाई आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ डालने वाली है। जानकारों का कहना है कि अगर मध्य-पूर्व में तनाव जल्द नहीं थमा तो आने वाले दिनों में खाद्य तेलों की कीमतों में और इजाफा हो सकता है।
Iran–Israel War: ईरान संकट ने बदला बाजार का माहौल
बाजार सूत्रों के अनुसार होली के त्योहार से पहले देश के तेल-तिलहन बाजारों में कारोबारी गतिविधियां पहले से ही सुस्त चल रही थीं। त्योहारी सीजन के लिए जरूरी खरीदारी लगभग पूरी हो चुकी थी और बाजार सामान्य रूप से चल रहा था। लेकिन जैसे ही अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हवाई हमले की खबर फैली वैसे ही बाजार का पूरा माहौल बदल गया। आयातित खाद्य तेलों की आपूर्ति प्रभावित होने की संभावना ने व्यापारियों में हड़कंप मचा दिया और उन्होंने बड़े पैमाने पर खरीदारी शुरू कर दी। इस अचानक बढ़ी मांग ने कीमतों को ऊपर धकेल दिया।
सरसों में 150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी
सरसों के मोर्चे पर दोहरा दबाव देखा गया। एक तरफ कम कीमतों से नाराज किसानों ने पहले से ही मंडियों में सरसों की आवक घटा रखी थी जिससे बाजार में आपूर्ति पहले से सीमित थी। दूसरी तरफ ईरान संकट की खबर आते ही कच्ची घानी की बड़ी तेल मिलों ने सरसों के खरीद मूल्य में एक झटके में 150 रुपये प्रति क्विंटल तक की वृद्धि कर दी। इन दोनों कारणों के मिले-जुले असर से सरसों तिलहन का भाव उछलकर 6,475 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर जा पहुंचा। सरसों तेल दादरी 13,450 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ जबकि कच्ची घानी सरसों तेल 2,285 से 2,430 रुपये प्रति टिन के दायरे में कारोबार कर बंद हुई।
Iran–Israel War: सरकार ने भी बढ़ाया आयात शुल्क मूल्य
बाजार की तेजी के बीच सरकार ने भी देर रात आयातित खाद्य तेलों के आयात शुल्क मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा कर दी जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है। सरकार के इस फैसले के तहत कच्चे पाम तेल यानी सीपीओ पर 26 रुपये प्रति क्विंटल, पामोलीन पर 124 रुपये प्रति क्विंटल और सोयाबीन डीगम पर 15 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। इससे इन तेलों का आयात महंगा हो जाएगा और अंततः घरेलू बाजार में इनकी कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम घरेलू तिलहन उत्पादकों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है लेकिन इसका असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ेगा।
अन्य तेल-तिलहनों के भाव एक नजर में
ईरान संकट का असर सिर्फ सरसों तक सीमित नहीं रहा बल्कि अन्य सभी प्रमुख खाद्य तेलों और तिलहनों की कीमतों में भी उछाल दर्ज किया गया। मूंगफली का भाव 7,000 से 7,475 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में रहा। सोयाबीन दाना 5,350 से 5,400 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार कर बंद हुआ। सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली 14,450 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया। कांडला बंदरगाह पर कच्चा पाम तेल यानी सीपीओ 11,775 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ जबकि पामोलिन आरबीडी दिल्ली 13,600 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार कर बंद हुई।
| तेल-तिलहन | भाव (रुपये प्रति क्विंटल) |
|---|---|
| सरसों तिलहन | 6,475-6,500 |
| सरसों तेल दादरी | 13,450 |
| कच्ची घानी सरसों | 2,285-2,430 (प्रति टिन) |
| मूंगफली | 7,000-7,475 |
| सोयाबीन दाना | 5,350-5,400 |
| सोयाबीन तेल (दिल्ली) | 14,450 |
| सीपीओ (कांडला) | 11,775 |
| पामोलिन आरबीडी (दिल्ली) | 13,600 |
Iran–Israel War: क्यों इतना संवेदनशील है भारत का तेल बाजार?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा खाद्य तेल आयातक देश है। देश की कुल खाद्य तेल जरूरत का करीब 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सा विदेशों से मंगाया जाता है जिसमें पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल प्रमुख हैं। इनमें से अधिकांश आयात खाड़ी और मध्य-पूर्व के रास्ते से होता है। ईरान संकट के कारण होर्मुज जलसंधि और खाड़ी के समुद्री मार्गों पर खतरा मंडराने से पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि मध्य-पूर्व में किसी भी बड़े भू-राजनीतिक बदलाव का असर भारतीय खाद्य तेल बाजार पर तुरंत और सीधे तौर पर पड़ता है।
आने वाले दिनों में मध्य-पूर्व में स्थिति कैसे करवट लेती है इस पर न केवल कच्चे तेल बल्कि खाद्य तेलों की कीमतों का भविष्य भी टिका है। अगर तनाव लंबे समय तक बना रहा तो भारतीय उपभोक्ताओं को खाद्य तेलों के मोर्चे पर और महंगाई झेलने के लिए तैयार रहना होगा।
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