India BRICS Exports 2026: BRICS देशों को भारत का निर्यात 34% बढ़कर 19.9 अरब डॉलर, चीन को 39% उछाल
चीन को एक्सपोर्ट 39% और दक्षिण अफ्रीका को 58% बढ़ा, ब्राजील-रूस में भी तेजी
India BRICS Exports 2026: भारत के विदेशी व्यापार मोर्चे पर चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों (अप्रैल से अगस्त 2026) के दौरान अत्यंत उत्साहवर्धक आंकड़े सामने आए हैं। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स (BRICS) समूह के चार प्रमुख संस्थापक और बड़े सदस्य देशों—चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस—को होने वाले भारतीय वस्तु निर्यात में 34 प्रतिशत की जबर्दस्त वृद्धि दर्ज की गई है। इस अवधि में इन चार अर्थव्यवस्थाओं को भारत का कुल निर्यात बढ़कर 19.9 अरब अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 14.9 अरब डॉलर था। इस प्रकार मात्र पांच महीनों के भीतर भारतीय निर्यात में लगभग 5 अरब डॉलर की ठोस वृद्धि दर्ज हुई है।
इस व्यापारिक विस्तार में सबसे बड़ा और उल्लेखनीय योगदान पड़ोसी देश चीन का रहा है, जहां भारतीय उत्पादों के निर्यात में लगभग 39 प्रतिशत का जोरदार उछाल देखने को मिला। इसके साथ ही अफ्रीकी महाद्वीप के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार दक्षिण अफ्रीका को होने वाले भारतीय निर्यात में 58 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि दर्ज की गई। यह आंकड़े प्रमाणित करते हैं कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में जारी अनिश्चितताओं के बावजूद भारत उभरती हुई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बाजारों में अपनी निर्यात उपस्थिति को अत्यंत रणनीतिक रूप से मजबूत कर रहा है।
India BRICS Exports 2026: पांच महीनों में 19.9 अरब डॉलर का निर्यात
वाणिज्य मंत्रालय के तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार, अप्रैल-अगस्त 2025-26 के दौरान चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस को भारत ने 14.9 अरब डॉलर का सामान भेजा था, जो अप्रैल-अगस्त 2026-27 में उछलकर 19.9 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस 34 प्रतिशत की तीव्र वृद्धि के चलते भारत के कुल वैश्विक वस्तु निर्यात में इन चार ब्रिक्स देशों की सामूहिक हिस्सेदारी भी 8.1 प्रतिशत से बढ़कर 9.2 प्रतिशत हो गई है। यानी देश के कुल निर्यात बास्केट में इन चार बाजारों का योगदान 1.1 प्रतिशत अंक बढ़ गया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के समग्र निर्यात प्रदर्शन में आई व्यापक तेजी के समानांतर चल रही है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती पांच महीनों में भारत का कुल राष्ट्रीय वस्तु निर्यात 17.85 प्रतिशत की मजबूत वार्षिक वृद्धि दर के साथ 215.91 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 183.21 अरब डॉलर था। ब्रिक्स देशों की बढ़ती मांग ने भारतीय विनिर्माताओं को पारंपरिक पश्चिमी बाजारों पर निर्भरता घटाने का एक व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध कराया है।
चीन को निर्यात में 39 प्रतिशत की उछाल: 9.6 अरब डॉलर पर पहुंचा आंकड़ा
ब्रिक्स के चार प्रमुख देशों में होने वाले कुल 19.9 अरब डॉलर के निर्यात में सबसे बड़ी हिस्सेदारी चीन की रही है। अप्रैल से अगस्त 2026 के मध्य भारत ने चीनी बाजार में 9.6 अरब अमेरिकी डॉलर के उत्पादों का निर्यात किया, जो विगत वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 39 प्रतिशत अधिक है। चीन लंबे समय से भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शुमार रहा है, किंतु व्यापार संतुलन हमेशा से भारी आयात के कारण चीन के पक्ष में झुका रहा है।
ऐसे में भारत से चीन को होने वाले निर्यात में 39 प्रतिशत का इजाफा एक सकारात्मक आर्थिक संकेत है। यह वृद्धि दर्शाती है कि चीनी विनिर्माण और उपभोक्ता बाजार में भारतीय मध्यवर्ती वस्तुओं (इंटरमीडिएट गुड्स), रसायनों, लौह अयस्क, समुद्री उत्पादों, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्पादों की मांग में ठोस सुधार हुआ है। अकेले चीन का यह प्रदर्शन ब्रिक्स देशों को हुई कुल निर्यात वृद्धि का सबसे प्रमुख प्रेरक इंजन साबित हुआ है।
दक्षिण अफ्रीका में 58 प्रतिशत की सबसे तेज छलांग: ब्राजील और रूस में भी बढ़त
प्रतिशत वृद्धि के पैमाने पर दक्षिण अफ्रीका ने सभी ब्रिक्स साझेदारों को पीछे छोड़ दिया है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में दक्षिण अफ्रीका को भारत का वस्तु निर्यात 58 प्रतिशत की अभूतपूर्व गति से बढ़ा। भारत सरकार की व्यापक ‘अफ्रीका व्यापार रणनीति’ के तहत ऑटोमोबाइल कलपुर्जों, फार्मास्यूटिकल्स और तैयार इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात ने दक्षिण अफ्रीकी बाजार में भारतीय उपस्थिति को नई ऊंचाई दी है।
