GDP Growth: 2035 तक भारत की GDP में जुड़ सकते हैं 170 अरब डॉलर, FTA और AI से मिलेगी अर्थव्यवस्था को रफ्तार

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अनुमान के मुताबिक, FTA और AI से भारत की आर्थिक वृद्धि को मिल सकती है नई रफ्तार।

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GDP Growth: वैश्विक व्यापार परिदृश्य में हो रहे रणनीतिक बदलाव, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का तेजी से बढ़ता दायरा और दुनिया के प्रमुख व्यापारिक ब्लॉकों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विकास के नए द्वार खोल रहे हैं। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स की एक व्यापक शोध रिपोर्ट के अनुसार, भारत द्वारा किए जा रहे द्विपक्षीय और बहुपक्षीय व्यापार समझौतों के बल पर वर्ष 2035 तक देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 140 अरब से 170 अरब अमेरिकी डॉलर तक की शुद्ध अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की जा सकती है। यह अनुमानित छलांग उन लागू हो चुके और प्रस्तावित समझौतों की सफलता पर टिकी है, जो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत को एक केंद्रीय विनिर्माण और सेवा केंद्र के रूप में स्थापित कर रहे हैं।

GDP Growth: मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारतीय अर्थव्यवस्था को कैसे मिलेगा बूस्ट?

मुक्त व्यापार समझौते दो या दो से अधिक साझेदार देशों के बीच सीमा शुल्क, आयात-निर्यात टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक बाधाओं को न्यूनतम करने का विधिक ढांचा तैयार करते हैं। इससे घरेलू विनिर्माताओं, एमएसएमई और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सीधा प्रवेश मिलता है और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के प्रवाह में तेजी आती है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के आर्थिक मॉडल के अनुसार, भारत द्वारा पूर्व में लागू किए जा चुके व्यापारिक समझौतों के प्रभाव से 2035 तक देश की जीडीपी में 1.2 प्रतिशत की स्थायी अतिरिक्त वृद्धि सुनिश्चित हो रही है। यदि यूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड के साथ जारी व्यापारिक वार्ताएं 2027 तक औपचारिक रूप से लागू हो जाती हैं, तो यह आंकड़ा बढ़कर 1.7 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा। वर्ष 2025 के स्थिर अमेरिकी डॉलर के मूल्यांकन के आधार पर यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था में लगभग 140 अरब डॉलर की अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि जोड़ेगा।

170 अरब डॉलर तक के विस्तार का गणित: नए वैश्विक व्यापारिक कॉरिडोर

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि यदि भारत रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अन्य व्यापारिक साझेदारों के साथ बातचीत को अंतिम रूप देने में सफल रहता है, तो अतिरिक्त जीडीपी का यह आंकड़ा 170 अरब डॉलर यानी कुल जीडीपी के 2.1 प्रतिशत की शुद्ध वृद्धि तक पहुंच सकता है।

इस सर्वोच्च लक्ष्य को हासिल करने के लिए अमेरिका के साथ एक अंतरिम व्यापार समझौता होना, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार मार्ग खुलना तथा खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और इजरायल के साथ जारी वार्ताओं का सफल समापन होना प्रमुख शर्तें हैं। यह अतिरिक्त लाभ न केवल भारत के पारंपरिक वस्तु निर्यात को बढ़ावा देगा, बल्कि आईटी, वित्तीय परामर्श और तकनीकी इंजीनियरिंग जैसी उच्च-मूल्य वाली सेवाओं के निर्यात को भी व्यापक गति प्रदान करेगा।

अमेरिकी टैरिफ चुनौतियों के बीच नए वैकल्पिक बाजारों की महत्ता

अमेरिका की व्यापार नीतियों में संरक्षणवादी रुख और टैरिफ में लगातार होती बढ़ोतरी के मद्देनजर भारत के लिए निर्यात बाजारों का विविधीकरण अनिवार्य हो गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी बाजार में भारतीय सामानों पर प्रभावी औसत आयात शुल्क 2024 के 2.4 प्रतिशत से बढ़कर 11.6 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुका है।

इस भारी टैरिफ वृद्धि के कारण 2035 तक अमेरिका को होने वाले भारतीय वस्तु निर्यात में लगभग 20 प्रतिशत (पांचवां हिस्सा) तक की संभावित गिरावट का जोखिम खड़ा हुआ है। हालांकि, भारतीय अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन का दो प्रतिशत से भी कम हिस्सा अमेरिकी बाजार पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर है, जिससे इसका व्यापक मैक्रोइकोनॉमिक प्रभाव सीमित रहेगा। यूरोपीय संघ, पश्चिम एशिया और प्रशांत देशों के साथ नए एफटीए समझौते अमेरिकी बाजार से होने वाले किसी भी संभावित नुकसान की भरपाई करने में पूरी तरह सक्षम साबित होंगे।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उत्पादकता से वार्षिक वृद्धि में इजाफा

व्यापार समझौतों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय आर्थिक इंजन को रफ्तार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा उत्प्रेरक बनकर उभर रहा है। उद्योगों में जनरेटिव एआई, ऑटोमेशन और प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स को अपनाने से उत्पादन लागत में कमी आ रही है और परिचालन दक्षता में क्रांतिकारी सुधार हो रहा है।

ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स का आकलन है कि एआई के उपयोग से कार्यबल और उत्पादन प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार के जरिए भारत की वार्षिक जीडीपी विकास दर में 0.4 से 0.9 प्रतिशत अंक तक का अतिरिक्त योगदान मिल सकता है। यह लाभ पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि देश का कॉर्पोरेट जगत तकनीकी बुनियादी ढांचे में कितना पूंजी निवेश करता है और अपने कर्मचारियों को तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश के अनुसार अपस्किलिंग और री-स्किलिंग प्रदान करने में कितना सफल रहता है।

GDP Growth: 2035 के लक्ष्यों को प्राप्त करने के मार्ग में रणनीतिक चुनौतियां

170 अरब डॉलर की इस संभावित आर्थिक वृद्धि को धरातल पर उतारने के लिए भारत को अपनी घरेलू नीतियों और नियामक प्रक्रियाओं में भी तेजी लानी होगी। घरेलू उत्पादन में लॉजिस्टिक्स लागत को वैश्विक मानकों पर लाना, सीमा पार व्यापार में लालफीताशाही को कम करना और विवाद समाधान प्रणालियों को पारदर्शी बनाना आवश्यक होगा।

व्यापार वार्ताओं में कृषि और संवेदनशील विनिर्माण क्षेत्रों के हितों की रक्षा करते हुए लचीला रुख अपनाना, उच्च गुणवत्ता वाले विनिर्माण मानकों को लागू करना और उन्नत एआई चिपसेट व डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में आत्मनिर्भरता बढ़ाना वे प्रमुख कदम हैं, जो 2035 तक भारत को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी और सबसे गतिशील अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा तय करेंगे।

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