सुबह उठते ही आँखों में दिखें ये 5 लक्षण, हो सकती है किडनी खराब होने की चेतावनी
आंखों के नीचे सूजन, रूखापन, लालिमा, धुंधलापन... ये लक्षण किडनी डैमेज की चेतावनी दे सकते हैं
Kidney Damage Signals: हमारे शरीर में गुर्दे यानी किडनी एक अहम भूमिका निभाती है। ये अंग रक्त से विषैले पदार्थों को छानकर बाहर निकालती है और शरीर में खनिज तत्वों का संतुलन बनाए रखती है। साथ ही रक्तचाप को नियंत्रित करने में भी इनका योगदान होता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली और गलत खानपान के चलते अनजाने में हम अपने गुर्दों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
अधिकांश लोगों की धारणा है कि गुर्दों में खराबी का पता केवल मूत्र में बदलाव या कमर दर्द से लगता है। मगर यह पूरी सच्चाई नहीं है। वास्तव में गुर्दों में समस्या होने पर हमारी आंखें भी कई संकेत देती हैं जिन्हें पहचानना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं वे छह महत्वपूर्ण लक्षण जो आपकी आंखों में दिखाई देने पर सतर्क हो जाना चाहिए।
नेत्रों के आसपास सूजन का आना
गुर्दों में खराबी (Kidney Damage Signals) का प्रारंभिक और सबसे आम संकेत है आंखों के नीचे और चारों ओर सूजन दिखाई देना। चिकित्सा भाषा में इसे पेरिऑर्बिटल एडिमा कहते हैं। यह स्थिति तब पैदा होती है जब गुर्दे मूत्र के माध्यम से प्रोटीन को भी निकालने लगते हैं जो सामान्यतः नहीं होना चाहिए।
इस प्रक्रिया में शरीर के ऊतकों में द्रव्य इकट्ठा होने लगता है और नेत्रों के आसपास के कोमल हिस्सों में फूलन आ जाती है। सोकर जागने के तुरंत बाद हल्की सूजन सामान्य मानी जाती है लेकिन अगर यह दिनभर बनी रहे या लगातार कई दिनों तक दिखे तो यह गुर्दों की गंभीर समस्या की ओर इशारा हो सकता है।
Kidney Damage Signals: नेत्रों में रूखापन और खुजलाहट
जब गुर्दे ठीक से काम नहीं करते (Kidney Damage Signals) तो शरीर में खनिज और पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है। रक्त में कैल्शियम और फास्फोरस के स्तर में असामान्य उतार चढ़ाव आंखों की प्राकृतिक नमी को प्रभावित करता है।
परिणामस्वरूप आंखों में जलन, असहज रूखापन और लगातार खुजली की शिकायत हो सकती है। यह लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है क्योंकि लोग इसे मौसम या धूल की वजह से होने वाली सामान्य परेशानी समझ लेते हैं।
नेत्रों में लालिमा बढ़ना
गुर्दों (Kidney Damage Signals) के सही तरीके से कार्य न करने पर शरीर की चयापचय प्रक्रिया गड़बड़ा जाती है। कैल्शियम और फॉस्फेट के सूक्ष्म कण नेत्रों की सफेद परत पर जमा होने लगते हैं। इससे आंखें लाल दिखने लगती हैं और खून की बारीक नसें उभर आती हैं।
अधिकतर व्यक्ति इसे साधारण एलर्जी या थकान का परिणाम मान लेते हैं। परंतु यदि यह लालिमा बार बार दिखे और आराम करने के बाद भी न जाए तो यह गुर्दों की गंभीर अवस्था का संकेत हो सकता है।
Kidney Damage Signals: दृष्टि में धुंधलापन होना

गुर्दों को नुकसान पहुंचाने वाले मुख्य कारणों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप शामिल हैं। ये दोनों रोग आंखों की रेटिना को भी क्षति पहुंचाते हैं। जब गुर्दे उचित रूप से कार्य नहीं करते तो शरीर में जमा होने वाला अतिरिक्त द्रव्य नेत्र लेंस की आकृति में परिवर्तन ला सकता है।