लैटिन अमेरिकी महाद्वीप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था ब्राजील को होने वाले भारतीय निर्यात में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं पश्चिमी प्रतिबंधों और वैश्विक वित्तीय जटिलताओं के बीच रूस को किए जाने वाले भारतीय निर्यात में 11 प्रतिशत की दोहरे अंक वाली वृद्धि दर्ज हुई है। स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार निपटान तंत्र और ऊर्जा सहयोग के समानांतर भारतीय दवाओं, खाद्य प्रसंस्करण और औद्योगिक उपकरणों की रूसी बाजार में निरंतर आपूर्ति इस वृद्धि का मुख्य कारण बनी है।
भारत का समग्र व्यापार: कुल निर्यात 399.27 अरब डॉलर के नए स्तर पर
ब्रिक्स देशों को निर्यात में आई तेजी भारत के संपूर्ण विदेशी व्यापार की व्यापक मजबूती को परिलक्षित करती है। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों (अप्रैल-अगस्त) में वस्तुओं और सेवाओं को मिलाकर देश का कुल अनुमानित निर्यात 399.27 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 345.55 अरब डॉलर की तुलना में 15.55 प्रतिशत की ठोस संवृद्धि दर्शाता है।
इस कुल निर्यात में 215.91 अरब डॉलर का वस्तु निर्यात और लगभग 183.36 अरब डॉलर का सेवा निर्यात शामिल रहा। अकेले अगस्त 2026 के महीने में भारत का वस्तु निर्यात 26 प्रतिशत की ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए 43.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो अगस्त 2025 में 34.74 अरब डॉलर था। अगस्त माह में विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्षेत्र ने रिकॉर्ड प्रदर्शन किया, जहां इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 2.93 अरब डॉलर से लगभग दोगुना होकर 5.55 अरब डॉलर पर पहुंच गया।
जापान, इटली और दक्षिण कोरिया में भी भारतीय उत्पादों का जलवा
भारतीय निर्यातकों की यह सफलता केवल ब्रिक्स देशों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि दुनिया के अन्य विकसित और औद्योगिक बाजारों में भी भारतीय सामान की मांग में भारी उछाल आया है। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान पूर्वी एशियाई देश जापान को होने वाले भारतीय निर्यात में 43 प्रतिशत की जबर्दस्त बढ़ोतरी हुई और यह आंकड़ा 3.43 अरब डॉलर पहुंच गया।
यूरोपीय संघ के प्रमुख सदस्य देश इटली को भारतीय निर्यात लगभग 30 प्रतिशत बढ़कर 3.92 अरब डॉलर दर्ज किया गया। इसके अतिरिक्त दक्षिण कोरिया के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी तकनीकी बाजार में भी भारतीय निर्यात ने 22 प्रतिशत की स्वस्थ वृद्धि दर्ज करते हुए 3.21 अरब डॉलर का स्तर छू लिया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि गुणवत्ता सुधार, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण के बल पर भारतीय उत्पाद दुनिया के लगभग सभी प्रमुख आर्थिक केंद्रों में अपनी पैठ बढ़ा रहे हैं।
विस्तारित ब्रिक्स और भविष्य की विदेश व्यापार रणनीतियां
यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि वर्तमान में घोषित 19.9 अरब डॉलर का आंकड़ा ब्रिक्स के मूल चार प्रमुख साझेदारों (चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस) से संबंधित है। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के औपचारिक प्रवेश तथा 2025 में इंडोनेशिया के जुड़ाव के बाद अब ब्रिक्स एक विशाल बहुपक्षीय आर्थिक मंच बन चुका है।
आने वाले समय में जब विस्तारित ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार निपटान, गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने और तरजीही व्यापार समझौतों को धरातल पर उतारा जाएगा, तब भारत के लिए वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों के साथ व्यापार विस्तार की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी। हालांकि भारतीय नीति निर्माताओं और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई लागत, मुद्रा विनिमय दर के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक अवरोधों के प्रति भी सजग रहना होगा, ताकि शुरुआती पांच महीनों की इस शानदार बढ़त को पूरे वित्त वर्ष में एक ऐतिहासिक व्यापारिक रिकॉर्ड में बदला जा सके।
India BRICS Exports 2026: निष्कर्ष
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में ब्रिक्स के चार प्रमुख देशों को निर्यात का 34 प्रतिशत बढ़कर 19.9 अरब डॉलर पहुंचना और चीन को भेजे जाने वाले सामान में 39 प्रतिशत का उछाल भारत की विदेश व्यापार नीति की रणनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है। दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस के साथ-साथ जापान और इटली जैसे विकसित देशों में भारतीय निर्यात का यह निरंतर विस्तार देश को वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में तेजी से स्थापित कर रहा है।
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