Heritage Train: मॉनसून की पहली पसंद, मध्य प्रदेश की हेरिटेज ट्रेन में सफर, 15 किलोमीटर में दिखता है कुदरत का जन्नत

Heritage Train: जानें पातालपानी से कालाकुंड तक चलने वाली इस ट्रेन के बारे में, जहां सिर्फ 20 में दिखते हैं खूबसूरत नजारे।

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Heritage Train: बारिश की बूंदें गिरते ही हर घुमक्कड़ का मन मचलने लगता है। पहाड़ों की हरियाली, झरनों का कल-कल करता संगीत और बादलों के बीच छिपी घाटियां किसे पसंद नहीं होतीं? अगर आप भी इस मॉनसून में किसी ऐसी जगह की तलाश में हैं जो आपकी थकान मिटा दे और आपको प्रकृति के बेहद करीब ले जाए, तो मध्य प्रदेश का रुख करना आपके लिए सबसे अच्छा फैसला होगा। यहां की एक ऐसी ट्रेन है जो लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं, बल्कि प्रकृति के सबसे खूबसूरत नजारों तक पहुंचाने के लिए चलाई जाती है। यह पातालपानी से कालाकुंड तक चलने वाली हेरिटेज ट्रेन है, जिसका सफर मॉनसून में किसी जन्नत से कम नहीं लगता।

इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह यात्रियों की भीड़ को ढोने के लिए नहीं, बल्कि पर्यटकों को सुकून देने और मध्य प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता का दीदार कराने के लिए खास तौर पर चलाई जाती है। लगभग 15 किलोमीटर का यह छोटा सा सफर आपकी पूरी थकान मिटाने के लिए काफी है। जब आप इस ट्रेन की खिड़की के पास बैठकर बाहर के बदलते नजारों को देखते हैं, तो ऐसा महसूस होता है जैसे आप किसी दूसरी ही दुनिया में आ गए हों। आइए जानते हैं कि क्यों यह हेरिटेज ट्रेन हर ट्रैवल लिस्ट का हिस्सा होनी चाहिए।

Heritage Train, पातालपानी झरना: सफर का मुख्य आकर्षण

इस ट्रेन यात्रा का सबसे बड़ा रोमांच ‘पातालपानी झरना’ है। चोरल नदी से बनने वाला यह विशाल जलप्रपात करीब 300 फीट की ऊंचाई से नीचे गिरता है। मॉनसून के दौरान जब पानी का बहाव तेज होता है, तो झरने की गर्जना दूर तक सुनाई देती है। लोगों के बीच यह मान्यता है कि झरने के नीचे बने कुंड की गहराई इतनी ज्यादा है कि उसका आज तक कोई पता नहीं लगा सका, इसी वजह से इसे ‘पातालपानी’ कहा जाता है। ट्रेन का सफर शुरू होते ही यह झरना अपनी पूरी भव्यता के साथ यात्रियों का स्वागत करता है, जो इस यात्रा का सबसे यादगार पल होता है।

सफर के दौरान कहां-कहां रुकती है यह ट्रेन?

यह ट्रेन मुख्य रूप से सप्ताहांत यानी वीकेंड पर चलाई जाती है, ताकि पर्यटक भीड़भाड़ से दूर सुकून के पल बिता सकें। पातालपानी स्टेशन से शुरू होकर यह ट्रेन सबसे पहले वॉटरफॉल के पास रुकती है। यहां यात्रियों को करीब 50 मिनट का समय दिया जाता है, ताकि वे झरने के सौंदर्य का आनंद ले सकें और तस्वीरें खींच सकें। इसके बाद ट्रेन एक सुंदर पुल के पास ठहरती है, जहां से आसपास के पहाड़ों और हरियाली का ऐसा नजारा दिखता है जो आपकी यादों में हमेशा के लिए बस जाएगा।

यात्रा का अंतिम पड़ाव कालाकुंड स्टेशन है। यहां यात्रियों को लगभग दो घंटे का समय मिलता है। आप इस दौरान कालाकुंड की वादियों में घूम सकते हैं, वहां के स्थानीय खान-पान का आनंद ले सकते हैं और फोटोग्राफी का लुत्फ उठा सकते हैं। अगर आप शहर की भागदौड़ से थक चुके हैं, तो यहां के शांत वातावरण में बिताए गए ये कुछ घंटे आपको नई ऊर्जा से भर देंगे।

Heritage Train: बजट में सफर और बुकिंग की आसान प्रक्रिया

हेरिटेज यात्रा का नाम सुनकर अक्सर लोग सोचते हैं कि टिकट बहुत महंगा होगा, लेकिन इस ट्रेन का किराया आम जनता की जेब को ध्यान में रखकर ही रखा गया है। आप इसके टिकटों की बुकिंग IRCTC, Paytm या MakeMyTrip जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से कर सकते हैं। इसके लिए आपको ट्रेन नंबर 52965 सर्च करना होगा। सामान्य श्रेणी का टिकट मात्र 20 रुपये के आसपास मिल जाता है। हां, अगर आप अधिक सुविधा के लिए एसी कोच चुनते हैं, तो उसका किराया कुछ अधिक हो सकता है।

इस ट्रेन तक पहुंचने के लिए आपको सबसे पहले इंदौर पहुंचना होगा। इंदौर रेलवे स्टेशन पातालपानी से करीब 35 किलोमीटर दूर है, जबकि इंदौर एयरपोर्ट से इसकी दूरी 40 किलोमीटर के आसपास है। आप महू तक ट्रेन या बस से आसानी से पहुंच सकते हैं और वहां से पातालपानी की दूरी केवल 8 किलोमीटर रह जाती है, जहां के लिए बस और टैक्सी की सुविधा हर समय उपलब्ध रहती है।

Heritage Train: इंदौर और आसपास के अन्य पर्यटन स्थल

अगर आप अपनी इस ट्रिप को एक छोटा वेकेशन बनाना चाहते हैं, तो इंदौर और उसके आसपास कई अन्य जगहें भी हैं जिन्हें अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं। आप महू के ऐतिहासिक महत्व को समझ सकते हैं, चोरल की वादियों में समय बिता सकते हैं या जानापाव कुटी जा सकते हैं, जिसे भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है।

इतना ही नहीं, इंदौर में रालामंडल वाइल्डलाइफ सेंचुरी, राजवाड़ा पैलेस, लाल बाग पैलेस और मशहूर सराफा बाजार का स्वाद भी आपकी इस यात्रा को अधूरा नहीं रहने देगा। ये तमाम जगहें आपके मॉनसून टूर को एक संपूर्ण अनुभव में बदल देंगी।

यह हेरिटेज ट्रेन केवल एक साधन नहीं है, बल्कि एक अनुभव है। मॉनसून में जब चारों तरफ हरियाली की चादर बिछ जाती है, तब पातालपानी से कालाकुंड का यह सफर हमें याद दिलाता है कि हमारा देश कितना खूबसूरत है। अगर आपने अभी तक इस ट्रेन का अनुभव नहीं किया है, तो इस बार अपने कैलेंडर में सप्ताहांत की छुट्टियां बुक कीजिए और निकल पड़िए इस यादगार यात्रा पर। यह सफर न केवल आपकी फोटो गैलरी को खूबसूरत तस्वीरों से भर देगा, बल्कि आपकी आत्मा को भी तृप्त कर देगा।

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