इसके कारण व्यक्ति को वस्तुएं धुंधली या अस्पष्ट दिखाई देने लगती हैं। यह लक्षण धीरे धीरे विकसित होता है और कई बार लोग इसे चश्मे के नंबर बदलने की जरूरत समझ लेते हैं।
परिधीय दृष्टि में कमी आना
परिधीय दृष्टि का अर्थ है आंखों के कोनों से या किनारे से दिखाई देना। गुर्दों की समस्या (Kidney Damage Signals) से जुड़े उच्च रक्तचाप के कारण आंखों की तंत्रिकाओं पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इसे ग्लूकोमा की एक अवस्था भी माना जा सकता है।
इस स्थिति में व्यक्ति की बगल या साइड की दृष्टि धीरे धीरे कम होने लगती है। रोगी को सामने तो सब कुछ साफ दिखता है लेकिन किनारे की चीजें नहीं दिखतीं। यह एक गंभीर लक्षण है जिसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
Kidney Damage Signals: नेत्रों में दबाव या पीड़ा महसूस होना
जब गुर्दे शरीर (Kidney Damage Signals) से अतिरिक्त द्रव्य को बाहर निकालने में असमर्थ होते हैं तो शरीर में फ्लूइड रिटेंशन यानी तरल पदार्थ का जमाव बढ़ जाता है। यह अतिरिक्त द्रव्य आंखों के अंदरूनी दबाव को बढ़ा देता है।
परिणामस्वरूप नेत्रों में भारीपन, दबाव या हल्की पीड़ा का अनुभव होता है। कुछ लोगों को ऐसा लगता है जैसे आंखों में कुछ अटका हुआ है या उन पर किसी प्रकार का बोझ है।
गुर्दों को स्वस्थ रखने के उपाय
गुर्दों (Kidney Damage Signals) को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय अपनाए जा सकते हैं। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे जरूरी है क्योंकि यह विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। नमक और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें क्योंकि ये गुर्दों पर अतिरिक्त भार डालते हैं।
नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रण में रखें। मधुमेह और रक्तचाप से ग्रस्त व्यक्तियों को अपनी दवाइयां नियमित लेनी चाहिए। धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचना भी जरूरी है। वर्ष में कम से कम एक बार गुर्दों की जांच जरूर कराएं।
Kidney Damage Signals: कब दिखाएं चिकित्सक को
यदि आपको उपरोक्त में से कोई भी लक्षण लगातार दिखाई दे रहा है तो तुरंत चिकित्सक से परामर्श लें। प्रारंभिक अवस्था में गुर्दों की समस्या (Kidney Damage Signals) को नियंत्रित किया जा सकता है। रक्त और मूत्र की जांच से गुर्दों की स्थिति का पता चल जाता है।
चिकित्सक आपको आवश्यकतानुसार नेत्र रोग विशेषज्ञ के पास भी भेज सकते हैं। समय पर निदान और उपचार से गंभीर जटिलताओं से बचा जा सकता है। अपने शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें और नियमित जांच कराते रहें।
निष्कर्ष
गुर्दों (Kidney Damage Signals) का स्वास्थ्य केवल मूत्र से ही नहीं बल्कि आंखों के माध्यम से भी प्रकट होता है। आंखों में दिखने वाले ये छह संकेत गुर्दों की समस्या की चेतावनी हो सकते हैं। सुबह उठकर आईने में अपनी आंखों को ध्यान से देखें और किसी भी असामान्य बदलाव पर ध्यान दें। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर और समय पर जांच कराकर आप अपने गुर्दों को स्वस्थ रख सकते हैं। याद रखें कि रोकथाम हमेशा इलाज से बेहतर है।
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